06 जुलाई 2017

हिन्दी ब्लॉगिंग : आह और वाह!!!...1

जरा उन दिनों को याद करते हैं जब हम हर दिन अपना ब्लॉग देखा करते थे. कोई पोस्ट लिखने के बाद उस पर आई हर टिप्पणी को बड़े ध्यान से पढ़ते थे. साथ ही यह भी प्रयास होता था कि जिसने पोस्ट पर टिप्पणी की है, बदले में उसके पोस्ट पर जाकर भी टिप्पणी कर आयें. हम कोई पोस्ट लिखें या न लिखें, लेकिन ब्लॉगरों के ब्लॉग पोस्ट पर टिप्पणियों का सिलसिला अनवरत जारी रहता था. उन दिनों यह भी होता था कि ब्लॉगिंग हमारी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा था. सुबह उठते ही सबसे पहले ब्लॉग की हलचल को देख लिया जाता था, वरना ऐसा लगता था कि आज जिन्दगी का अहम् समय बेकार चला गया. जीमेल की बत्ती देखकर अंदाजा लगाया जाता कि सामने वाला अभी जाग रहा है. समय रात का हो या दिन का, हिन्दी ब्लॉगिंग की दुनिया में सूर्य कभी अस्त नहीं होता था और हिन्दी ब्लॉगरों की अंगुलियाँ कभी नहीं रूकती थी. कीबोर्ड और माऊस बेशक जबाब दे जाएँ, लेकिन ब्लॉगर अनवरत रूप से कार्य कर रहा होता था. उसके जहन में जनून था अपनी रचनात्मकता को दुनिया के सामने लाने का, साथ ही इन्टरनेट के माध्यम से हिन्दी की ताकत से दुनिया को अवगत करवाने का. वह तकनीकी रूप से सक्षम नहीं है, लेकिन उसकी हर शंका का समाधान करने के लिए कोई न कोई हर समय तत्पर है. एक ऐसा वातावरण जिसने सचमुच देश के हर उस व्यक्ति को करीब ला दिया जो ब्लॉगिंग से जुड़ा हुआ है.
मैं यह बात कोई सौ-पचास पहले की नहीं कर रहा हूँ, यह तो बस 7-8 साल पुराना किस्सा है. यह उस समय की भी बात है जब हिन्दी ब्लॉगिंग अपन चरम की और बढ़ रही थी. हर दिन नए ब्लॉग बन रहे थे, जैसे ही किसी ब्लॉगर को नए ब्लॉग के विषय में जानकारी मिलती वह तुरन्त ही उस ब्लॉग पर जाकर एक प्रशंसा से भरी टिप्पणी करता और साथ ही यह भी कहता कि हिन्दी ब्लॉगिंग की दुनिया में आपका स्वागत है, अनवरत लेखन के लिए आपको शुभकामनाएं. लेकिन मुझे समझ नहीं आया कि यह सिलसिला एकदम थम कैसे गया? क्या ब्लॉगरों द्वारा, ब्लॉगरों को दी जाने वाली इन शुभकामनाओं का असर थोड़ी देर के लिए ही था. जो कि ब्लॉगर अपना लेखन उस गति से जारी नहीं रख सके, जो गति 2007 से 2011-12 तक थी. हिन्दी ब्लॉगिंग की विकास यात्रा पर मैंने जितना काम किया है, उसमें कई रोचक चीजें भी देखने को मिली हैं. प्रारम्भ के हिन्दी ब्लॉगरों ने हिन्दी ब्लॉगिंग की दुनिया में ऐसे-ऐसे प्रयोग किये हैं जिनके बारे में जानकार आश्चर्यचकित हो जाना स्वभाविक है. ब्लॉगिंग शुरू होने से पहले भी इन्टरनेट पर हिन्दी की पहुँच को सुगम बनाने के लिए कई प्रयास हो चुके थे. लेकिन जैसे ही ब्लॉग की तरफ तकनीक से जुड़े लोगों का ध्यान गया तो, उन्होंने दिन रात मेहनत कर इस कार्य को भी अंजाम दिया और उन्हीं के प्रयासों की बदौलत हिन्दी ब्लॉगिंग का मार्ग प्रशस्त हुआ.
