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30 अगस्त 2011

संसार नहीं होता

51 टिप्‍पणियां:
अब मुझे और प्यार नहीं होता
अब तेरा इन्तजार नहीं होता

तन्हा रहा हूँ बहुत वक़्त मगर
तन्हाई का पल यादगार नहीं होता

जीने मरने की कसमें खाई हमने 
बिछुड़ने के बाद, यार -यार नहीं होता

कभी तन्हाई में हुई जो बातें तुमसे
बातें- बातें हैं , बातों का संसार नहीं होता 


मुहब्बत भावना ही कुछ ऐसी है 
तेजधार तो है , मगर हथियार नहीं होता

केवल  खुदी को मिटा के, पाया है तुझे 
तुम्हारे मिटने से तो, मेरा संसार नहीं होता

07 फ़रवरी 2011

कितना मुश्किल है

75 टिप्‍पणियां:
खुशी अपने लिए सोचते हैं सब
करते हैं कोशिश
दुसरे की भावनाओं को
ठेस लगाकर , खुद खुश होने की
पर....
किसी की भावनाओं को समझकर
खुद खुश होना ,कितना मुश्किल है

राह चलते , दिख जाते हैं, कई दृश्य ह्रदय विदारक
हर दृश्य पर सोच कर , कुछ करने की तमन्ना
और उस निस्वार्थ तमन्ना को
सोचकर ....
मूर्त रूप देना , कितना मुश्किल है

मुझे समझ ले अपना कोई
ह्रदय में बसाकर दे प्यार और सत्कार
किसी को अपना बनाने की सब सोचते हैं
पर .....
सहज भाव से किसी का हो जाना , कितना मुश्किल है

दुखी दुसरे को देखकर
उसके आंसू पोंछना , आसान है
लेकिन....
किसी के दुःख पर खुद रोना , कितना मुश्किल है .
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आप सबका ह्रदय से आभार ...आपने मेरी ब्लॉगरीय षटकर्म वाली पोस्ट पर इतनी अच्छी प्रतिक्रियाएं दी ...आपके स्नेह और मार्गदर्शन से यह संभव हो पाया है ...आशा है आप अपना सहयोग यूँ ही बनाये रखेंगे ....!
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