29 अक्तूबर 2010

संसार पाया होता

तमन्ना ही रही कि उनका पार पाया होता
जो था पलकों के करीब, उसका सार पाया होता ।

सागर है तो शांत है, ना कोई किनारा होगा
बनकर हंस मोती चुनने का किरदार निभाया होता ।

आज चेहरों पर चेहरे लगाये फिरते हैं लोग
जिस्म का नहीं, आत्मा का श्रंगार पाया होता । 


जो भी मिला सबसे है गम देने का गिला
अपना उसे बनाकर, एक मददगार पाया होता । 

जामा इंसानी मिला, पर गुण कितने हैं इसमें
देखकर ज्ञान का आईना, कुछ पारावार पाया होता ।

मिटाने पर तो मिट जाते हैं, निशां - ए - खूं
उसे समर्पित होकर एक नया संसार पाया होता ।

केवल जीने का नाम नहीं है जिन्दगी
मिटाकर हस्ती को गुल-ए-गुलजार पाया होता ।

11 टिप्‍पणियां:

  1. आज चेहरों पर चेहरे लगाये फिरते हैं लोग
    जिस्म का नहीं, आत्मा का श्रंगार पाया होता ।
    sahi baat kahi aapne.... bahut achhi ahin sabhi panktiyan...arthpoorn rachna

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  2. आज चेहरों पर चेहरे लगाये फिरते हैं लोग
    जिस्म का नहीं, आत्मा का श्रंगार पाया होता ।
    गंभीर जीवन दर्शन से समाहित रचना, बहुत अच्छी लगी। बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
    राजभाषा हिंदी पर मुग़ल काल में सत्ता का संघर्ष
    मनोज पर फ़ुरसत में...भ्रष्‍टाचार पर बतिया ही लूँ !

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  3. बहुत खूबसूरत रचना ....सोचने पर मजबूर करती हुई ...

    मेरे ब्लॉग पर आने का शुक्रिया

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  4. बहुत ख़ूबसूरत और शानदार रचना लिखा है आपने! बधाई!

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  5. केवल राम जी नमस्कार! बहुत ही लाजबाव गजल कही हैँ आपने। शब्दोँ का चयन बहुत बहतरीन है और अपनी बात कहने का अंदाज निराला हैँ। बहुत बहुत शुक्रिया जी।

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  6. दिवाली की शुभकामनाये आपको भी....

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  7. Bhai Saheb,
    Admi wahi rahta hai,
    chere badal jate hain--- koi bat nahi,Apke udgar ek nirmam satya ko udbhasit karte hain.Thanks for a realistic and condensed post.

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  8. सही कहा आपने , जिन्दगी यूँ ही चलती है , हम वास्तविकता को हमेशा नजर अंदाज करते है , और जब वास्तविकता सामने आती है तो हम ....हड्वड़ा जाते हैं , जिन्दगी मैं बहुत जरुरी है सचाई को साथ रखकर जीना ...और ऐसा जीवन फिर सुंदर और खुशहाल होता है ...शुक्रिया मेरे ब्लॉग पर आने के लिए

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  9. .

    जो भी मिला सबसे है गम देने का गिला
    अपना उसे बनाकर, एक मददगार पाया होता ...

    behatreen rachna .

    .

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जब भी आप आओ , मुझे सुझाब जरुर दो.
कुछ कह कर बात ऐसी,मुझे ख्वाब जरुर दो.
ताकि मैं आगे बढ सकूँ........केवल राम.