21 जुलाई 2017

ब्लॉगिंग : कुछ जरुरी बातें...2

9 टिप्‍पणियां:
हम ब्लॉगिंग की दुनिया में है तो, अगर हम कुछ जरुरी बातों का ध्यान रखेंगे तो हम सार्थक और बेहतर रचनात्मकता के साथ अपनी एक अलग पहचान स्थापित करने में कामयाब होंगे. इसके लिए कुछ जरुरी बातों की इन बिन्दुओं के तहत चर्चा की जा सकती है. गत अंक से आगे...!!!
जब भी कोई ब्लॉगिंग की दुनिया में प्रवेश करता है तो उसके लिए कुछ उपकरण जरुरी हैं. जैसे कम्प्यूटर, लैपटॉप, एक बेहतर इन्टरनेट कनेक्शन (जिसमें डाटा अधिक, सर्फिंग स्पीड तेज और दाम कम). हालाँकि स्मार्टफोन के आने से अब इन चीजों के बारे में अधिक नहीं सोचना पड़ता. बस एक बढ़िया सा फ़ोन खरीदिये और ब्लॉगिंग की दुनिया में प्रवेश कीजिये. इन आवश्यक उपकरणों के बाद जरुरी है कि हम बेहतर सोच के साथ ब्लॉगिंग शुरू करें. ब्लॉगिंग शुरू करने से पहले अगर हम कुछ ब्लॉग पढ़ लें, उन पर लिखे जा रहे विषयों का अध्ययन कर लें, ब्लॉग लिखने और विषय प्रस्तुतीकरण की कुछ जानकारी हासिल कर लें तो बहुत ही बेहतर होगा. इसके साथ ही ब्लॉग पर प्रकाशित प्रविष्ठियों के कंटेंट पर होने वाली बहसों पर थोडा ध्यान दें तो, हम योजनाबद्ध तरीके से ब्लॉगिंग की   दुनिया में प्रबेश कर सकते हैं. हम यह जान सकते हैं कि इस विस्तृत दुनिया में कदम रखने के बाद क्या करना है, और इस पथ पर अग्रसर होने के लिए किन-किन चीजों का ध्यान रखना है. मुझे लगता है कि अधिकतर लोग ऐसा नहीं करते. लेकिन ऐसा करने के अपने मायने हैं. ब्लॉग पर प्रविष्ठी लिखना एक तो थोड़ी सी तकनीकी जानकारी की मांग करता है, वही दूसरी और सर्च इंजन लिखी हुई सामग्री को किस तरह से लोगों तक पहुंचाता है, यह जानना बहुत जरुरी है. अगर हमें थोड़ी सी जानकारियाँ हैं तो हम अपने ब्लॉग को उसी तरह से निर्मित करेंगे और लेखन को प्रारम्भ से उसी दिशा में ले जायेंगे, जो निकट भविष्य में हमारे लिए और पाठकों के लिए सुखद हो. मैं यह ब्लॉग प्रविष्ठियां ब्लॉगिंग की सामान्य जानकारी के दृष्टिकोण से लिखा रहा हूँ. इसलिए इसमें ब्लॉगों का जिक्र कम होगा. किसी और रूप में हिन्दी ब्लॉगों के सन्दर्भ में भी अपनी समझ के हिसाब से चर्चा करने की कोशिश करूँगा.
1.          ब्लॉग प्लेटफॉर्म का चुनाव : अब जब हमने ब्लॉगिंग करने का मन बना लिया है तो क्योँ न झट से ब्लॉग बना लिए जाए. लेकिन प्रश्न यह है कि ऐसा हम कैसे और कहाँ कर सकते हैं. इसके लिए हमारे पास दो रास्ते हैं. एक तो यह कि हम मुफ्त में उपलब्ध प्लेटफॉर्म्स का चुनाव करें और ब्लॉगिंग प्रारम्भ करें. वहीं दूसरी और कुछ ऐसे भी प्लेटफॉर्म्स हैं जिन पर हम शुल्क अदा करके भी ब्लॉगिंग प्रारम्भ कर सकते हैं. मुझे लगता है कि हमें ब्लॉग प्लेटफॉर्म का चुनाव बहुत सावधानी से और अपनी जरूरतों के हिसाब से करना चाहिए. हालाँकि इसके लिए थोडा सा शोध करना होता है, अगर हम थोडा सा शोध करने के बाद किसी ब्लॉग प्लेटफॉर्म का चुनाव करते हैं तो बाद में होने वाली कई असुविधाओं से बच सकते हैं. अन्तर्जाल पर उपलब्ध जो ब्लॉग प्लेटफ़ॉर्म मुफ्त में उपलब्ध हैं उनमें से कुछ निम्न हैं:-

