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16 सितंबर 2010

तन्हा रहना

2 टिप्‍पणियां:

तन्हा रहना गर आसां होता,  मिलन  को  कहता क्यों ?
हिज्र-ए-गम तुम्हारा न होता, मौन फिर रहता क्योँ ?

पलक झपकते, आँख खुलते, याद आती तुम्हारी
ख्वाब तुम्हारा न होता, अकेला रोता रहता क्योँ?

दिल की हर धड़कन में अजीब हलचल समाई
सांसे बेचैन न होती, तो तडपता रहता क्योँ ?

कैसे कहूँ तुम्हारे बिना, हालात क्या हैं मेरे
गर इश्क बयां-ए-जुबां होता, तो चुप रहता क्योँ ?