12 फ़रवरी 2011

अहसास होता है

कभी-कभी हमारी जिन्दगी में हमारी सोच के अनुकूल कुछ नहीं होता तो हम हताश हो जाते हैं. ऐसी स्थिति में अगर हमें कोई आशा की किरण दिखाई देती है तो वह है ‘ईश्वर’. लेकिन ईश्वर पर हमारा यकीन उस स्तर का नहीं होता, जिस स्तर का होना चाहिए. ऐसी स्थिति में मन में कुछ यूं हलचल मचती है....!!!      

क्योँ कभी-कभी यह मन उदास होता है
है तू कण-कण में, क्योँ नहीं अहसास होता है.

तेरी रहमत का सदका है जमीं आसमां में
क्यों नहीं मेरे मन को यह विश्वास होता है.

है हर तरफ जलवा तेरा, गर तेरे हैं सब
फिर कोई क्योँ पराया, कोई ख़ास होता है.

मुद्दत बाद मिली जिन्दगी, वो भी चंद साँसें
क्योँ तृष्णाओं-लालसाओं का लिवास होता है.

सब कुछ भुलाकर, तेरा अर्पण कर दिया तुझे
हर पल तुझे देखता हूँ, पल-पल अहसास होता है.

74 टिप्‍पणियां:

Deepak Saini ने कहा…

ईश्वर मे जितना डूबोगे उसे उतना पायेगे (ऐसा मेरा मानना है)
बहुत अच्छी कविता कही आपने
अभी कम्पयूटर चलाया और आपकी ईश्वर को याद कराती पोस्ट पढ कर बहुत अच्छा लगा
शुभकामनाये

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

मुद्दतों बाद मिली जिन्दगी , वो भी चंद साँसें
क्योँ बढती तृष्णाएं, क्योँ लालसाओं का लिवास होता है
आस्था और सांसारिक विचारों के बीच जद्दोज़हद का सुंदर रेखांकन ........ बहुत सुंदर

Atul Shrivastava ने कहा…

ईश्‍वर की मौजूदगी का अहसास कराती बेहतरीन रचना।

Dr. Ashok palmist blog ने कहा…

वाह ! लाजवाब गजल ।

केवल राम जी

ईश्वर तो हर क्षण दिल के पास होता है ,
नजरोँ पर हमारी तृष्णाओँ का लिबास होता है ।

बेहद खूबसूरत और सादगी से भक्ति की ओर अग्रसर गजल । आभार केवल राम भाई !

एस.एम.मासूम ने कहा…

केवल जी आप दिल से लिखते हैं और इसी कारण मुझे आप को पढना अच्छा लगता है.

OM KASHYAP ने कहा…

क्योँ कभी-कभी यह मन उदास होता है
है गर तू कण -कण में , क्योँ नहीं एहसास होता है
SUNDER EHSAS
AAPKA SUKRIYA

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

आँख बंद कर निहारें तो वही दिखता है।

संजय भास्कर ने कहा…

केवल राम जी
तेरी रहमत का सदका है जमीं आसमां में
क्यों नहीं मुझे यह विश्वास होता है
गहरे जज्बातों को शब्द देते है आप
बहुत खूब लिखा आपने । दिल की गहराई से निकले हुए ज़ज्बात । बधाई स्वीकारे ।

संजय भास्कर ने कहा…

खूबसूरत रचना
बहुत सुन्दर शब्द संयोजन में लिखी गई बहुत उम्दा रचना.............शानदार प्रस्तुतिकरण

Anupriya ने कहा…

है हर तरफ जलवा तेरा ,गर तेरे हैं सब
फिर कोई क्योँ पराया , कोई ख़ास होता है...
kya baat hai...har line khaas ,dil ke behad kareeb.
thanks.

