सोचते - सोचते मुझे शाम हो गयी
यह जिन्दगी उनके नाम हो गयी .
बात - बात में सोच रहा था उनके बारेबात - बात में उलझन पैदा हो गयी .
संभाले रखा था जिसे मैंने अपने लिए
दौलत वो तमाम उनके नाम हो गयी .
सपना बन कर रह गया उनके बारे सोचना
सामने उनके आते ही , जबान बंद हो गयी .
मेरे गिरते अश्कों का नहीं कोई सानी
मेरी हर निगाह अब बे ईमान हो गयी .
संजोया सपना जिन्हें अपना बनाने का
उन्हीं से केवल गलतफहमी हो गयी