06 अक्तूबर 2010

आखिरी है ...!


वो दिन पहला था ,यह दिन आखिरी है
तुमसे हो रहा जो आज , यह मिलन आखिरी है ।

जाने किस मंजिल और किस राह के हम राही
दिल में है जो कशिश , उसकी चुभन आखिरी है ।

वयां करना कैसे छोड़ें हम इश्क -ए - जज्बात
तुम्हें अपना बनाने का, यह जतन आखिरी है

तुम ख्वाबों में रहोगे, या दिल में तस्वीर बनकर
परवाने का शम्मा पर , यह जलन आखिरी है ।

बनते थे तुम्हीं से ,यह गीत और ग़ज़ल मेरे
बजा रहा हूँ जिसे आज वो धुन आखिरी है

लाख इबादत की हमने आपकी मोहब्बत में
केवल जोड़ रहा हूँ , जो हाथ वो नमन आखिरी है

1 टिप्पणी:

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत ही अच्छी पंक्तियाँ लिखी हैं आपने..... सुंदर रचना