Dilbag Virk ने कहा…

सुंदर कविता , छायावादी कवियों जैसी रहस्यवादिता का वर्णन है इसमें . बधाई हो

sandhya ने कहा…

तेरी रहमत का सदका है जमीं आसमां में
क्यों नहीं मुझे यह विश्वास होता है

है हर तरफ जलवा तेरा ,गर तेरे हैं सब
फिर कोई क्योँ पराया , कोई ख़ास होता है
बहुत सुन्दर, बेमिसाल.... ईश्वर तो हर क्षण हमारे ही पास होता है, ये तृष्णाएँ ही हैं जो भ्रमित करती रहती हैं..मन की भावनाओं को जैसे शब्द मिल गए हो... लाजवाब.........

sandhya ने कहा…

है हर तरफ जलवा तेरा ,गर तेरे हैं सब
फिर कोई क्योँ पराया , कोई ख़ास होता है..
ये तो नजरो का धोका है,मन की आँखों से देखो तो बस वही आस-पास होता है...
बहुत-बहुत आभार...

वन्दना ने कहा…

जिस पल दिल से तेरा तुझको अर्पण करेंगे उसी पल से उसका अहसास पल पल अपने साथ करेंगे……………बस यही समर्पण उसका अहसास होता है……………सुन्दर अभिव्यक्ति।

संजय भास्कर ने कहा…

वाह ! केवल राम जी
इस कविता का तो जवाब नहीं !
विचारों के इतनी गहन अनुभूतियों को सटीक शब्द देना सबके बस की बात नहीं है !
कविता के भाव बड़े ही प्रभाव पूर्ण ढंग से संप्रेषित हो रहे हैं !
आभार!

डॉ टी एस दराल ने कहा…

है हर तरफ जलवा तेरा ,गर तेरे हैं सब
फिर कोई क्योँ पराया , कोई ख़ास होता है

सही सवाल है । इसका ज़वाब कलयुगी इंसान के पास तो नहीं ।

shikha varshney ने कहा…

ईश्वर के आस्तित्व को नमन करती सुन्दर रचना.

"पलाश" ने कहा…

अब सब कुछ भुलाकर , तेरा अर्पण कर दिया तुझे
हर पल केवल तुझे देखता हूँ , पल - पल तेरा अहसास होता है

very good Kewal ji ..
आपने सच कहा हम जब भी कोई नेक काम करते है , वो हमारे साथ होता है , और यही विश्वास हमें सफलता भी दिलाता है
ना भूलों उस खुदा को कभी जिसने हमें बनाया
किया तूने कुछ नही , सब उसने तुमसे है कराया
बुरा क्छ भी करने से पहले सोच लो इतना
उनकी नजरों से कुछ भी जहाँ में छुप नही पाया

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत ही सुंदर विचार

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

केवलरामजी, एक ही बात- जबरदस्त... (मोबाईल टिप्पणी)

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

भाई केवल राम जी उत्कृष्ट कविता के लिए आपको बधाई शुभकामनाएं |

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

भाई केवल राम जी उत्कृष्ट कविता के लिए आपको बधाई शुभकामनाएं |

sagebob ने कहा…

आज मन खुश हो गया आपकी रचना पढ़ कर.
लगता है मतला भूत काल है और मक्ता वर्तमान है.
क्योँ कभी-कभी यह मन उदास होता है
है गर तू कण -कण में , क्योँ नहीं अहसास होता है

अब सब कुछ भुलाकर , तेरा अर्पण कर दिया तुझे
हर पल केवल तुझे देखता हूँ , पल - पल तेरा अहसास होता है

उसकी शान में जो कविता या ग़ज़ल कही जाती है
उसकी तासीर अलग ही होती है.
रूह से निकलती है.रूह तक पहुँचती है.
बन्दा आज आपको झुक कर सलाम करता है. मंजूर हो.

G.N.SHAW ने कहा…

" ram " wah bhi kewal....belive it or not.......only " Ram ". very good.

Minakshi Pant ने कहा…

सुन्दर एहसासों को दर्शाती खुबसूरत रचना !

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

ऐसे भावों को शब्द देना भी बिना माता सरस्वती की कृपा के संभव नही है. आप पर मां का वरद हस्त बना रहे यही शुभकामना है.

रामराम.