Price
00
00
00
00
00
Custom Domain
XX
XX
XX
XX
XX
Mobile Friendly
XX
Yes
Yes
Yes
Yes
Design
Nearly None
1000+
100+
100+
XX
Plugins
XX
1000+
XX
XX
XX
हालाँकि ब्लॉग प्लेटफॉर्म्स का विश्लेषण और कई मानकों के आधार पर किया जा सकता है. लेकिन हमारे लिए कुछ चीजें जरुरी हैं. जैसे कि कितने डिजाईन उपलब्ध हैं, प्लेटफ़ॉर्म मोबाइल फ्रेंडली है या नहीं, हम कोई डोमेन जोड़ सकते हैं या नहीं आदि. अगर हम इन आधारों को लेकर किसी ब्लॉग प्लेटफ़ॉर्म का चुनाव करते हैं और फिर ब्लॉगिंग प्रारम्भ करते हैं तो निश्चित ही हम ब्लॉगिंग की दुनिया में सफल ब्लॉगर बन सकते हैं और पूरे विश्व में अपनी रचनात्मकता का डंका बजा सकते हैं. इसके आलावा पेड प्लेटफ़ॉर्म की भी अपनी ही विशेषताएं हैं. हम उनका भी चुनाव कर सकते हैं. ब्लॉगिंग के लिए उपलब्ध Paid प्लेटफ़ॉर्म में Ghost, Weebly आदि का नाम लिया जा सकता है, इन प्लेटफॉर्म्स पर हम अपनी सुविधा के हिसाब से कोई भी प्लान चुन सकते हैं और ब्लॉगिंग शुरू कर सकते हैं. तो हमें इस बात पर गौर करना होगा कि बेहतर ब्लॉगिंग के लिए एक बेहतर ब्लॉग प्लेटफ़ॉर्म का चुनाव एक बेहतर भूमिका निभाता है.  
2.            कैसा हो ब्लॉग का डिजाईन: ब्लॉग के डिजाईन के विषय में लिखने लगेंगे तो अनेक प्रविष्ठियां लिखी जा सकती हैं. डिजाईन के इतने पहलू हमारे सामने हैं कि किसी एक पहलू पर भी बहुत कुछ लिखा जा सकता है. लेकिन इस विषय में मेरा यही मानना है कि ब्लॉग का डिजाईन बेशक आकर्षक होना चाहिए, लेकिन वह पाठक की पठनीयता के अनुकूल होना चाहिए. अगर हम रंग का ही चुनाव कर रहे हैं तो आँखों में चुभने वाले रंगों का चुनाव करने से पहले सौ बार सोचा जाना चाहिए. अगर हमारा ब्लॉग लेखन पर आधारित है तो सफ़ेद पृष्ठभूमि पर काले या स्याही रंग के अक्षर बेहतर प्रभाव छोड़ते हैं. इसके आलावा फैशन डिजाईनिंग या रेसिपी के जो ब्लॉग हैं उनका टेम्पलेट हमें अलग से ही चुनना होगा और उसी अनुरूप सामग्री का चुनाव भी करना होगा. ब्लॉग का लेआउट और डिजाईन पाठक को आपका ब्लॉग देखने-पढने के लिए आकर्षित करता है. यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हम अपने ब्लॉग का लेआउट और डिजाईन निर्धारित करते वक़्त बहुत सी चीजों को ध्यान में रखें, ताकि पाठक को किसी भी तरह की कोई असुविधा न हो. अनावश्यक विजेट लगाने से भी परहेज किया जाना चाहिए. कई बार ब्लॉग पर सामग्री कम होती है और विजेट ज्यादा होते हैं. हालाँकि उनका कोई ख़ास मतलब नहीं होता, जो जरुरी विजेट होते हैं, वह लगभग हर प्लेटफ़ॉर्म पर पहले से ही उपलब्ध होते हैं. फिर भी किसी विजेट या प्लगइन इन जरुरत पड़ती है तो उसे प्रयोग किया जा सकता है. ध्यान रहे कि पाठक हमारे ब्लॉग पर हमारे लेखन को पढने के लिए आता है, न कि साज सज्जा देखने के लिए. लेखन और प्रस्तुतीकरण अगर बेहतर होगा तो यकीनन हमारा ब्लॉग सबके लिए लाभदायक सिद्ध होगा, और यही तो हम चाहते हैं. शेष अगले अंक में...!!!         

