04 जुलाई 2011

सुर और साहित्य

जब भी मुझे कहीं अकेले में बैठने का अवसर मिलता है तो मैं महसूस  हूँ कि इस सृष्टि के कण - कण में संगीत है. इसमें सुर समाया है . लेकिन हम उस संगीत को अनुभव नहीं कर पाते . आज हम भौतिकता में इतने रम चुके हैं कि हमारे पास कहाँ वक्त है उस संगीत को सुनने, का अनुभव करने का , और दूसरी तरफ हमारी जीवन  शैली इस तरह की  बन चुकी है कि हम कहाँ ध्यान देते हैं कि इस अखंड ब्रह्माण्ड की रचना में संगीत का अपना महत्व है . "बिंग बैंग" सिद्धांत  की यह मान्यता है कि इस सृष्टि का निर्माण जब हुआ था तब भयंकर विस्फोट हुआ था . अगर विस्फोट हुआ तो ध्वनि तो निकली होगी ना और वही ध्वनि इस सृष्टि के निर्माण का आधार है और उस ध्वनि के कुछ अंशों को हम शब्दबद्ध कर संगीत के माध्यम से संगीतमय बनाकर उसका आनंद लेते हैं . यह बात भी कितनी रोचक है कि संगीत की विपुल राशि इन्हीं अक्षरों में समाहित है . सरगम यानि सा  , रे , , , , , नि , इन सात अक्षरों में संगीत समाहित है .

इस विषय पर कभी गंभीरता से बात करूँगा ...लेकिन आज आप मेरी पोस्ट "अक्षर साधना" को हिंदी  ब्लॉग जगत की चर्चित पॉडकास्टर आदरणीय अर्चना चावजी की कर्णप्रिय आवाज में सुनें . आदरणीय अर्चना जी से जब मैंने इस पोस्ट का पॉडकास्ट  तैयार करने  के लिए प्रार्थना की तो उन्होंने "मेरे मन की"  इस प्रार्थना को सहर्ष स्वीकार कर लिया और इस पोस्ट को अपनी मधुर आवाज देकर मुझे कृतार्थ कर दिया . उनकी आवाज का कायल मैं ही नहीं बल्कि पूरा ब्लॉग जगत है . आवाज ही  नहीं बल्कि शब्दों को पढने का उनका अंदाज और वाक्य में शब्दानुरूप उतार - चढ़ाव का भी पूरा ध्यान जो उनकी इस विधा और विशेषज्ञता को सिद्ध करता है ...तो लीजिये प्रस्तुत है अक्षर साधना अब आदरणीय अर्चना चावजी जी कर्णप्रिय आवाज  में ....आप उनके प्रोत्साहन के लिए उनके ब्लॉग मेरे मन की  पर भी टिप्पणी कर सकते हैं .....!

56 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

वाह!
केवलराम जी आपकी शब्दरचना बहुत बढ़िया है और इसको अर्चना चावजी का स्वर मिल जाए तो फिर तो सोने में सुगंध का अनुभव होने लगता है!
--
दो पंक्तियों में-
सार्थक लेखन!
अच्छा वाचन!!

संजय कुमार चौरसिया ने कहा…

सार्थक लेखन!
अच्छा वाचन!!

ब्लॉ.ललित शर्मा ने कहा…

अक्षर=जिसका कभी क्षरण न हो। जो कभी मरता नहीं। प्रलय से परे, जिसका कभी विनाश नहीं होता। पूर्ण है इसलिए अकाल है। अक्षर ही पूर्ण परमात्मा है। परमेश्वर का निज नाम भी ओ3म है। अक्षर उत्पत्ति-स्थिति-विनाश से मुक्त होकर हमेशा ब्रह्माण्ड में स्थित रहता है।

अर्चना जी द्वारा सुंदर प्रस्तूति
अक्षर महिमा वर्णन के साथ पोस्ट भी अमर हो गयी।
आभार

Deepak Saini ने कहा…

सुन्दर शब्द रचना एवं मधुर आवाज

संतोष त्रिवेदी ने कहा…

नया प्रयोग अच्छा है...अर्चनाजी को और आपको साधुवाद !

