18 फ़रवरी 2011

एक उम्र कम है

इधर 14 फरवरी को वेलेंटाइन डे (प्यार का दिनमनाया गयाऔर मैं बेखबर होकर सोचता रहा अपनी मस्ती में इन पंक्तियों को:-
एक उम्र भी कम है मोहब्बत के लिए
लोग कहाँ से वक़्त निकालते हैं, नफरत के लिए।
काश उस शायर ने यह लिखा होताएक दिन कम है मोहब्बत के लिएतो हमारे किसी आशिक का वश चलता तो इसे दो दिन या फिर जयादा मेहरवान होकर सात दिन और अगर और सफलता मिलती तो वेलेंटाइन डे की जगह वेलेंटाइन पखवाड़ा मनाया जाता। पर खैर एक दिन भी काफी है...प्यार करने के लिए तो एक क्षण भी बहुत है, और यहाँ तो पूरा एक दिन है, और इससे पहले भी कोई रोज डेचोकलेट डे और भी बहुत से दिन मनाये जाते हैं। कुल मिलाकार सिलसिला चल पड़ता है 7 या 8 फरवरी से और इसका चरम रूप हमें 14 फरवरी को देखने को मिलता है।
पर यह आश्चर्यजनक है कि उसके बाद न तो इस प्यार की बात होती है और ना कोई प्यार जताने वाला मिलता है। फिर इन्तजार होता है अगली 14 फरवरी का और इसी तरह यह क्रम चल रहा है। मैंने सोचा क्या सच में प्यार को जाहिर किया जा सकता है। जिस संत ‘वेलेंटाइन’ के नाम से यह दिन मनाया जाता है उसका मंतव्य तो कुछ और था और हम क्या उस मंतव्य को पूरा कर रहे हैंहमें ज्यादा दूर जाने कि आवश्यकता नहीं है। हमारे देश में भी ऐसे उदाहरण मिल जाते हैंजिन्होंने अपने जीवन को प्यार (लौकिकके लिए समर्पित कर दिया जैसे, हीर-राँझा, लैलामजनू, सोहनी-महिवाल, कुंजू-चंचलो, सुन्नी-भुन्कू, रान्झूफुल्मु, लिल्लोचमन आदि -आदि। परजो समाज आज प्रेम दिवस मना रहा है उस समाज ने इन प्यार करने वालों की कितनी कदर की, यह सब आप जानते हैं। आज जो कुछ भी हमारे सामने घटित हो रहा हैक्या सच में प्यार करने वाले ऐसा कर सकते हैं। मेरी समझ में नहीं...अगर जिन्दगी में हम किसी एक इनसान से भी निस्वार्थ प्रेम कर पाए तो हमारी जिन्दगी की सफलता निश्चित हो जाती है...और यहाँ तो लोग प्रेम करने का दावा करते हैं। यह बात भी सच है कि लौकिक प्रेम से ही आलौकिक प्रेम का मार्ग प्रशस्त होता हैऔर हमें यह भी बताया जाता है कि इनसान से प्रेम करना ही भगवान से प्रेम करना है। लेकिन क्या सच में ऐसा होता है...नहीं। अगर ऐसा होता तो आज दुनिया का यह स्वरूप यह नहीं होता।
आज जिस दिशा की तरफ हम बढ़ रहे हैं...क्या प्यार के कारण ऐसा हो सकता है...नहींदुनिया में सभी तरह की अधिकता तबाही मचा सकती है लेकिन प्यार की अधिकता तो सकूँ और चैन लाती है। पर यहाँ पर तो सब चीजें अस्त-व्यस्त हैं। सबको अपनी-अपनी पड़ी है। जो हमारी संकीर्णता की परिचायक है। जरा गहराई से सोचें क्या प्रेम करने के लिए एक दिन काफी है और बाकी के दिन सिर्फ नफरत के लिए तो जिन्दगी का मंतव्य क्या रह जायेगा। मैं व्यक्तिगत रूप से वेलेंटाइन डे का विरोधी नहीं हूँ, लेकिन जिस तरह से और जिन मंतव्यों के लिए इस दिन को मनाया जाता है उस प्रक्रिया पर मुझे अफ़सोस जरुर होता है:-
दिल है कि धडकने का सबब भूल गया है
जीने का सलीका और अदब भूल गया है।
आज हम अपने चारों और के वातावरण को देखें। हमें क्या नजर आता है। आज दुनिया बारूद के ढेर पर खड़ी है और हम निरंतर आविष्कार कर रहे है घातक हथियारों कापर किसके लिए सिर्फ इनसान के लिए...आज इनसान को इनसान से ज्यादा डर है और उसका मंतव्य है किसी के हक को छीनकर अपना स्वार्थ सिद्ध करना। जब ऐसे हालत हमारे सामने हैं तो हम किस दिशा की तरफ जा रहे हैं, यह हमें सोचना होगा। कम से कम प्यार की यह दिशा तो नहीं हैऔर यह भी सच है कि:-
इस दुनिया में ऐ जहाँ वालोबहुत मुश्किल है इन्साफ करना
बहुत आसां है सजाएं देनाबहुत मुश्किल है माफ़ करना।
हम माफ़ करने के बारे में कम सोचते हैं और सजाएँ देने के बारे में जयादा तो फिर हम क्या प्यार करते हैं और किस से। कम से कम मेरी समझ में तो नहीं आता।
आज वेलेंटाइन डे को मात्र मनाने की जरुरत नहीं बल्कि इस दिन के मूल मंतव्य को समझने की आवश्यकता है, और अगर हम समझ जाते हैं तो निश्चित रूप से हमारे लिए हर एक दिन वेलेंटाइन डे होता है। एक छोटी सी जिन्दगी में हम जितना इस खुदा की बनाई सृष्टि से प्यार कर पाते हैं उतना ही हम जिन्दगी के मकसद के करीब पहुँच पाते हैं। और जिन्दगी का मकसद है LIVE AND LET LIVE। हम जब भी इन बातों के बारे में सोचेंगे इनकी महता खुद ब खुद हमारे सामने आ जाएगीहम प्रेम के मूल मंतव्य को समझ जायेंगे और तब हमें सृष्टि प्रेममयी नजर आएगीजिन्दगी जीने का आनंद आ जायेगा। फिर हम सब रोज वेलेंटाइन डे मनाया करेंगे उसके लिए हमें किसी खास दिन का इन्तजार नहीं करना पड़ेगा। काश!! हम केवल इतना कर पाते कि अपने दिल और दिमाग को हर तरह के पूर्वाग्रहों से मुक्त रखकर इस दुनिया में आनंद लेते हुए इस जीवन के सफ़र को तय कर पातेऔर फिर हर दिन वेलेंटाइन डे मानते।
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103 टिप्‍पणियां:

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

LIVE N LET LIVE...:)
sach me agar ye mul-mantra hamare andar bass jaye to fir kya kahne...
sara jhagra-fasad hi dur ho jaye..!
Valentine to matra ek jariya hai pyar batne ka ...lekin agar wo din har din me badal jaye to fir sach me jindagi me ham kahte...chalo yaar jhagra karte hain, kisi khas din.....:D

sachchi soch!

ललित शर्मा ने कहा…


हीर-राँझा, लैला-मजनू, सोहनी-महिवाल, कुंजू-चंचलो, सुन्नी-भुन्कू, रान्झू-फुल्मु, लिल्लो-चमन आदि-आदि के बाद एक नई प्रेम कहानी
पढिए।

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

प्रेम के वास्तविक अर्थ को समझा रहा है आपका आलेख.. वसुदहिव कुटुम्बकम.. उनिवेर्सल ब्रदरहूड ही है वास्तविक प्रेम.. एक सार्थक आलेख के लिए बधाई...

सतीश सक्सेना ने कहा…

वाकई एक दूसरे को सबक देने में जितना समय लगाते हैं वहीँ अगर एक दूसरे को समझने में लगाये तो जीवन की परिभाषा ही बदल जाये ! एक बढ़िया लेख के लिए शुभकामनायें आपको !

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

सच में प्रेम की सार्थक परिभाषा तो यही हो सकती है की जियें और जीने दें....... इस सुंदर बात को उल्लेखित करते उम्दा आलेख के लिए ...बधाई....

