शुभकामनाएं लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
शुभकामनाएं लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

30 अक्टूबर 2016

कभी न बुझने वाला दीप जलाना

7 टिप्‍पणियां:
दीप
खुद को जलाता
किसी दूसरे को प्रकाश से
सरावोर करने के लिए
रिश्ता दीप का उससे कोई नहीं
न ही कोई चाह है उससे
न कोई बदले का भाव
फिर भी
दीप
उसे प्रकाश दे रहा है
सिर्फ अपने कर्तव्य की पूर्ति के लिए.

दीप
शिक्षा है संसार के लिए
जो खुद को जलाकर
मार्ग बना रहा है दूसरों के लिए
अँधेरा चाहे कितना भी घना हो
दीप की एक लौ काफी है
हजारों वर्ष का अँधेरा मिटाने के लिए
दीप
अर्थ कई हैं इसके, कई हैं मायने   
जिन्दगी जियें हम दीप की भान्ति
समग्र संसार के लिए.

दीप
साथी है जीवन का
हर कर्म इसके बिना है अधूरा
दीप का होना है जीवन का होना
इसके बिना सब और है अँधेरा
दीप
भेद है जड़ और चेतना का
दीप प्रतीक है करुणा और संवेदना का  
दीप बिना है जीवन सूना  
और मृत्यु भी अधूरी
दीप के बिना.

दीप
प्रतीक अंतर्मन के प्रकाश का
सोये हुए जग के उजास का
भटके हुए राही की
मंजिल का यह आधार
दीप से ही मंजिल पाता
यह संसार
दीप
न बुझने वाला अंतर्मन में जलाना
दीप की इस रौशनी में
प्रेम के बीज बोना
करुणा की फुहार से उसे सींचना
इस संसार में चंद दिनों का सफर
दीप की भान्ति तय करते जाना
दिवाली की इस शुभ बेला पर
कभी न बुझने वाला दीप जलाना. 

12 अक्टूबर 2013

जन्मदिन के बहाने

11 टिप्‍पणियां:
जन्मदिन हर किसी की जिन्दगी का अहम् दिन होता है. जीवन में चाहे कैसी भी स्थिति हो हम इस अवसर पर खासे रोमांचित होते हैं और माता-पिता के साथ-साथ ईश्वर को भी धन्यवाद देते हैं. जीवन में माता-पिता हमारे लिए पूजनीय होते हैं और ईश्वर अराध्य, माता-पिता साधन होते हैं तो ईश्वर साध्य, माता-पिता साकार हैं तो ईश्वर निराकार, माता-पिता के बगैर हम जीवन की कल्पना नहीं कर सकते, तो ईश्वर के बिना जीव की, ईश्वर और माता-पिता के गुणों और कर्मों का सम्बन्ध इतना गहरा है कि उसे एक दुसरे से अलग करना मुमकिन नहीं. इसलिए भारतीय संस्कृति में माता-पिता को ही ईश्वर की संज्ञा से अभिहित किया जाता रहा है. जीवन का कोई भी पक्ष हो हर पक्ष का शृंगार माता-पिता और ईश्वर के माध्यम से ही होता है, हम जीवन में किसी भी मुकाम तक पहुँच जाएँ लेकिन माता-पिता के लिए हम हमेशा बच्चे ही बने रहते हैं और इसी कारण हमें उनका प्रेम अनवरत मिलता रहता है और हमारा जीवन धन्य होता रहता है. 