रश्मि प्रभा... ने कहा…

archna ji se main bahut prabhawit hun

नूतन .. ने कहा…

वाह ..आपको इसके लिये बहुत-बहुत बधाई, अर्चना जी का आभार ।

वन्दना ने कहा…

आपकी रचना तेताला पर भी है आप भी घूमते हुए आइये स्‍वागत है
http://tetalaa.blogspot.com/

Kailash C Sharma ने कहा…

सुन्दर शब्द रचना को अगर अर्चना जी की आवाज़ मिल जाए तो सोने में सुहागा हो जाता है..बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

Amrita Tanmay ने कहा…

अच्छी लगी पोस्ट .आपकी रूचि व मधुर संगीत.शुभकामनायें.

shikha varshney ने कहा…

सार्थक लेखन उपयोगी आलेख और प्रभावी वाचन.

Udan Tashtari ने कहा…

वाचन पसंद आया.

संध्या शर्मा ने कहा…

इतनी सुन्दर शब्द रचना और उसपर अर्चना जी की आवाज़ ..बहुत सुन्दर प्रस्तुति...अपना प्रयास इसी तरह जारी रखें........... शुभकामनाएं........
सुर और साहित्य विषय पर आपके विचार जानने की उत्सुकता है....

amrendra "amar" ने कहा…

सुंदर प्रस्तूति

डॉ टी एस दराल ने कहा…

छोटी सी उम्र में इतना गहरा चिंतन ।
बहुत बढ़िया । और सुन्दर प्रस्तुति अर्चना जी द्वारा ।

संजय भास्कर ने कहा…

केवल राम जी
सुन्दर शब्द एवं मधुर आवाज अच्छा प्रयोग है
..........सुंदर प्रस्तूति

संजय भास्कर ने कहा…

अर्चना जी का बहुत-बहुत आभार ।

संजय भास्कर ने कहा…

केवल जी बहुत सुन्दर प्रस्तुति... अस्वस्थता के कारण ब्लॉगजगत से दूर हूँ

सतीश सक्सेना ने कहा…

आज के समय में दूसरों के लिए कार्य करना आश्चर्य ही कहा जाएगा !अर्चना चावजी के लिए हार्दिक शुभकामनायें !!

Archana ने कहा…

ओह्ह.. तो इसलिए...फ़ोटो खोजी जा रही थी..
..आप सभी का आभार..आवाज पसन्द करने के लिए....(वैसे आलेख ज्यादा अच्छा है)...

राजीव तनेजा ने कहा…

अच्छी पोस्ट को जब मधुर स्वर भी मिल जाए तो कुछ और ही रंगत निखर कर आती है

Vivek Jain ने कहा…

आफरीन,

विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…

केवल राम जी
सुंदर प्रस्तूति

Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…

पोस्ट करने के लिए आभार

Anand Dwivedi ने कहा…

वाह बंधुवर अनुभूति के स्तर पर कुछ सुखद घटित हो रहा है अर्चना जी को यूँ सुनना
साधुवाद भाई !

दिगम्बर नासवा ने कहा…

ध्वनि शब्द और अक्षर का ज्ञान और संधान श्रष्टि से ही हुवा और इसी में निहित है ... बहुत ही अच्छा लगा आपका लेख और अर्चना जी का स्वर ..

Babli ने कहा…

बहुत बढ़िया, शानदार और सार्थक लेखन! प्रशंग्सनीय प्रस्तुती!