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बिल्कुल सही बात कही है ...सार्थक लेख ...विचारणीय

संजय कुमार चौरसिया ने कहा…

bahut sundar


उम्दा आलेख के लिए ...बधाई....

वृक्षारोपण : एक कदम प्रकृति की ओर ने कहा…

एक सार्थक आलेख,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
वास्तविक,,,,,,,,,,,,,,

वृक्षारोपण : एक कदम प्रकृति की ओर ने कहा…

बहुत अच्छा
उपयुक्त लेख

रश्मि प्रभा... ने कहा…

pyaar wah nahi jo sareaam manaya jata hai, pyaar jo hothon per barbas muskaan la de ... aur wah pyaar sadiyon tak chalta hai

सदा ने कहा…

बहुत ही सुन्‍दर एवं सहज शब्‍दों में विचारणीय प्रस्‍तुति ।

वन्दना ने कहा…

सच्चा और सार्थक प्रेम तो मानवता से प्रेम करना है और उसे आपका आलेख बखूबी बता रहा है ……………काश हम इंसान इस बात को अपने जीवन मे भी उतार लें तो जीना सफ़ल हो जाए।

babanpandey ने कहा…

EK DUSRE KO SAMJHANE KA DIN HAI..VALENTINE

anshumala ने कहा…

वेलेंटाइन डे प्यार करने का नहीं प्यार दर्शाने का दिन है | हम अपने माँ बाप भाई बहन मित्र आदि से प्यार तो करते है पर कभी उससे कहते नहीं है ये दिन रखा गया है की आप कम से कम एक दिन तो उनसे कहे की आप उनसे प्यार करते है |

होली दिवाली ईद से लेकर सभी त्यौहार जिस सोच के साथ बनाये गए है उनमे से कोई भी उस सोच के साथ नहीं मनाया जाता सबका रूप बदल गया है |

निर्मला कपिला ने कहा…

दिल है कि धडकने का सबब भूल गया है
जीने का सलीका और अदब भूल गया है ।
सार्थक आलेख है। बधाई।

अन्तर सोहिल ने कहा…

कुछ अच्छा करने के लिये किसी खास दिन का इंतजार तो मुझे भी पसन्द नहीं।

बढिया पोस्ट
प्रणाम

G.N.SHAW ने कहा…

velentine day ka matalab , ek din ke pyari-pyar se nahi hona balki jivan ke raah me ,jo bhi aaye usase pyar se pesh aana hona chahiye.
jinhone velentine day manaya hoga ,kya unhone us din apane maa-baap ke charan chhuye honge..? mujhe to aisa nahi lagata.
bahut sundar rim-jhim..jyot se jyot jagate chalo..badhai..bahut..sundar..sundar... acharan ....kewal...raam..ke hi ho sakate hai...

sandhya ने कहा…

एक छोटी सी जिन्दगी में हम जितना इस खुदा की बनाई सृष्टि से प्यार कर पाते हैं उतना ही हम जिन्दगी के मकसद के करीब पहुँच पाते हैं ।
ये मकसद सिर्फ और सिर्फ मानवता के प्रति हमारे प्रेम को दर्शाता है, और जब हम इसमें कामयाब होंगे तो सिर्फ एक दिन ही क्यूँ हम सब रोज वेलेंटाइन डे मनाया करेंगे..सार्थक आलेख के लिए बधाई...

Deepak Saini ने कहा…

किसी भी खास दिन का महत्व केवल तब तक जब तक वह केवल किसी खास दिन हो, साल मे चार बार दिवाली आयेगी तो कौन मनायेगा ?
“जीयो और जीने दो“ इस सिंद्धात पर यदि दुनिया चलना शुरू कर दे तो तश्वीर ही ना बदल जाये।
सबसे ज्यादा जरूरी है खुद को बदलना “हम बदलेगें जग बदलेगा“
शुभकामनाये

Akshita (Pakhi) ने कहा…

बहुत सुन्दर लिखा आपने...बधाई.


______________________________
'पाखी की दुनिया' : इण्डिया के पहले 'सी-प्लेन' से पाखी की यात्रा !

संजय भास्कर ने कहा…

प्रेम की सार्थक परिभाषा तो यही है की जियें और जीने दें.
अच्छा करने के लिये किसी खास दिन का इंतजार
नहीं करना चाहिए मेरे लिए तो हर दिन ही अच्छे है
उम्दा आलेख बहुत सुन्दर लिखा आपने...बधाई.