जीवन के विषय में अनेक मत प्रचलित हैं और अनेक विश्लेषण भी, लेकिन अभी तक जीवन के विषय में कोई 
एक सर्वसम्मत मत प्रचलन में हो, ऐसा नहीं है. संसार में जितने भी दर्शन, मत और विचार आये सब जीवन की व्याख्या अपने-अपने तरीके से करते हैं और अभी तक कर रहे हैं, लेकिन कोई किसी निश्चित निष्कर्ष तक नहीं पहुंचता. जैसे हम जीवन के प्रति किसी निश्चित निष्कर्ष तक नहीं पहुँच सके वैसे ही हम ईश्वर के प्रति भी एकरूप दृष्टिकोण नहीं बना पाए और इसीलिए हम जीवन और मृत्य के बीच में जूझते हुए आगे बढ़ रहे हैं. जिसे हम जीवन कह रहे हैं वह तो ठीक है, लेकिन जिसे हम मृत्यु कह रहे हैं वह कहीं एक पक्षीय है. क्योँकि हम जब इस कायनात को देखते हैं तो हम पाते हैं कि यह पूरी सृष्टि पांच तत्वों से बनी हुई है और इस सृष्टि का संचालन-पालन करने वाला ईश्वर है और यह निराकार है, अजर है, अमर है, अविनाशी है, अखंड है तो फिर यह बात स्वाभाविक है कि ईश्वर का अंश जो शरीर में रहता है वह शरीर के न होने पर भी उसी स्थिति में रहता है, और जहाँ तक पांच तत्वों का सवाल है यह भी अपने-अपने मूल में मिलते हैं इसलिए मृत्यु का कोई प्रश्न ही पैदा नहीं होता. अब यह एक कपोल कल्पना जैसा है कि मृत्यु के बाद जीवन समाप्त हो जाता है, हाँ यह बात तो सच है कि जिस रूप में यह हमारे सामने होता है, वह रूप मिटता जरुर है, लेकिन वह ही कहीं नव जीवन का आधार बनता है, इसलिए जितना सकारात्मक दृष्टिकोण हम जीवन के प्रति रखते हैं उतना ही सकारात्मक दृष्टिकोण हमें इसके न होने पर भी रखना चाहिए. जब तक जीवन है तब तक हम पूरे संसार के प्रति सकारात्मक बने रहें और यह तब ही हो सकता है जब हम जीवन की वास्तविकता को समझते हों.

वर्तमान परिवेश को जब हम गहराई से विश्लेषित करते हैं तो हम पाते हैं कि जीवन के प्रति अनेक प्रकार के विरोधाभास प्रचलित हैं और यही हमारे बीच विरोध का कारण हैं. इन्ही विरोधों के कारण हम एक दुसरे को भिन्न समझते हैं और यहीं से क्रम शुरू होता है मनुष्य का मनुष्य के प्रति वैर भाव का और यही वैर भाव हमें गहन अन्धकार की तरफ ले जाता है और हम इतने क्रूर होते हैं कि हम मनुष्य को मनुष्य समझते ही नहीं और इस हद तक गिर जाते हैं कि हम उसके शरीर से प्राणों तक को जुदा करते हैं. फिर ऐसी स्थिति में न तो हमारे जीवन का कोई लाभ है और न ही जन्मदिन की कोई महता. हम जन्मदिन मनाएं एक उत्सव की तरह और जीवन जिएँ एक महोत्सव की तरह तो जीवन और जन्मदिन दोनों की महता बनी रहेगी.....इस ख़ास अवसर पर शुभकामनाओं के लिए आप सबका तहे दिल से शुक्रिया.     