20 जुलाई 2017

ब्लॉगिंग : कुछ जरुरी बातें...1

12 टिप्‍पणियां:
ब्लॉगिंग की दुनिया बड़ी रोमांचक है. इसका दायरा कितना बड़ा है उसका अंदाजा लगना मुश्किल है. लेकिन इतना तो हम समझ ही सकते हैं कि जहाँ तक इन्टरनेट और स्मार्टफोन की पहुँच है, वहां तक ब्लॉगिंग आसानी से पहुँच चुकी है. सोशल नेटवर्किंग के इस दौर में अन्तर्जाल पर उपलब्ध हर प्लेटफॉर्म का अपना महत्व है. इसी कड़ी में जब हम ब्लॉग के विषय में सोचते हैं तो हमें लगता है कि अभिव्यक्ति के इस माध्यम का भी अपना विशेष महत्व है. जो व्यक्ति इस माध्यम से जुड़ा है, वह इसकी प्रासंगिकता और महत्व को बहुत बेहतर तरीके से जानता है. आज की दुनिया जिस व्यवस्था की तरफ बढ़ रही है, उससे यह बात सामने आ रही है कि निकट भविष्य में ‘ऑनलाइन कंटेंट’ की अपनी महता होगी. आज ही हम देख रहे हैं कि किसी भी जानकारी को प्राप्त करने के लिए हम सबसे पहले ‘सर्च इंजन’ का ही रुख करते हैं. क्योँकि आज के दौर में किसी व्यक्ति के पास न तो इतना धैर्य है कि वह किसी तथ्य और खबर को जानने के लिए इन्तजार करे और पुस्तकालय में जाकर पुस्तकें, अखबारें या पत्रिकाएं खंगाले. वह अपनी जरुरत की सामग्री को सबसे पहले कहीं पर खोजने की कोशिश करता है तो वह है ‘सर्च इंजन’ ही है. भारत में गूगल का प्रचार-प्रसार अधिक होने के कारण, अक्सर लोग अपने काम की जानकारी के लिए गूगल का ही उपयोग करते हैं. जिस ‘कीवर्ड’ के माध्यम से वह सर्च करते हैं उसी के आधार पर उन्हें जो कुछ वहां उपलब्ध होता है, उसी को वह अपनी जानकारी का आधार मानते हैं.
इससे यह बात भी स्पष्ट हो रही है कि आज के दौर में और भविष्य में अंतर्जाल पर उपलब्ध सामग्री की महत्ता और प्रासंगिकता बढ़ेगी. इसके लिए जरुरी है अंतर्जाल पर अधिक से अधिक जानकारी उपलब्ध करवाने की. जो जानकारी हमें आज उपलब्ध हो रही है, उसे भी किसी ने (ब्लॉग, वेबसाइट, पोर्टल) आदि के माध्यम से उपलब्ध करवाने का प्रयास किया है. ब्लॉगिंग के माध्यम से भी बेहतर सामग्री अंतर्जाल पर उपलब्ध हुई है. वही ब्लॉगऔर ब्लॉगर  सबसे महत्वपूर्ण साबित हुए हैं, जिन्होंने कुछ मानकों के आधार पर ब्लॉगिंग की है. क्योँकि जब हम कोई प्रविष्ठी प्रकाशित करते हैं उसे कौन-कब और किस अन्दाज में पढ़ रहा है, यह हम पूरे यकीन से नहीं जान पाते. ब्लॉगिंग के विषय में जब सोचना शुरू करता हूँ तो लगता है कि मनुष्य के भीतर की दुनिया का साक्षात्कार, बाह्य जगत से त्वरित गति से किसी माध्यम से हो सकता है तो वह है ‘ब्लॉगिंग’.
