16 सितंबर 2010

तन्हा रहना

2 टिप्‍पणियां:

तन्हा रहना गर आसां होता,  मिलन  को  कहता क्यों ?
हिज्र-ए-गम तुम्हारा न होता, मौन फिर रहता क्योँ ?

पलक झपकते, आँख खुलते, याद आती तुम्हारी
ख्वाब तुम्हारा न होता, अकेला रोता रहता क्योँ?

दिल की हर धड़कन में अजीब हलचल समाई
सांसे बेचैन न होती, तो तडपता रहता क्योँ ?

कैसे कहूँ तुम्हारे बिना, हालात क्या हैं मेरे
गर इश्क बयां-ए-जुबां होता, तो चुप रहता क्योँ ?

14 सितंबर 2010

सागर के उस पार प्यार

5 टिप्‍पणियां:

इस पार से उस पार
विशाल है जिसका संसार
यहाँ जरुरत, वहां चाहत
इसकी महिमा बेशुमार
ना कोई किनारा ना दीवार
ना पता गहराई का ना आकार
सागर के उस पार प्यार।

कोशिश करते हैं लोग
इससे पाने की
सोचते हैं ..................?
पा जाएँ इसका अंत बनके दोस्त यार ॥
सागर से गहरा है यह
डूबने वाले बहुत डूबे हैं
कुछ कर सामना मछ्लियौं का , मगरमच्छों का
अपना लक्ष्य चूके हैं.....!
 
मैं भी कर रहा हूँ कोशिश
इस पार से, उस पार जाने की

साहिल का है इन्तजार
अंधी राह है मेरी
साहिल मद्दद्गर
आएगा जब ज्वार -भाटा
नौका लग जाये उस पार
आएगा तूफ़ान अगर
तो समां लेगी मंझधार
पर, विश्वास के साथ बढ़ना होगा
अपना लक्ष्य पूर्ण करना होगा
सागर के उस पार प्यार।

इस सागर के उस पार
आनंद है बेशुमार ................
मेरे साहिल मुझे ले चलना
जहाँ बैठा है मेरा दोस्त यार
सागर के उस पार प्यार ॥

27 अगस्त 2010

चाँद से चेहरे को...............केवल राम

4 टिप्‍पणियां:
चाँद से चेहरे को आँचल में छुपाये रखना
मेरी तस्वीर को सीने से लगाये रखना

तेरी जुल्फों की हवा लगती है सबको भली
अपने दामन को जमाने से बचाए रखना

फिर याद आएगी मोहब्बत मेरी इक रोज तुझे
अपनी पलकों को मेरी राहों में बिछाये रखना

इश्क बदनाम न हो जाये ज़माने में कहीं
हर शहरी से मेरा नाम छुपाये रखना

सपना है ' केवल' प्यार यहाँ बेहद दर्द है
कहे लाख जमाना , तुम मुझे अपनाये रखना

हार के फिर जिता दी है बाजी तुमने मेरी
प्यार के इस खेल में, मुझे खिलाडी बनाये रखना