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07 दिसंबर 2010

एक दिन जिन्दगी

67 टिप्‍पणियां:
(कभी जिन्दगी और इसके मंतव्य के बारे में सोचता हूँ तो खुद को अजीब सी स्थिति में पाता हूँ ..और फिर सोचता हूँ कुछ इस तरह ......

एक दिन जिन्दगी हमसे यूँ ही रूठ जाएगी
सवालात होंगे सब खत्म, सिर्फ बातें ही रह जाएगी

तुम जिन्दगी में कभी, फूलों की तमन्ना ना करना
फूलों की तमन्ना से, काँटों की अहमियत बढ़ जाएगी

खुदा का नायाब तोहफा हो तुम दुनिया के लिए
दुःख दुनिया को देने से, कीमत तुम्हारी कम हो जाएगी

दुनिया के लिए कुछ न कर सको तो इतना कर देना
तुम्हारी निष्काम दुआ, किसी के चेहरे को मुस्काएगी


लाख कोशिश करें हम खुद को छुपाने की
बदलते चेहरे पर, असलियत सामने आ जाएगी

मैं देता हूँ नसीहत तुमको, खुद को "खुदा" बनाने की
सब में केवल "खुदा" को देखो, तुम्हें खुदाई मिल जाएगी