हालाँकि अधिकतर लोग अंतर्जाल पर उपलब्ध इस माध्यम का उपयोग कई तरह से कर रहे हैं. कोई साहित्य की रचना जो तरजीह दे रहा है तो, कोई यहाँ अपने मन में उठने वाले भाव को लोगों से सांझा कर रहा है. किसी के लिए यह मंच विश्व में हो रही हलचल की चिन्ता करने का है तो, कोई अपने अतीत में जाकर उसे दुनिया के सामने बड़ी कलात्मकता से प्रस्तुत कर रहा है. कोई स्वादिष्ट व्यंजन बनाने की विधि सुझा रहा है तो, कोई मधुर आवाज में किसी को बेहतर रचनाएँ प्रस्तुत कर रहा है. ऐसे कई आयाम हैं, जो एक मंच पर विभिन्न तरह से अभिव्यंजित किये जा रहे हैं. इससे एक तरफ तो आर्थिक पहलू जुड़ रहे हैं, वहीँ दूसरी और व्यक्ति को अभिव्यक्ति का बेहतर मंच ब्लॉगिंग के माध्यम से उपलब्ध हुआ है. हालाँकि इस विषय में मैंने इससे पहले लिखी कुछ प्रविष्ठियों में चर्चा करने की कोशिश की है. मैं पिछले सात वर्ष से ब्लॉगिंग से बहुत गहराई से जुड़ा हुआ हूँ. मैंने सिर्फ ब्लॉगिंग करने के लिए ही इस माध्यम को नहीं अपनाया, बल्कि शोध की दृष्टि से भी हिन्दी ब्लॉगिंग के हर पहलू को बारीकी से जांचने की भी कोशिश की है. हालाँकि उन अनुभवों और पहलूओं पर फिर चर्चा करने की कोशिश करूँगा. लेकिन यहाँ मैं इस बात की तरफ ध्यान दिलाना चाहता हूँ कि बेहतर ब्लॉगिंग के जो जरुरी बातें हैं उन पर भी चर्चा कर ली जाए. 
हम जीवन में जो कुछ भी करते हैं उसके पीछे हमारा या कोई उद्देश्य होता है, या किसी इच्छा की पूर्ति के लिए हम कुछ करते हैं. हम स्वार्थवश भी ऐसे काम कर जाते हैं, जो निकट भविष्य में कई बार हमारे लिए सुखद होते हैं, या कई बार उनके परिणाम हमें आशा के अनुरूप प्राप्त नहीं होते. फिर भी मेरा मानना है कि मनुष्य जो कुछ भी अपने जीवन में करता है, उसके पीछे उसका कोई न कोई भाव जरुर काम करता है, और उसी भाव के वशीभूत होकर वह अपने किसी कार्य को अंजाम तक पहुँचाने के लिए प्रयासरत रहता है. ब्लॉगिंग के विषय में भी मुझे ऐसा ही लगता है कि इस माध्यम पर भी व्यक्ति उपस्थित है, उसका अपना कोई न कोई उद्देश्य जरुर है और यह सुखद है कि हिन्दी ब्लॉगिंग की दुनिया में अब तक जो कुछ भी घटित हुआ है, वह उद्देश्यपूर्ण है, रचनात्मकता की दृष्टि से बेहतर है. फिर भी अगर हम ब्लॉगिंग की दुनिया में है तो, अगर हम कुछ जरुरी बातों का ध्यान रखेंगे तो हम सार्थक और बेहतर रचनात्मकता के साथ अपनी एक अलग पहचान स्थापित करने में कामयाब होंगे. इसके लिए कुछ जरुरी बातों की इन बिन्दुओं के तहत चर्चा की जा सकती है. शेष अगले अंक में....! 

