01 जनवरी 2017

वर्ष 2017, सोशल मीडिया और अभिव्यक्ति की आजादी...1

पिछले कुछ वर्षों से अंतर्जाल हमारी जिन्दगी का एक अहम् हिस्सा बन गया है. अंतर्जाल पर उपलब्ध कुछ माध्यम हमारी रोजमर्रा की गतिविधियों में शामिल हो गए हैं. मेलब्लॉगफेसबुकट्विटरव्हाट्स एप्पइन्स्टाग्राम जैसे ठिकानों ने हमारी दैनिक जीवन की गतिविधियों और क्रियाकलापों को काफी हद तक प्रभावित किया है. इनके अलावा अनेक ऐसी वेबसाइट्स और मोबाइल एप्लीकेशन्स हैं जिनका प्रयोग हम अपनी जरूरतों के अनुसार करते हैं. भारत में जब से इन्टरनेट की शुरुआत (15 अगस्त 1995) हुई हैतब से लेकर आज तक भारत में इन्टरनेट का निरन्तर विस्तार होता चला गया है. सन 1992 में जब वर्ल्ड वाइड वेव (www) अस्तित्व में आया तब भारत में इन्टरनेट का प्रयोग करने वालों की संख्या शून्य  थी. 1995 में जब भारत में इन्टरनेट की शुरुआत हुई उस समय भारत प्रति सौ व्यक्तियों में इन्टरनेट का प्रयोग करने वालों की संख्या 0.026 थी,सन 2000 में यह संख्या 0.528 हो गयी. इसे हम ऐसे भी कह सकते हैं कि सन 2000 में भारत की कुल आबादी का मात्र 0.5% प्रतिशत आबादी ही इन्टरनेट के सम्पर्क में आई थी. सन 2005 में भारत में इन्टरनेट का प्रयोग करने वालों की संख्या कुल जनसंख्या का 2.4% थी. 2010 में भारत में इन्टरनेट का प्रयोग करने वालों का प्रतिशत 7.5 था और 2015 में यह 27% प्रतिशत तक पहुँच गया. भारत में 2016 की स्थिति देखें तो कुल जनसंख्या का 34.8% इन्टरनेट का प्रयोग करता है. इन आंकड़ों पर अगर हम गौर करें तो एक बात स्पष्ट रूप से सामने आती है कि भारत में इन्टरनेट का प्रयोग करने वालों की संख्या में सन 2010 के बाद एकदम से उछाल आ गया है. इसके कई सारे कारणों में से मोबाइल पर इन्टरनेट की उपलब्धता को सबसे महत्वपूर्ण माना जा सकता है. आज भारत में प्रति 100 व्यक्तियों में से 26 व्यक्ति इन्टरनेट का प्रयोग कर रहे हैं.
आम जनता का इन्टरनेट से जुड़ना सूचना-तकनीक की क्रान्ति की सार्थकता का सूचक है. सूचना क्रान्ति के इस दौर में पूरे विश्व का भूगोल बदल सा गया है. सूचना और सूचना की तकनीक ने वैश्विक रूप ले लिया है. इस कारण आम व्यक्ति का झुकाव भी इस माध्यम की तरफ सबसे ज्यादा है. सन 1995 में जहाँ पूरे विश्व की 1% आबादी इन्टरनेट के साथ जुडी थी,वहीँ सन 2016 के आते-आते पूरे विश्व की लगभग 40% आबादी इन्टरनेट से जुड़ चुकी है. देशों के हिसाब से अगर पूरे विश्व में इन्टरनेट प्रयोगकर्ताओं का आकलन करें तो हमें यह आंकड़े मिलते हैं कि Iceland की 100% आबादी इन्टरनेट का प्रयोग करती है. विश्व के छोटे-छोटे देश जिनकी जनसंख्या और क्षेत्रफल बहुत कम है वह इन्टरनेट का प्रयोग करने वालों में सबसे आगे हैं. सबसे अधिक आबादी वाले देशों के हिसाब से अगर देखा जाए तो चीन की आबादी विश्व में सबसे ज्यादा है और वहां की 52.2% जनसंख्या इन्टरनेट का प्रयोग करती है. आबादी के हिसाब से भारत विश्व में दूसरे