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12 अक्टूबर 2011

जीवन और जन्मदिन

65 टिप्‍पणियां:
जीवन एक अनवरत चलने वाली प्रक्रिया है. साँसों का यह सफ़र इंसान को किस पड़ाव तक ले जाए यह निश्चित नहीं है. जब तक साँसें चल रही है जीवन है, सांसें रुकी की नहीं जीवन समाप्त समझो. लेकिन साँसों के रुकने से जीवन समाप्त नहीं होता हमें यह बात समझ लेनी चाहिए. हालाँकि इस जीवन के बारे में यह कहा जाता है कि "पानी केरा बुदबुदा, अस मानस की जात / देखते ही छुप जायेगा ज्यों तारा प्रभात". किसी हद तक तो यह बात सही भी लगती है. लेकिन जब गहरे में उतरकर देखते हैं तो यह तथ्य उभरकर सामने आता है कि जीवन की तो सीमा है, लेकिन जीव की नहीं. जीव की यात्रा अनन्त है और जीवन की सीमित. जीव परमात्मा का अंश है, तो जीवन प्रकृति का. यह बात भी गौर करने योग्य है कि प्रकृति परमात्मा की छाया है और हम भी प्रकृति का एक अंश, यह भी सही है कि जिन तत्वों से जीवन का निर्माण हुआ है, जीवन की समाप्ति पर वह तत्व अपने-अपने मूल में मिल जाते हैं और फिर नव निर्माण होता है. यह प्रक्रिया अनवरत चल रही है सृष्टि के प्रारम्भ से, और चलती रहेगी अनंत काल तक. बस जीवन के प्रति अगर यही समझ बनी रहती है तो जीवन का सफर सुखदायी और आनंदमय बना रहता है, और हम साँसों के इस सफर को तय करते हैं पूरी संजीदगी के साथ. 
 
आज जब मैंने जीवन के 29 वर्षों का सफर  तय कर लिया तो बहुत सी बातों के विषयों में सोचा और
आकलन किया खुद का, और खुद के कर्मों का बस यही कि जीवन जिस दिशा में जा रहा है और जिस गति से जा रहा है, अगर वही दिशा  और गति  बनी रहे तो भी कहीं न कहीं जीवन की सार्थकता सिद्ध हो जाए. लेकिन इसके लिए मुझे बहुत संभल कर चलना है. क्योँकि इस संसार में खुद को पाक-साफ रखना बहुत कठिन कार्य है, लेकिन फिर भी कोशिश तो की जा सकती है और बस यही  प्रयास अनवरत जारी रहता है. हालाँकि यह मानवीय स्वभाव है कि वह कभी भी एक सी चीजों पर केन्द्रित नहीं रहता और उसे रहना भी नहीं चाहिए. मन की चंचलता और बुद्धि की तार्किकता उसे जीवन भर संघर्षरत रखती है और मानव अपनी उपलब्धियों से खुद को गर्वित महसूस करता है. लेकिन यह बात हमेशा मेरे जहन में रहती है कि "क्षणिकता" से "वास्तविकता" की और बढ़ा जाए, अन्धकार से प्रकाश  की ओर, अज्ञान से ज्ञान की ओर, भौतिकता से अध्यात्म की ओर  अगर यह सब हो जाता  है तो निश्चित रूप से जीवन मृत्यु से अमरत्व की ओर बढ़ जाएगा ओर जीवन का लक्ष्य सिद्ध हो जायेगा. लेकिन यह होगा तब ही जब हमारा-आपका सहयोग और प्रेम परस्पर बना रहेगा. 