शशांक मेहता ने कहा…

जब इंसान का कोई काम बनते-बनते बिगङने लगता है तो वो स्वाभाविक रुप से भगबान को याद करता है आपने एक आम इंसान कि भावनाओं को प्रकट किया है धन्यबाद

शशांक मेहता ने कहा…

जब इंसान का कोई काम बनते-बनते बिगङने लगता है तो वो स्वाभाविक रुप से भगबान को याद करता है आपने एक आम इंसान कि भावनाओं को प्रकट किया है धन्यबाद

Rakesh Kumar ने कहा…

Wah! Kevalji Wah!
Arpan bhi kar diya,aur pal pal uska
ahasas bhi kar rahe ho.Bhai ji is
ahasas ko hi itna badhate jana hai
ki man ki udaasi tik na paaye aur kan kan me iswar najar aaye.Aapto
bhakti maata ki god me ho,phir dar kaisa.

सम्वेदना के स्वर ने कहा…

उस सर्वशक्तिमान के प्रति सच्चा आभार!!

उपेन्द्र ' उपेन ' ने कहा…

गहरे और सुंदर भावों से भारी बहुत ही सुंदर प्रस्तुति ................

रजनीश तिवारी ने कहा…

हम भी हैं कण-कण में... , जब अपनत्व अनंत होता है , ईश्वरत्व मिल जाता है । ईश्वर को खोजती बहुत अच्छी रचना के लिए धन्यवाद एवं शुभकामनाएँ ।

: केवल राम : ने कहा…

@>>>sagebob जी
आपने सही पहचाना ..मेरा मन बहुत उदास होता था ..जब मुझे इसका अहसास नहीं हुआ था ..आज से साल 12 पहले जब मेरी जिन्दगी में ऐसा अवसर बना तो फिर मुझे लगा कि जिन्दगी की वास्तविकता क्या है ..और जो मक्ता है ..यह उसी अहसास का परिणाम है ...आपका आभार

रचना दीक्षित ने कहा…

बहुत खूबसूरती से उसके होने का अहसास कराया है

संजय कुमार चौरसिया ने कहा…

blog par aakar haunsla ajai ke liye bahut bahut dhnyvaad,

aapki rachna behad prabhavshali

संतोष कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी कविता कही आपने, केवल राम जी
आपकी लेखनी मैं कमाल का जादू है !

बहुत बधाई एवं शुभकामनायें !!

mahendra verma ने कहा…

है हर तरफ जलवा तेरा ,गर तेरे हैं सब
फिर कोई क्योँ पराया , कोई ख़ास होता है

वाह, केवल जी, बहुत ही सुंदर।
ईश्वर को संबोधित यह ग़ज़ल अनूठी है।

Amrita Tanmay ने कहा…

सुंदर भावाभिव्यक्ति..बहुत सुंदर
शुभकामनाये

smshindi By Sonu ने कहा…

केवल राम जी

क्योँ कभी-कभी यह मन उदास होता है
है गर तू कण -कण में , क्योँ नहीं अहसास होता है

तेरी रहमत का सदका है जमीं आसमां में
क्यों नहीं मुझे यह विश्वास होता है

है हर तरफ जलवा तेरा ,गर तेरे हैं सब
फिर कोई क्योँ पराया , कोई ख़ास होता

एक दम लाजवाब और बेहतरीन रचना है
आभार.....

वाणी गीत ने कहा…

जिंदगी चलती है ऐसे ही बदलते एहसासों के साथ ..कभी उसके बहुत करीब होने का अहसास ...तो कभी जैसे उनके ना होने का एहसास ...
जीवन हमें कई रंग दिखता है ...
बदलते मगर सच्चे एहसासों की अच्छी कविता !

smshindi By Sonu ने कहा…

मेरी नई पोस्ट पर आपका स्वागत है

"हट जाओ वेलेण्टाइन डेे आ रहा है!".

Udan Tashtari ने कहा…

शानदार अभिव्यक्ति!

