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21 दिसंबर 2010

अनुभूति और सत्य

55 टिप्‍पणियां:
कदमों के निशां .
जन्म के बाद की
आनिश्चितताएँ
और
जीवन के अंतिम पड़ाव से पहले
सांसों के इस सफ़र में
मेरी जिन्दगी
जिन राहों से गुजरेगी
मुझे तय करना है ....
कि.....
उन राहों पर
मेरे कदमों के निशां
रहेंगे या नहीं ।
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इबादत
वो क्या खाक इबादत
खुदा की करेंगे
जो .....
इंसानों से नफरत
करते हैं .....
और पत्थरों को
खुदा समझ बेठें हैं ।
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अंतिम सत्य
जीवन की क्षणभंगुरता

और मृगतृष्णाओं के द्वंद्व के बीच
मेरी 'रूह' हमेशा कहती है
जीवन का अंतिम सत्य
प्रकाश को पाना है ...
बंधन मुक्त हो जाना है .
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