31 दिसंबर 2011

जब तुझे रुकना ही नहीं है तो

35 टिप्‍पणियां:
समयसोचता हूँ तू किसी दिन अगर ठहर जाता तो मेरी सांसों का यह सफ़र भी थोड़ी देर के लिए विश्राम पाता और मैं करता तुझसे बातें तेरे साथ बिताये लम्हों कीऔर उस वक़्त मुझे लगता तू कहीं नहीं है और मैं भी कहीं नहीं. हम दोनों की एकात्मकता यह स्थापित करती कि जीवन और जगत संचालित हैं किसी अदृश्य सत्ता सेऔर वह अदृश्य सत्ता हम दोनों को बतला रही है जीवन के मायनें. तुम हमेशा उस अदृश्य सत्ता से निभा जाते होलेकिन मैं हमेशा तेरे अच्छे होने का इन्तजार करता रहता. तू अच्छा कब है और कब बुरा यह आज तक कोई नहीं जान पाया. लेकिन इस बात को सभी स्वीकार करते हैं कि वक़्त बड़ा बलवान होता है’. कई बार इस बात को सुनकर मेरे मन में भ्रम भी हुआलेकिन सच्चाई यही है. अब मैं भी यही मानता हूँ और आज तेरे सामने नतमस्तक हूँ. तुझे एक सीमा में बांधकर विदा करने के लिए. हालाँकि जो पैमाना हमने तुझे विदा करने के लिए तय किया है वह तो प्रकृति का बदलाब हैऋतुओं का रूपांतरण है और उस प्राकृतिक बदलाब में हमनें तुझे भी शामिल किया. चलो आज मानते हैं कि एक साल के रूप में तू हमसे विदा हो रहा है. लेकिन सच यह है कि यह सब सोच है और किसी हद तक यह सोच प्रासंगिक भी. ना जाने कब से यह सब चल रहा है और ना जाने कब तक चलता रहेगामेरी साँसों का सफ़र जब तक इस रूप में तेरे साथ है तब तक तो है हीऔर ना जाने कितने रूपों में रहा हैऔर ना जाने कब तक रहेगा. खैर बहुत हो चुकी बातें तुमसे और जितनी करूँगा काम तो आने वाली नहीं. जब तुझे रुकना ही नहीं है तो  मैं कैसे कहूँ कि तू ठहर जा.
याद आएगा तू मुझे  2011 के रूप में सांसों के अंतिम सफ़र तकजीवन की नियति तक. क्योँकि तुझसे बहुत अच्छी यादें जुडी हैं  मेरी वर्ष 2011 के रूप में. पता ही नहीं चला कि तू जीवन से कब जुदा हो गया. लेकिन जब पीछे मुड़कर देखा तो सच में तू मुझसे जुदा हो रहा है. अहसास हुआ मुझे आज तेरे होने काबहुत कुछ खोने और उससे ज्यादा कहीं पाने का. क्या-क्या नहीं दिया तूने मुझे पूरे   दिनों  मेंयह सब सोच कर रोमांचित हो रहा हूँ मैं और आने वाले वर्षों में जीवन जीने की प्रेरणा ले रहा हूँहालाँकि यह भी सच है कि जीवन और साँसों का सफ़र अनिश्चित हैलेकिन यह भी सही है कि साँसों के सफ़र के साथ ही जीवन का सफ़र भी जुड़ा रहेगा. बस यह बात अच्छी तरह से मेरे जहन में रहनी चाहिएफिर मैं किसी भी हालत में तुझे विस्मृत नहीं कर पाऊंगा और अगर मैंने तुझे कभी विस्मृत नहीं किया तो यह निश्चित है कि मेरे जीवन की सार्थकता किसी न किसी तरीके से सिद्ध ही हो जाएगी. क्योँकि मैंने जीवन में सफल लोगों से यही सुना है कि वक़्त की कद्र करोऔर यह भी सुना है कि जो वक़्त की कद्र करता है वक़्त उसकी कद्र करता हैइसलिए मुझे हमेशा तेरी कद्र का भान रहे . फिर भी वर्ष 2011 के रूप में तुझे अच्छी यादों के साथ विदा कर रहा हूँअब हम फिर वहीँ से शुरू करेंगे जहाँ से हमने तेरा साथ लिया थाजब तू आया था तो हमने खूब मस्ती की थी और तेरा स्वागत किया था हमने एक जनवरी 2011 के रूप में. आज फिर एक जनवरी है और उसे हम 2012 कहेंगे और सोचेंगे कि नया साल आया है और यह प्रक्रिया अनवरत चल रही है और चलती रहेगी. हम जीवन को एक प्रक्रिया के तहत जीते हैं और वह प्रक्रिया दिन, महीनों और सालों के रूप में हमारे जीवन में घटित होती है. 
खैर अब समय तू वर्ष 2012 के रूप में हमारे सामने हैं. हर किसी की जिन्दगी का अपना मकसद है और हर कोई जीवन को सफल बनाने में लगा है. इसलिए जब तू 2012 के रूप में हम सबके साथ है तो कामना यही है कि हर किसी को सुमति प्राप्त हो और हर कोई संकीर्णताओं से उपर उठकर देशसमाज और मानवता के लिए कार्य करे. आज जो रूप मानव का हमारे सामने है उससे हमें राहत मिले. देश और दुनिया में जो अशांति फैली हुई है वह जितनी जल्दी हो सके समाप्त हो और इस सुंदर सी धरती का वातावरण और सुंदर हो जाए. पूरी कायनात खुदा का कुनबा है और इस में रहने वाला हर एक प्राणी खुदा की खुबसूरत कृति है. ऐसा वातावरण बने कि हम इस पूरी कायनात से प्रेम कर सकें. हमारी शुभकामनाएं तभी असर करेंगी जब हमारा आचरण और कर्म सही होगा. इसलिए खुद के जीवन और चरित्र को विश्लेषित करने का भी एक अवसर तू हमें प्रदान कर रहा है और हम ऐसा कर पायें. जब धरती पर सभी मानवीय मूल्यों को धारण कर जीवन जीयेंगे तब हमारा अपना जीवन तो सार्थक होगा ही औरों के लिए भी हम प्रेरणा और सुख का कारण बनेंगे. इसी कामना के साथ आप सभी को नववर्ष 2012 की हार्दिक शुभकामनाएं. ईश्वर से यही प्रार्थना है कि आने वाला वर्ष हम सब की जिन्दगी में ढेर सारे सुखद अहसास लाये और हम सबका जीवन खुशियों से सराबोर हो. इन्हीं कामनाओं के साथवर्ष 2012  तेरा स्वागत है.