Patali-The-Village ने कहा…

आस्था और सांसारिक विचारों के बीच जद्दोज़हद का सुंदर रेखांकन| धन्यवाद|

Sawai SIingh Rajpurohit ने कहा…

केवल राम जी

हुज़ूर आपका भी मन उदास होता है और मेरा भी मन उदास होता है लेकिन हर पल केवल आपको देखता हूँ और पल-पल आपका अहसास होता है....

इधर से गुज़रा था, सोचा, आपको सलाम करता चलूं....

नरेश सिह राठौड़ ने कहा…

आशा निराशा के बीच कुछ लोग पूरा समय बीता देते है | सुन्दर कविता हेतु आभार |

nivedita ने कहा…

समर्पण भाव से परिपूर्ण ,एक बेहद खूबसूरत सादगी भरी रचना .......बहुत खूब ...

निर्मला कपिला ने कहा…

मुद्दत बाद मिली जिन्दगी , वो भी चंद साँसें
क्योँ बढती तृष्णाएं, क्योँ लालसाओं का लिवास होता है
जब आदमी का उसकी सत्ता से विश्वास उठ जाता है तभी लालसायें तृष्णायें बढ जाती हैं। सुन्दर रचना के लिये बधाई।

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

है हर तरफ जलवा तेरा ,गर तेरे हैं सब
फिर कोई क्योँ पराया , कोई ख़ास होता है
मुद्दत बाद मिली जिन्दगी , वो भी चंद साँसें
क्योँ बढती तृष्णाएं,क्योँ लालसाओं का लिवास होता है

बेहतरीन ग़ज़ल के लिये बधाई स्वीकारें।

chirag ने कहा…

shandar likha hain aapane

god is great

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

..सुखद एहसास।

वृक्षारोपण : एक कदम प्रकृति की ओर ने कहा…

डॉ. डंडा लखनवी जी के दो दोहे

माननीय डॉ. डंडा लखनवी जी ने वृक्ष लगाने वाले प्रकृतिप्रेमियों को प्रोत्साहित करते हुए लिखा है-

इन्हें कारखाना कहें, अथवा लघु उद्योग।
प्राण-वायु के जनक ये, अद्भुत इनके योग॥

वृक्ष रोप करके किया, खुद पर भी उपकार।
पुण्य आगमन का खुला, एक अनूठा द्वार॥

इस अमूल्य टिप्पणी के लिये हम उनके आभारी हैं।
http://pathkesathi.blogspot.com/

Kunwar Kusumesh ने कहा…

है हर तरफ जलवा तेरा ,गर तेरे हैं सब
फिर कोई क्योँ पराया , कोई ख़ास होता है

ईश्वर की नज़र में सब एक ही समान हैं.ये तो दुष्ट इन्सान है जो किसी को अपना और किसी को पराया समझता है अपनी स्वार्थपरकता के आधार पर.

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

'तेरी रहमत का सदका है जमीं आसमां में

क्यों नहीं मुझे यह विश्वाश होता है '

भाई केवल राम जी ,

बहुत पवित्र पंक्तियाँ लिखी हैं आपने !

सदा ने कहा…

है हर तरफ जलवा तेरा ,गर तेरे हैं सब
फिर कोई क्योँ पराया , कोई ख़ास होता है

वाह ..बहुत ही सुन्‍दर भावों के साथ बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

अरविन्द जांगिड ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना, केवल राम जी, आभार.

राजेश सिंह ने कहा…

बना रहे यह पवित्र अहसास.

विरेन्द्र सिंह चौहान ने कहा…

केवल जी रचना पसंद आई। आपको इस सार्थक रचना के लिए आभार...

cmpershad ने कहा…

`क्योँ नहीं अहसास होता है'

अहसास होगा केवल सच्चे मन से करें॥

Aditya Tikku ने कहा…

shabdo aur bhavo ka khubsurat mishran

Meenu Khare ने कहा…

क्योँ कभी-कभी यह मन उदास होता है
है गर तू कण -कण में , क्योँ नहीं अहसास होता है

तेरी रहमत का सदका है जमीं आसमां में
क्यों नहीं मुझे यह विश्वास होता है

है हर तरफ जलवा तेरा ,गर तेरे हैं सब
फिर कोई क्योँ पराया , कोई ख़ास होता है


सुंदर विचार.मन को अंदर तक उद्द्वेलित कर गई रचना.