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

समाज में व्याप्त ज्यादातर परंपरा अब बस रस्म भर बनके रह गए हैं ... यही होता है ... मूल बात को सभी भूल जाते हैं ...

Rajey Sha ने कहा…

केवल राम... बड़े बडे बोल हैं इस पोस्‍ट पर। पर जब भी याहू मैसेंजर खोलो कि‍सी से हाय कहो सामने वाला पूछता है उम्र,लिंग,स्‍थान asl
अगर आप ऐसा नहीं करते तो कभी बातचीत कीजि‍ये फि‍र बढ़ाते हैं अपना प्‍यार व्‍यार।

Rajey Sha ने कहा…

केवल राम... बड़े बडे बोल हैं इस पोस्‍ट पर। पर जब भी याहू मैसेंजर खोलो कि‍सी से हाय कहो सामने वाला पूछता है उम्र,लिंग,स्‍थान asl
अगर आप ऐसा नहीं करते तो कभी बातचीत कीजि‍ये फि‍र बढ़ाते हैं अपना प्‍यार व्‍यार।

दर्शन कौर धनोए ने कहा…

प्यार के लिए सिर्फ एक दिन ? इन अग्रेजो का बस चले तो ये एक घंटे में फारिग हो जाए --
प्यार तो एक अहसास हे --जो ता-उम्र हमारी जिन्दगी के साथ चलता रहता हे --एक रूहानी जज्बात !

shikha varshney ने कहा…

काफी अच्छी और सार्थक पोस्ट है ..पर प्यार करने के साथ साथ कभी कभी दर्शाना भी जरुरी होता है..जैसे गर्मी में लगातार ए सी चलने के बाद थोड़ी देर खिडकी खोल दी जाये ताज़ी हवा के लिए ..शायद इसलिए ये दिन मनाये जाते हैं .
वैसे आपने प्रेमियों के नाम खूब गिनाये ..हमें तो २-३ ही पता थे :)

chirag ने कहा…

kaafi acchi post hain
aur aaj kal
love ek status ho gaya hain
bas bf ya gf honi chahiye not for love just for status
and gf and bf badalna to channel badalane se jyada aasan ho gaya hain aajkal

Suman ने कहा…

bahut badhiya likha hai. bilkul apse sahamat hun........

मेरे भाव ने कहा…

इंसान से प्रेम करना ही भगवान से प्रेम करना है । लेकिन क्या सच में ऐसा होता है ........

sunder prastuti.

Rahul Singh ने कहा…

कौन असहमत हो सकता है इतनी प्‍यार भरी बातों से.

शशांक मेहता ने कहा…

आज के इस स्वार्थी दुनिया में लोग सिर्फ अपने आप से प्यार करते है .......................

Manpreet Kaur ने कहा…

nice blog dear....:D

Everyday Visit Plz.....Thanx
Lyrics Mantra
Music Bol

डॉ टी एस दराल ने कहा…

प्यार के लिए कोई खास दिन क्यों निर्धारित हो । क्यों न रोज़ ही होली हो , रोज़ दिवाली हो ।

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

सार्थक विचार.

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

अत्यंत सुंदर और सार्थक पोस्ट, शुभकामनाएं.

रामराम.

Er. सत्यम शिवम ने कहा…

आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (19.02.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.uchcharan.com/
चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

***Punam*** ने कहा…

Bhai....!!
pyaar pyaar hota hai bas !!n kaha ja sakta hai,n smjhaya ja sakta hai,n manaya ja sakta hai...bas mahsoos kiya ja sakta hai aur vo bhi khud....yahan tak ki jisse pyaar ho use bhi theek se bataya nahin ja sakta hai....pyaar karne vaale kisi ek din jalsa nahin manate...bas pyaar karte hai roz-roz...!!

सम्वेदना के स्वर ने कहा…

अच्छा लेख.. एक नया नज़रिया!!