आज मन बहुत द्रवित है. सोचा अपने जीवन के हर पहलु को तो बहुत सी बातें नजर आयीं. ब्लॉगजगत का दिया हुआ प्यार और सम्मान मेरी आखों में आंसू ले आया. जब मैंने ब्लॉगिंग की दुनिया में प्रवेश किया था तो एक सामान्य पाठक के रूप में और आज भी खुद को ब्लॉगिंग के विस्तृत पटल पर एक सामान्य पाठक ही मानता हूँ. आज जो भी कुछ कर पाता हूँ यह सब आपके प्रेम और सहयोग का ही परिणाम है. आपकी प्रेरणादायी टिप्पणियाँ ही नहीं बल्कि समय -समय पर व्यक्तिगत रूप दिए गए आपके सुझाब भी मेरे लिए बहुत मायने रखते हैं. इसके अलावा आपका अपनापन तो मेरे लिए खुदा की सौगात से कम नहीं. इसलिए आज नतमस्तक हूँ आप सबके सामने. कल जब पोस्ट लिख रहा था तो कुछ नाम मेरे जहन में उभर आये थे. लेकिन जब पूरी सूची देखी तो लगा कि इतने सारे नामों के लिए तो एक अलग से पोस्ट लिखनी पड़ेगी और फिर सोचा कि ब्लॉग जगत ने जो कुछ मुझे दिया है उसके लिए धन्यवाद कहना, एक औपचारिकता को निभाने जैसा होगा.

हालाँकि सूचना और तकनीक के इस दौर में आभासी रिश्तों की बात की जाती है और इसे एक तरह से आभासी दुनिया कहा जाता है. लेकिन मैंने जहाँ तक अनुभव किया मुझे काफी हद तक ऐसा प्रतीत नहीं हुआ. जिस भी व्यक्ति से बात हुई सबने सहयोग और प्रेम की ही बात की. माध्यम कोई भी रहा हो (टेलीफोन, फेसबुक, ऑरकुट, मेल) आदि. लेकिन मैंने सबको सहयोग देते हुए पाया. इसलिए खुद को बहुत खुशनसीब समझ रहा हूँ. अब तो लगता है कि जीवन का सफर एक नए दौर की तरफ चल पड़ा और यह दौर और यह रिश्ते मुझे जरुर कोई नया मुकाम देंगे. इसी आशा के साथ....! अब आप सब तो यही कहेंगे न ........ !
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आज की इस पोस्ट का पॉडकास्ट ब्लॉग जगत की चर्चित पॉडकास्टर आदरणीय अर्चना जी के सौजन्य से आप मेरी आवाज में सुन सकते हैं ...आदरणीय अर्चना जी ने मेरे मन की भावनाओं को समझते हुए आपकी नजर यह पोस्ट पेश की ...आशा है आपको यह प्रयास पसंद आएगा ...!
                                  

31 दिसंबर 2010

मैं कैसे कहूँ कि तू ठहर जा

112 टिप्‍पणियां:

अलविदा 2010 : समय मैं क्या कहूँ तेरे बारे में तू आता है और चला जाता है , या यूँ कहूँ तू अनवरत गाति से चलता रहता है और मेरी सांसों का सफ़र भी तेरे साथ लगातार चलता रहता है । पर अब तुझे जाना ही है तो मेरा कोई वश नहीं कि मैं तुझे कहूँ की तू ठहर जा और मैं कहूँगा भी नहीं ....बस जाते -जाते मुझे तेरे द्वारा किये गए उपकार याद आ रहे हैं । 365 1 /4 दिन के इस सफ़र में मैंने तेरे साथ 8,766 घंटे  और 5,25,960 मिनट 3,15,57,600 सेकण्ड बिताये । हम दोनों का साथ न जाने कितने वर्षों से इसी तरह है । आप इतने समय के लिए आते हो और चले जाते हो... मैं तुम्हारे जाने के बाद सोचता हूँ कि मैंने क्या किया तुम्हारे साथ रहकर : पर 2010 तुम मेरे लिए सबसे ख़ास रहे । जिन्दगी का सफ़र ...सफ़र में ही बीत गया । बहुत जगह जाना हुआ इस वर्ष भी .. बहुत सारे लोगों से मिलना हुआ । कल भी मैं सोच रहा था, पर सच कहूँ तो सिर्फ एक घटना ही ऐसी रही जिसने बहुत समय तक मुझे परेशान किया ...परन्तु अब छोड़ो ..सबसे महत्वपूर्ण यह रहा कि इस वर्ष मेरा " ब्लॉग जगत" में प्रवेश हुआ वो भी एक घटना थी ...और बहुत महत्वपूर्ण घटना ...यहाँ पर आकर मैं धन्य हो गया...इस नाचीज को बहुत सम्मान और स्नेह मिला है यहाँ ..रह - रह कर आपको याद करता हूँ, और यह याद अमिट बनी रहेगी, ऐसा मेरा वादा है ..जिन्दगी के इतिहास में आपका स्थान हमेशा रहेगा ...और अब मैं आपसे इजाजत चाहता हूँ ...जाते -जाते यह भी बता दूँ आपने मुझे हमेशा नसीहत दी है कि :-
जिन्दगी अनमोल है , इसे संभाल कर रखना
सांसों के सफर में , खुद के साथ, ओरों का भी ख्याल रखना ।
31 दिसम्बर रात्रि 11 : 59 :59 पर आप मेरे से सदा के लिए विदा हो जाओगे ...पर जुदा कभी भी नहीं ....शुक्रिया
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अब हम तुझे नव वर्ष 2011 के नाम से पुकारेंगे और "तेरे आने की जब खबर महके ..तेरी खुशबू से सारा घर चहके " और अगर घर में ख़ुशी का वातावरण है तो मैं सभी को शुभकामनायें देना चाहूँगा, कि आने वाले वर्ष में हर किसी के घर में खुशियों कि बरसात हो ...मैं पूरे विश्व में शन्ति और सद्भाव की कामना करता हूँ ...इंसानियत और भी बढे, हम एक दुसरे के करीब आ पायें ..मानवता भरा जीवन जी पायें ..किसी गिरते हुए को उठा पायें ..और हर संभव कोशिश रहे कि हम पूरी संवेदनशीलता से जीवन के इस सफ़र को तय कर पायें ...
मेरी और से शुभकामनायें :-
  • मेरी शुभकामना विश्व के हर उस व्यक्ति को है जो मानवीय मूल्यों पर आधारित जीवन जीते हुए हमेशा मानवता के लिए समर्पित है ।
  • देश के वो सेना नायक (जल ,थल,वायु ) जो सियाचिन जैसे न जाने कितने दुर्गम इलाकों में रहकर भारत माता की सीमाओं की दिन- रात रक्षा करते हैं .. उनके इस समर्पण भाव से ही आज हम सुरक्षित हैं ,हम चैन की नींद सो पाते हैं ...ऐसे नायकों को और उनके परिवारों को मेरी हार्दिक शुभकामनायें ।
  • अब ध्यान जाता है एक ऐसे बालक की तरफ जो तन पर कपडा न होते हुए भी कडकती ठण्ड में रेहड़ी पर पूरे कर्तव्य भाव से मूंगफली बेच रहा है ....ऐसे न जाने कितने पेशे हैं जहाँ पर ऐसे बालक काम करते हैं ..उन सबको मेरी हार्दिक शुभकामनायें ।
  • मेरी हार्दिक शुभकामना एक ऐसी बहन, भाई को भी है जो अपने जीवन में आभाव होते हुए भी अपने कर्तव्य के प्रति पूरी निष्ठा से समर्पित हैं ।
  • मेरी शुभकामना समाज के हर उस व्यक्ति को है जो हमारे समाज और देश में फैली अव्यवस्था को व्यवस्थित करने में ...और की सामाजिक कुरीतिओं को मिटाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
सूची तो बहुत लम्बी है अब एक पंक्ति में कहना चाहूँगा ....पूरे विश्व के लोगों को मेरी तरफ से नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनायें .........!
और .................................विशिष्ट ....
"ब्लॉग जगत के तमाम ब्लॉगर साथियों को मेरी तरफ से नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनायें , आपका स्नेह और प्यार इसी तरह बरकरार रहे ...आपने जिस तरह से इस नाचीज पर अपनी इनायत भरी निगाह रखी है ..उसे यूँ ही बरकरार रखना ......मुझे अभी बहुत कुछ करना है ...आपके आशीर्वादों से ..........!
और अब मैं तैयार हूँ 2011 का हार्दिक स्वागत करने के लिए ....और 2010 को अलविदा कहने के लिए :-

      नव वर्ष 2011 की हार्दिक
      शुभकामनाओं के साथ
        .......आपका अपना......
       .......केवल राम ...!