ZEAL ने कहा…

बेहद खूबसूरत और उत्कृष्ट रचना के लिए बधाई ।

MANOJ KUMAR ने कहा…

vah, kya baat hai! bahut sundar...!!

minoo bhagia ने कहा…

gar tere hain sab , kyun koi paraya koi khaas hota hai , achha sher kaha hai kewal

Suman ने कहा…

bahut sunder rachna........

Ankur jain ने कहा…

मुद्दत बाद मिली जिन्दगी , वो भी चंद साँसें
क्योँ बढती तृष्णाएं, क्योँ लालसाओं का लिवास होता है.........
sundar rachna keval ram ji....

Mithilesh dubey ने कहा…

तेरी रहमत का सदका है जमीं आसमां में
क्यों नहीं मुझे यह विश्वास होता है
सही लिखा है आपने, मैं भी कभी-कभी फंस जाता हूँ ।

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

प्रिय बंधुवर केवलराम जी
सस्नेहाभिवादन !

मन की हलचल की अच्छी अभिव्यक्ति है …
है हर तरफ जलवा तेरा , गर तेरे हैं सब
फिर कोई क्यों पराया , कोई ख़ास होता है

अच्छा लिखा है भाव श्रेष्ठ हैं , छंद में ढालने का भी सुंदर प्रयास है ।
ढंग के रचनाकारों की ग़ज़लें और छांदस रचनाएं ग़ौर से देखा कीजिए … छंद सध जाने पर ऐसी रचनाओं का आनन्द दुगुना हो जाता है …

नेट की समस्या के कारण
दो दिन विलंब से ही …
प्रणय दिवस की मंगलकामनाएं ! :)
स्वीकार करें …
♥ प्रेम बिना निस्सार है यह सारा संसार !

बसंत ॠतु की भी हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !
- राजेन्द्र स्वर्णकार

P S Bhakuni ने कहा…

क्योँ कभी-कभी यह मन उदास होता है
है गर तू कण -कण में , क्योँ नहीं अहसास होता है..........
केवल जी !
डेशबोर्ड में उपडेटेड पोस्ट न होने के कारण समय पर नहीं आ पाया जिसका मुझे खेद है i , चलो सबसे पहले अनुसरण (follow ) की रश्म पूरी करता हूँ , ताकि भविष्य में देर से आने की गुस्ताखी न हो,
सुंदर कविता ,

कुश्वंश ने कहा…

"ईश्वर तो हर क्षण दिल के पास होता है ,
नजरोँ पर हमारी तृष्णाओँ का लिबास होता है"
केवल राम जी
उम्दा रचना,प्रस्तुतिकरण बहुत अच्छा लगा
शुभकामनाये

संतोष पाण्डेय ने कहा…

sundar rachna. bhavo ki gahrai sarahneey hai.

krati ने कहा…

hello sir, apka blog dekah shandaar hai, ek koshish maine bhi ki hai, ek nazar us par bhi dalen.
krati-fourthpillar.blogspot.com

madansharma ने कहा…

वाह ! मन प्रसन्न हो गया इस उम्दा प्रस्तुति से ।बहुत अच्छी कविता कही आपने ईश्‍वर की मौजूदगी का अहसास कराती बेहतरीन रचना।
हमारी शुभकामनाये आपके साथ है,

madansharma ने कहा…

वाह ! मन प्रसन्न हो गया इस उम्दा प्रस्तुति से ।बहुत अच्छी कविता कही आपने ईश्‍वर की मौजूदगी का अहसास कराती बेहतरीन रचना।
शुभकामनाये

Dr.Sushila Gupta ने कहा…

मुद्दतों बाद मिली जिन्दगी , वो भी चंद साँसें
क्योँ बढती तृष्णाएं, क्योँ लालसाओं का लिवास होता

yes u right.......kash ! sabhi is baat ko samajh paate. very nice.thanks.