हिन्दी की पहली ब्लॉग प्रविष्ठी विनय जैन के ब्लॉग ‘हिन्दी’ पर देखने को मिलती है. हिन्दी का पहला सम्पूर्ण ब्लॉग 9-2-11 के रूप में 21 अप्रैल 2003 को अस्तित्व में आता है. इसके बाद से हम हिन्दी ब्लॉगिंग की विधिवत शुरुआत मानते हैं. इसके बाद धीरे-धीरे हिन्दी ब्लॉगिंग का सिलसिला आगे बढ़ता है. आलोक कुमार के ब्लॉग की ब्लॉग पोस्टें पढ़ने के बाद हिन्दी ब्लॉगिंग के प्रारम्भिक दौर के विषय में आसानी से जाना जा सकता है. इसके बाद सितम्बर 2003 में पद्यमजा का ब्लॉग ‘कही-अनकही’ सामने आता है. इस ब्लॉग की टेगलाइन हमारा ध्यान खींचती है, “नई शक्ति, नई चमत्कार के साथ पद्यमजा का चिट्ठा अब हिन्दी में’. इसी से हम अंदाजा लगा सकते हैं कि उस दौर में ब्लॉगिंग के प्रति ब्लॉगरों में कैसा जनून था. हालाँकि इनके ब्लॉग पर पहली प्रविष्ठी 1 जनवरी 2004 को प्रकाशित होती है. लेकिन फिर भी इन्होंने हिन्दी ब्लॉगिंग के प्रारम्भिक दौर में बहुत से कार्य किये हैं. इसके बाद देबाशीष चक्रवर्ती का पदार्पण हिन्दी ब्लॉगिंग की दुनिया में होता है, और यह व्यक्ति ‘नुक्ताचीनी’ के माध्यम से ऐसे-ऐसे प्रयोग करता है कि हिन्दी ब्लॉगिंग का परिदृश्य ही बदल जाता है. 2003 में हिन्दी के 2 ब्लॉग अंतर्जाल पर देखने को मिलते हैं, 2004 में इनकी संख्या 21, 2005 में 39 और इस तरह फिर संख्या के बढ़ने का यह सिलसिला आगे बढ़ता है.
हिन्दी ब्लॉगिंग की अब तक की यह यात्रा लगभग 14 वर्षों की यात्रा है. इन 14 वर्षों में हिन्दी ब्लॉगिंग की दुनिया में कई घटनाएं घटित हुई हैं. इन्टरनेट पर हिन्दी ब्लॉगों को संख्या को लेकर कोई निश्चित आंकडा कहीं से उपलब्ध नहीं हो सका है. लेकिन अगर चिट्ठाजगत के आंकड़ों को देखें तो 10 दिसम्बर 2010 तक 16,476 चिट्ठे उस पर पंजीकृत थे. इससे यह अनुमान भी लगाया जा सकता है कि हिन्दी ब्लॉगों की संख्या हजारों में हैं. एक अनुमानित आंकड़ा निकालने की कोशिश की जाए तो हिन्दी ब्लॉगों की संख्या 25 से 30 हजार के बीच में हो सकती है. लेकिन यहाँ संख्या का प्रश्न गौण हो जाता है, जब हम ब्लॉगों पर रचे जा रहे साहित्य का विश्लेषण करने का प्रयास करते हैं. यह सुखद पहलू है कि हिन्दी ब्लॉगिंग की दुनिया में स्त्री और पुरुषों की भागीदारी बराबर की है. युवा और युवावस्था पार कर चुके सब मिलजुल कर कार्य कर रहे हैं. हिन्दी ब्लॉगिंग की विकास यात्रा के दृष्टि से देखा जाए तो प्रारम्भ में ब्लॉगिंग के प्रति एक खासा आकर्षण देखने को मिलता है. लेकिन समय के साथ-साथ यह गति धीमी होती चली गयी. ऐसा भी नहीं है कि हिन्दी ब्लॉगिंग की दुनिया में सन्नाटा पसरा हुआ है, हाँ इतना जरुर है जो माहौल हमें 2011 तक देखने को मिलता है, उसमें कमी जरुर आई है. उसके कई कारण हैं. शेष अगले अंक में....!!! 