राज भाटिय़ा ने कहा…

क्या बात कही हे जी, लेकिन जब एक दुसरे को समझने की बात आती हे तो दोनो चल पडते हे नये साथी की तालाश मे एक नये वेलेंटाइन डे की ओर...

सुधीर ने कहा…

प्रेम में सच्चे और झूठे की अवधारणा कहां से आई पता नहीं। प्रेम तो प्रेम है, उसमें सच-झूठ क्या? अगर झूठ है तो प्रेम है ही नहीं। और जो झूठ है उसकी चर्चा क्या।

Amrita Tanmay ने कहा…

वाह जी , फिर रिसर्च कर डाला ....प्यार पर .... बढ़िया लिखा है ..बहुत ही बढ़िया ..खुदा करे नफ़रत फ़ैलाने वाले इसे जरुर पढ़े ..आमीन

cmpershad ने कहा…

आज तो प्रेम की परिभाषा ही बदल गई है :(

Dr. Ashok palmist blog ने कहा…

बहुत ही सटीक फरमा रहे हैँ केवल राम भाई !

दुनियाँ को नफरत से फुरसत मिलती कहाँ है ,
इश्क ऐ दुनियाँ मेँ नफरत मिलती कहाँ है ।

आपका आलेख बहुत ही लाजवाब है ।आभार ।

दीर्घतमा ने कहा…

ये प्रेम दिवस नहीं ब्याभिचार दिन है भारतीय सभ्यता को तार-तार कर देने वाला दिन .

Atul Shrivastava ने कहा…

सार्थक बातें। प्रेम के लिए तो पूरी एक उम्र कम पडती है लेकिन आज की पीढी है कि एक दिन में ही प्‍यार को समेटने की कोशिश में लगी रहती है।
अच्‍छी और विचारणीय पोस्‍ट के लिए आपको बधाई।

वाणी गीत ने कहा…

प्रेम का एक पल ही पर्याप्त है या फिर प्रेम के लिए एक पूरा जीवन ही कम है ...
जीओ और जीने दो से बढ़कर जीने का और कोई अंदाज़ नहीं हो सकता ...
सार्थक चिंतन !

Baimann ने कहा…

आज वैश्विकरण की दुनिया मे सच्चे प्यार और मोहबत की खोज, उसमे हीर-राँझा की तस्वीर को खोजना, अपना मजाक बनाना है. वर्तमानं मे प्यार भी और वलेंतिने दिवस के रूप मे मनाना सिर्फ बाजारीकरण के उत्पादकों की बिक्री मात्र है. मेरी विनती है नोजवानो से जो ग्रामीण परम परा से दिल्ली शहर मे अपना भविष्य बनाने आयें है, बाजारीकरण मे मत फसना, वर्ना ये शहर प्रतिदिन आपका वेलान्तिने दिवस सेलेब्रेट करेगा और आपको जिन्दगी भर समझ नहीं आएगा. ----आपका बेईमान

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत ही सुन्‍दर एवं सहज शब्‍दों में विचारणीय प्रस्‍तुति| शुभकामनाएं|

sagebob ने कहा…

बहुत सही लिखा है आपने,केवल जी.
प्रेम का अर्थ ही पर्दूषित हो गया आज तो.
सलाम

अजय कुमार ने कहा…

सही विश्लेषण

ehsas ने कहा…

बहुत ही सही बात कही है आपने।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

नफरत करने वालों पर दया आती है।

धीरेन्द्र सिंह ने कहा…

हर दिन जो प्यार करेगा, वह गाना गायेगा ...

दिशा संकेतक खूबसूरत प्रस्तुति .

ZEAL ने कहा…

प्यार करने वालों के लिए हर दिन valentine ही है ।

राजेश सिंह ने कहा…

गोया 'हर मौसम है प्‍यार का मौसम'.

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

सचमुच, जीवन को मनचाहे ढंग से जीने के लिए कई उम्र कम हैं।

---------
ब्‍लॉगवाणी: ब्‍लॉग समीक्षा का एक विनम्र प्रयास।

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari ने कहा…

राम-राम

सुबीर रावत ने कहा…

आपका यह सार्थक लेख पढ़कर अच्छा लगा भाई केवल जी, आभार. ........... मुझे हिंदी फिल्म के एक गीत का मुखड़ा याद आ रहा है - "सौ बरस की जिंदगी से अच्छे हैं प्यार के दो चार पल ........"

