
एक बार मेरे अनुरोध पर
तुम चलो मयखाने में
फिर देखना .......
क्या मजा आता है,
पीने और पिलाने में ।
वहां ना कोई साजिश
ना कोई भेदभाव
ना कोई नफरत की दीवार
जितनी पीयेंगे
उतना खुमार ,उतना प्यार ।
.. इस नफरत की दुनिया की चीजों से
तो बेहतर है, मेरे दोस्तो...!
मयखाने का शराब और सिगार
तुम चलो मेरे अनुरोध पर एक बार ।
वहां हम ना जाति की बात करेंगे
ना होगा भाषा की भिन्नता पर विचार
ना होगी सीमाओं की बातें
ना नफरत,ना तकरार...
मेरे मयखाने की मेज पर
तुम नजर टिकाना, एक बार
उसकी चमकीली तह तुम्हें बता देगी
समता...को समझता है समझदार
उसके चारों तरफ की कुर्सियां ,
कर देंगी मिलकर रहने का इजहार ।

तुम मयखाने में
बेशक खूब मत पीना
ना ही पिलाना
बस एक बार
तुम महसूस करना
मयखाने का संसार