19 टिप्‍पणियां:

  1. #हिन्दी_ब्लॉगिंग के इतिहास की अच्छी जानकारी...अगली कड़ी का इंतज़ार..

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  2. बहुत बढ़िया। यह जीवंत दस्तावेज हैं। अगली कड़ी की प्रतीक्षा।

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  3. लगभग सारी बातें मेरे मन की ही
    और
    जानकारी आपने बहुत श्रम से एकत्र की है
    आभार

    वास्तव में ब्लॉग का इतना आकर्षण शायद फेसबुक और व्हाट्सएप द्वारा हमारा समय ले लेने के कारण कम हुआ होगा
    और फेसबुक पर लगभग हर शख्सियत की उपस्थिति और उन तक पहुंचने की आसानी और सुविधा भी ब्लॉगिंग से दूरी का कारण है
    शर्तिया

    लेकिन
    मन से आज भी ब्लॉग ही अधिक प्रिय है

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  4. सिलसिलेवार बढ़िया जानकारी, टिप्पणी न आना कोई विशेष कारण नहीं लगता ब्लॉगिंग कम होने का,हमारा आपसी संपर्क टूटना एक महत्वपूर्ण कारण था ,हमारीवाणी, चिट्ठाजगत से हमें बाकी ब्लॉगों तक पहुंचने में सुविधा होती थी,हालांकि मैं कई नए ब्लॉगों तक पहुँची, टिप्पणियों से होकर भी...मेरी ब्लॉगिंग में कम पोस्ट का आना अति व्यस्तता के बाद भी जारी था , याद आता है 2012 में जब बच्चों की शादी की तारीख तक मैंने पोस्ट लिखी,लेकिन अप्रत्याशित अनहोनी ने मुझे पंगु कर दिया और उसके बाद से अतिव्यस्तता रही,नेट,कम्प्यूटर की अनुपलब्धि भी एक कारण रहा। आपसे पहले कनिष्क के ब्लॉगप्रहरी पर भी उपस्थिति दर्ज रही और ब्लॉग सेतु पर आज भी प्रयोग करने का मन है।
    आगे की पोस्ट की प्रतीक्षा ...👍

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  5. कमाल तो यह है कि ब्लॉग पर PHD करने वाले भी इससे पीछा छुडा बैठे,
    तो बताओ, बाकियों की क्या मनोस्थिति रही होगी।

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  6. जिंदगी की तरह उतार चढ़ाव सब जगह देखने को मिलता है, एक दिन सबको अपने घर की याद जरूर आएगी बस जो भूले हैं उन्हें यूँ ही याद दिलाते रहें हम ..
    सार्थक ब्लॉग विश्लेषण

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  7. अच्छी जानकारी ब्लागरी के इतिहास की

    फिर से वो दौर लाने का प्रयास हुआ है, उम्मीद है, अच्छा होगा

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  8. आपने काफ़ी अध्ययन किया है इस विषय मे, बहुत रोचक और पठनीय जानकारी दी आपने, इससे आगे का भी इंतजार करेंगे. बहुत आभार आपका.

    रामराम
    #हिन्दी_ब्लॉगिंग

    कैप्चा तो हटाईये प्लीज.
    सादर

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    1. फिलहाल टिप्पणी करने की व्यवस्था को बदल दिया गया है. आपका शुक्रिया.

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  9. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (07-07-2017) को "न दिमाग सोता है, न कलम" (चर्चा अंक-2659) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  10. बहुत सटीक और विश्लेषणपरक पोस्ट है

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  11. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ’राष्ट्रीय एकात्मता एवं अखण्डता के प्रतीक डॉ० मुखर्जी - ब्लॉग बुलेटिन’ में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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  12. अच्छा विश्लेषण, नए आते रहेंगे कुछ पुराने जाएंगे भी, पर जो सही में ब्लॉगर हैं वोह दूर तो हो सकते हैं पर छोड़कर कभी नहीं जा सकते, चाह कर भी नहीं!

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  13. विचारणीय विश्लेषण ..... पर इस ठहराव ने मानो हिंदी ब्लॉग्गिंग को भुला ही दिया | अब भी लौट ही सकते हैं सब :)

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जब भी आप आओ , मुझे सुझाब जरुर दो.
कुछ कह कर बात ऐसी,मुझे ख्वाब जरुर दो.
ताकि मैं आगे बढ सकूँ........केवल राम.