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

अच्छी और सार्थक पोस्ट....

Rakesh Kumar ने कहा…

"dhai akhar prem ka padhe,so pandit hoai"
Prem karne ke liye niskapat aur nirmal man ki aavashaykta hai.Bina aise man ke kya koi valentine day
ke maine hai.Aur yadi aisa man hai aapke paas to har din valentine day
se bhi jyaada hi hoga.

OM KASHYAP ने कहा…

kewal ji namaskar
एक उम्र भी कम है मोहब्बत के लिए
लोग कहाँ से वक़्त निकालते हैं ,नफरत के लिए ।
gajab

mahendra verma ने कहा…

प्रेम के लिए कोई एक दिन निर्धारित करना उचित नहीं है।
मनुष्य के लिए तो हर क्षण प्रेम-क्षण होना चाहिए।

Kunwar Kusumesh ने कहा…

आपका ये आलेख बहुत प्यारा और विचारणीय है.

डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह ने कहा…

Wah bhai ,aapkey blog par sanyogvash hi aya lekin maja aagaya Keval Ram ji .
Ise kori tareef na samjhiyega ,satya hai ki aapney bahut badhiya alekh likha hai umda shero se saja hua .
My heartly best wishes and waiting for lot to come.
dr.bhoopendra

ज्योति सिंह ने कहा…

एक उम्र भी कम है मोहब्बत के लिए
लोग कहाँ से वक़्त निकालते हैं ,नफरत के लिए ।
दिल है कि धडकने का सबब भूल गया है
जीने का सलीका और अदब भूल गया है ।
sach hi sach ,pyaar ke liye bhi bahana chahiye ,ek din aesa suhana chahiye ,jiyo aur jino do kyonki yahi hai aman ka rasta .badhiya .

Bhushan ने कहा…

वैयक्तिक प्रेम से चल कर मानवीय धरातल के उदात्त प्रेम तक आपकी पोस्ट ने पहुँचाया है. सुखद आलेख आपने दिया है.

Anupriya ने कहा…

दिल है कि धडकने का सबब भूल गया है
जीने का सलीका और अदब भूल गया है ।

bahut ee sarthak aur behtareen lekh.
bhasa aur shaili bhi umda...
ye do line mujhe khas taur se pasand aai...

LIVE N LET LIVE ...ye to mere jeevan ka principle hai aur main apne hriday ki gahraiyon se chahungi ki ye har manusya ke jeevan ka principl ho.
aapko badhai...

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सच है ... प्रेम के सच्चे अर्थ आज व्यावसायिक बातों के पीछे दम तोड़ रहे हैं ...

Mithilesh dubey ने कहा…

बढ़िया लेख के लिए शुभकामनायें

Sunil Kumar ने कहा…

उम्दा आलेख के लिए ...बधाई..

शिवकुमार ( शिवा) ने कहा…

प्रेम के वास्तविक अर्थ को समझा रहा है आपका आलेख..

Minakshi Pant ने कहा…

दिल है कि धडकने का सबब भूल गया है
जीने का सलीका और अदब भूल गया है ।

सुन्दर रचना |

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

bahut accha aalekh kewal bhai ,,.padhkar bahut sakun mila.. yun hi likhte jaaye .

बधाई

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मेरी नयी कविता " तेरा नाम " पर आप का स्वागत है .

आपसे निवेदन है की इस अवश्य पढ़िए और अपने कमेन्ट से इसे अनुग्रहित करे.

"""" इस कविता का लिंक है ::::

http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/02/blog-post.html

विजय

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

दिल है कि धडकने का सबब भूल गया है
जीने का सलीका और अदब भूल गया है ।
एक सार्थक आलेख के लिए बधाई...