स्थान पर आता है और यहाँ की कुल आबादी में से 34.8% जनता इन्टरनेट का प्रयोग करती है. सबसे आधुनिक और तकनीक के मामले में श्रेष्ठ माने जाने वाले देश अमरीका की 88.5% आबादी इन्टरनेट का प्रयोग करती है. इसके साथ ही यू. के. में इन्टरनेट का प्रयोग करने वालों की संख्या 92.6% है. कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि इन्टरनेट पूरे विश्व में प्रचलन में है और इसने पूरी दुनिया के भूगोल को बदल कर रख दिया है. जैसे-जैसे समय बीत रहा है इसका तकनीकी रूप से विकास हो रहा हैतथा यह आम जनता की पहुँच में आसानी से पहुँच रहा है. इन्टरनेट के माध्यम से ही हमें अनेक ऐसे तमाम साधन (जैसे वेबसाइटपोर्टलसोशल नेटवर्किंग साइट्समोबाइल एप्लीकेशन्स) उपलब्ध हुए हैंजिन्होंने पूरे विश्व को एक दूसरे से जोड़ने का काम किया है.
इन्टरनेट की बढ़ती उपयोगिता और सोशल सोशल नेटवर्किंग के इस दौर में व्यक्ति जी जिन्दगी में कई तरह के परिवर्तन आये हैं. आज एक सामान्य से इनसान के हाथ में भी स्मार्टफोन है और वह उसी के माध्यम से पूरी दुनिया से जुड़ा हुआ है. अब तो स्थिति यह है कि संवाद-विवाद-समर्थन-विरोध जैसे कम भी वह इन्टरनेट के माध्यम से करने लगा है. आम इनसान के हाथ में स्मार्टफोन का होनासिर्फ सम्पर्क स्थापित करने के साधन तक ही सीमित नहीं हैबल्कि स्मार्टफोन के रूप में उपलब्ध यह छोटी सी डिवाइस उसके सम्पूर्ण क्रियाकलापों का एक जीवन्त दस्तावेज है. इसके माध्यम से वह अपने जीवन के अनेक महत्वपूर्ण कार्यों को अन्जाम देता है. स्मार्टफोन में इन्टरनेट की उपलब्धता उसकी कार्यक्षमता को कई गुना बढ़ा देती है. इसे हम ऐसे भी कह सकते हैं कि इन्टरनेट स्मार्टफोन में आत्मा की तरह कार्य करता है. स्मार्टफोन अगर इन्टरनेट के साथ जुड़ा हुआ है तो वह एक तरह से व्यक्ति का जीवन्त साथी हो जाता है और इसके माध्यम से व्यक्ति उस हर कार्य को अन्जाम दे सकता है जो उसकी तात्कालिक जरुरत हो. इस तरह से हम यह समझ सकते हैं कि वर्तमान दौर में इन्टरनेट और इससे जुड़े हुए अनेक साधन व्यक्ति के जीवन का अहम् हिस्सा हैं और व्यक्ति जितना इन साधनों के साथ जुड़ता चला जाता है उतना ही उसका जीवन सुगम होता चला जाता है. शेष अगले अंक में...!!!

5 टिप्‍पणियां:

संध्या शर्मा ने कहा…

सही है स्मार्ट फोन ने हर आम इंसान की इंटरनेट तक पहुँच आसान बना दी है. सार्थक विश्लेषण। शुभकामनाएं ...

Kavita Rawat ने कहा…

इन्टरनेट की दुनिया के बारे में बहुत अच्छी जानकारी ..
आपको नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं ..

savan kumar ने कहा…

समय के साथ दुनिया बहुत बदल गई हैं
नव बर्ष की शुभकामनाएं
http://savanxxx.blogspot.in

HARSHVARDHAN ने कहा…

आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन जन्मदिवस ~ कवि गोपालदास 'नीरज' और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

नववर्ष की मंगलकामनाएं । सुन्दर पोस्ट ।