आशा ने कहा…

आपकी रचना और अर्चना जी की आवाज बहुत सुन्दर है |
बधाई
आशा

veerubhai ने कहा…

True ,Keval Ramji ,
The remnants of the Big Bang the Background radiation is still there .The Big Bang itself is the Dance of creation .The left over sound is still there .Nature has its own music and reverberation .But unfortunately we come for a walk with ears plugged with I-pods ,and close our selves to the beauties of the cosmos .Shbd Or Nad is brahm .Shbd regulates every thing around us .Good podcast .

Ravi Rajbhar ने कहा…

Adarniya Bade bhaiya ...
Sadar Pradam,,,

Apke shabdo me ek dil ki chhuwan hoti hai.

Archna ji ka bhi abhar.

:
Ravi Rajbhar

सुधीर ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति

Rachana ने कहा…

aapki shbd rachna bahut uttam hai aur usme archna ji ki awaj ne charchand laga diye hain
aapdono ko badhai
rachana

chirag ने कहा…

bahut khoob

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

शब्द और स्वर दोनों बेमिसाल..... बहुत बढ़िया

रविकर ने कहा…

शुक्रवार को आपकी रचना "चर्चा-मंच" पर है ||
आइये ----
http://charchamanch.blogspot.com/

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

आप और अर्चना जी, दोनों को बधाई !
सुन्दर को सुन्दरतम बनाने का अभिनव प्रयोग !
आभार !

Atul Shrivastava ने कहा…

अच्‍छी पोस्‍ट।
सार्थक प्रस्‍तुति।
शुभकामनाएं आपको।

वाणी गीत ने कहा…

अच्छी पोस्ट को अच्छी आवाज़ में सुनना हिंदी ब्लौगिंग की एक उपलब्धि ही है !

रविकर ने कहा…

http://charchamanch.blogspot.com/

आज आप चर्चा मंच पर हैं ||

Akshita (Pakhi) ने कहा…

बहुत सुन्दर...अच्छा लगा.

एस.एम.मासूम ने कहा…

अर्चना जी तो अब ब्लॉगजगत कि आवाज़ बन चुकी हैं.

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत ही अच्छा लगा आपका लेख और अर्चना जी का स्वर| आभार|

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

लेखन और वाचन दोनों ने मन मुग्ध किया

Ankur jain ने कहा…

शानदार प्रस्तुति केवलरामजी ..सुर और साहित्य का अद्भुत संगम बताने के लिए..वधाई

Jyoti Mishra ने कहा…

music ek aise cheez hai jo aapke bure se bure mood ko bhi badal sakti hai.
I am a music freak too :)

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

SAARTHAK LEKHAN.

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Zakir Ali 'Rajnish') ने कहा…

सुर और साहित्‍य, दोनों ही सुंदर।
------
TOP HINDI BLOGS !

JAGDISH BALI ने कहा…

Interesting one

smshindi By Sonu ने कहा…

बहुत सुन्दर अच्छा लगा!

smshindi By Sonu ने कहा…

मेरी नई पोस्ट पर आपका स्वागत है! मेरा ब्लॉग का लिंक्स दे रहा हूं!

हेल्लो दोस्तों आगामी..

Sunil Deepak ने कहा…

बहुत सुन्दर. क्वाँटम भौतिकी भी तो अणु परमाणु के निरन्तर नृत्य में छुपे संगीत की ही बात करता है.

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

बहुत बढ़िया प्रस्तुति...

पी.एस .भाकुनी ने कहा…

सुन्दर शब्द रचना एवं अर्चना जी द्वारा सुंदर प्रस्तूति.
इसके लिये बहुत-बहुत बधाई, और अर्चना जी का आभार .....

upendra shukla ने कहा…

waah bahut acchi rachna

Babli ने कहा…

मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
http://seawave-babli.blogspot.com/
http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

vidhya ने कहा…

वाह ..आपको इसके लिये बहुत-बहुत बधाई,


आप का बलाँग मूझे पढ कर अच्छा लगा , मैं भी एक बलाँग खोली हू
लिकं हैhttp://sarapyar.blogspot.com/