संजय कुमार चौरसिया ने कहा…

ब्लॉग लेखन को एक बर्ष पूर्ण, धन्यवाद देता हूँ समस्त ब्लोगर्स साथियों को ......>>> संजय कुमार

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

जिओ और जीने दो, यह हमने कब किया ? हम जीते इसलिये हैं कि किसी और को ना जीने दें । इसी त्रसदी में जीते हुए किसी मराठी कवि ने कहा है,
क्षण एक पुरे प्रेमाचा
वर्षाव घडो मरणाचा ।।

प्यार तो चिरकाल दिल में बसा होना चाहिये । इस सार्थक आलेख के लिये धन्यवाद ।

Mithilesh dubey ने कहा…

अच्छी लगी रचना ।


लौहांगना ब्लॉगर का राग-विलाप

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

सुंदर पोस्ट भाई केवल राम जी बधाई |

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

सार्थक एवं विचारणीय पोस्ट के लिए बधाई !

JAGDISH BALI ने कहा…

Very well said and With great strength of expression. Dear, visit my blog also.

amrendra "amar" ने कहा…

बिल्कुल सही बात कही है. उम्दा आलेख के लिए ...बधाई...

Rakesh Kumar ने कहा…

भाई केवल राम जी,
आप कहाँ हैं.आपका इन्तजार है.

madansharma ने कहा…

केवल राम" जी ! बहुत सही कहा आप ने इंसान से प्रेम करना ही भगवान से प्रेम करना है.
आज हिन्दुस्तान में भेड़िया धसान हैं. हम बिना कुछ सोचे समझे प्रगतिशील बनने के लिए विदेशिओं की हर बातों का अनुकरण करने की कोशिश करते हैं.
उत्तम विचार,अच्छी प्रस्तुति हार्दिक शुभकामनाएं!

smshindi By Sonu ने कहा…

केवल राम जी
सही लिखा है आपने। एक सार्थक आलेख

गिरधारी खंकरियाल ने कहा…

कितने लोग जानते है संत Velantine के बारे में जो इस दिन गुलाब का आदान प्रदान करते है मुश्किल से०.५०% लोग . यह तो सिर्फ मौज मस्ती के लिए आधुनिक अतिशयता को प्रदर्शित करने के लिए मानते है.

amar jeet ने कहा…

बहुत सही कहा आपने परन्तु आपको नहीं लगता की वेलेनटाइन डे जैसे आयोजनों में सिर्फ अश्लीलता और भोंडे प्रेम का प्रदर्शन ही होता है इसलिए ये इतनी प्रसिद्धि पा रहे है और हमारे देश में बाजार वाद की निति ने इसे सफल बनाया है जबकि प्रेम का सबसे सटीक उदाहरण राधा कृष्ण का प्रेम है जिसकी हम पूजा करते है

"पलाश" ने कहा…

आपने सही कहा एक उम्र कम है .
मगर यह बात जितनी छोटी है उतनी ही गहराई लिये हुये भी है ।

arti jha ने कहा…

dear ram ji....pyar kisi din ya samay ka to mohtaz nhi hai na...pyar kisi ek pal ka nhi ye to pal pal ke lie bana hai...hum khud ziban ke aapa dhaapi me isse ek din me kaid kar die hai....or waise bhi pyar to humare andr hai jo humare apno ke lie hai,or apno se pyar jatane ke lie koi khaash din nhi ,koi gulab ka phool nhi,koi choklet nhi bas ek ehsaash bhr chahiye hota hai...haina?.....thanx 4 joining me

Dr.Sushila Gupta ने कहा…

bahut hi sundar,preranarthak lekh.......ye sab parinaam hai aapke sreshth chintan ka.thanks.

बेनामी ने कहा…

I’ve recently started a blog, the knowledge you present on this web site has helped me tremendously. Thanks for all your time u0026 work.

बेनामी ने कहा…

I wished to thanks for this great learn!! I definitely enjoying every little little bit of it I have you bookmarked to take a look at new stuff you submit

बेनामी ने कहा…

वाह! धन्यवाद! मैं हमेशा इस तरह से मेरी साइट में कुछ लिखना चाहता था. मैं अपने ब्लॉग में अपने पद का हिस्सा लेते हैं?

योगेश चन्द्र उप्रेती ने कहा…

बहुत ही सुंदर दृष्टिकोड़ है आपका केवल राम जी आपका लेख पढ़कर बहुत अच्छा लगा.
"प्रेम की भाषा तो शब्द रहित है."

बेनामी ने कहा…

लोग जो उत्पादन में फिर से मुक्त उत्पादन कुछ की खुराक को जीतने के लिए आसानी से उन्हें अपने workouts से बरामद लाभ मिल सकता है. फिर इन लोगों को सहन खुराक अनुमेय हैं और अन्य मामलों में वे सभी सुरक्षित नहीं हैं . स्थिर मामलों जहाँ वहाँ गिनती है लोगों का विचार मनोरंजन कर रहे हैं , सुरक्षा जमा बॉक्स, कि वास्तविकता में है बहुत खतरनाक है . एक ऐसी नतीजा ब्रोमाइड उदाहरण मट्ठा प्रोटीन है. मट्ठा प्रोटीन एक माल है कि लोगों को करना है , ज्यादातर पुरुष, क्योंकि दूर निर्देश में सोया प्रोटीन पाउडर फेंक पक्ष महिलाओं को पूरा करने के लिए अपने प्रोटीन की हर दिन की जरूरत है . इस अनुच्छेद में हम तीन मट्ठा प्रोटीन मन में भालू अन्य मट्ठा प्रोटीन का उपयोग एक बार कुरता खतरों पर सलाह लेंगे.
पर और अधिक [url=http://wheyproteindangerss.com/]Whey Protein Dangers[/url]

बेनामी ने कहा…

तुम निश्चित रूप से काम तुम लिखने में अपने उत्साह को देख सकता है. दुनिया में तुम जैसे भी अधिक भावुक लेखकों जो कहना है कि उनका मानना ​​है कि डर नहीं रहे हैं के लिए उम्मीद है. हमेशा अपने दिल का पालन करें.

बेनामी ने कहा…

आप वहाँ कुछ अच्छे अंक बनाया है. मैं इस विषय पर एक खोज किया और पाया कि ज्यादातर लोगों सहमत होंगे.

बेनामी ने कहा…

यह लेख मेरी राय में योग्य बुकमार्क है. यह भविष्य में संदर्भ के लिए बचत के लायक है. यह चिंतन के लिए कई वैध अंकों के साथ आकर्षक पढ़ने है. मैं लगभग हर इस अनुच्छेद के भीतर किए गए बिंदु पर सहमत है.

बेनामी ने कहा…

मैं बहुत जानकारीपूर्ण यहाँ पढ़ के हर एक की सराहना करते हैं. मैं सबसे निश्चित रूप से लोगों के साथ अपनी साइट के बारे में वाक्यांश फैल जाएगा. चीयर्स.

बेनामी ने कहा…

सुंदर अच्छी पोस्ट. मैं सिर्फ अपने ब्लॉग पर ठोकर खाई और कहना चाहता था कि मैं वास्तव में अपने ब्लॉग पोस्ट ब्राउज़िंग का आनंद लिया है. आखिर मैं अपने आरएसएस फ़ीड के लिए सदस्यता हो जाएगा और मुझे आशा है कि आप जल्द ही फिर से लिखने!

बेनामी ने कहा…

नमस्ते वहाँ. मैं गूगल के माध्यम से अपने वेब साइट पाया, जबकि एक समान बात के लिए देख, अपनी वेब साइट यहाँ उठकर. यह अच्छा दिखाई देता है. मैं यह मेरे गूगल बुकमार्क्स में बुकमार्क बाद में वापस आना है.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

शायद आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज बुधवार के चर्चा मंच पर भी हो!
सूचनार्थ

Pallavi saxena ने कहा…

आपने लिखा तो बहुत सार्थक है इसमें कोई दो राय नहीं, मगर मुझे तो इस बात की खुशी है की एक दिन या एक क्षण के लिए ही सही लोग प्यार करते हैं भले ही वो सच्चा हो या झूठा प्यार तो करर्ते है वरना आज जो हालात हैं उसे देखते हुए तो मुझे ऐसा लाग्ने लगता है कि लोग प्यार करना जैसे भूल ही गए हैं अगर कुछ बचा है तो केवल वासना ऐसे में यदि विदेशी संस्कृति को देख-देखकर ही सही लोग प्यार के लिए एक दिन का समय निकलते है तो भी बहुत है।

प्रभात ने कहा…

Bahut sahi kaha aapne...pyar ke liye do pal kam nahi the....