16 जुलाई 2017

हिन्दी ब्लॉगिंग : आह और वाह!!!...3

10 टिप्‍पणियां:
गत अंक से आगे.....हिन्दी ब्लॉगिंग का प्रारम्भिक दौर बहुत ही रचनात्मक था. इस दौर में जो भी ब्लॉगर ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय थे, वह इस माध्यम के प्रति काफी रचनात्मक और गम्भीर थे. हालाँकि उस समय अंतर्जाल पर हिन्दी को लेकर कुछ तकनीकी बाधाएं जरुर थीं, लेकिन हिन्दी को अन्तर्जाल पर स्थापित करने की दिशा में बड़ी गम्भीरता से काम किया जा रहा था. जैसे ही इन तकनीकी बाधाओं से थोड़ी सी राहत मिली, ब्लॉग जैसे प्लेटफ़ॉर्म का प्रचार हुआ तो हिन्दी ब्लॉगिंग की दुनिया में नए और उर्जावान लोगों का पदार्पण हुआ. यह लोग नयी भाषा-भाव और अभिव्यक्ति के नए तरीकों से सरावोर थे. यह वही लोग थे जो किसी अकादमिक दुनिया में अपना परचम लहराने के लिए नहीं लिख रहे थे, और न ही इन्हें कोई ऐसी मजबूरी थी कि इन्हें लिखना ही है. यह वह लोग थे जो अपने निजी जीवन के समय में से कुछ समय निकालकर हिन्दी ब्लॉगिंग के लिए समर्पित कर रहे थे.  हिन्दी ब्लॉगिंग की दुनिया में पदार्पण करने वाले यह लोग अपने अध्ययन और रोजगार के विभिन्न क्षेत्रों के अनुभव को हिन्दी भाषा के माध्यम से साँझा कर रहे थे. बहुत ही कम समय में अंतर्जाल पर ब्लॉगिंग के माध्यम से साहित्य-इतिहास-पुरातत्व-अर्थशास्त्र-राजनीतिविज्ञान-मनोविज्ञान-खगोलशास्त्र-ज्योतिष आदि अनेक विषयों की जानकारी हिन्दी भाषा में प्राप्त होने लगी. ब्लॉग अब एक मंच बन गया अभिव्यक्ति के विभिन्न रूपों का. यहाँ पर मुख्यधारा के पत्रकारों का एक समूह सक्रिय हो गया, और वह उस खबर का विश्लेषण नए अंदाज में करने लगा, जिसे वह सम्पादकीय दवाब के चलते अपने अखबार या टीवी चैनल के माध्यम से नहीं कर सकता था. इसी दौर में काफी सामूहिक ब्लॉग भी बने, जो किसी एक खास मकसद के लिए स्थापित किये गए थे. कुछ ही दिनों बाद यह नारा दिया गया कि ‘ब्लॉगिंग अभिव्यक्ति की नयी क्रान्ति है’.
यह बात तो सही भी है कि ब्लॉगिंग ने अभिव्यक्ति के क्षेत्र में काफी बदलाव किये हैं. पाठक और रचनाकार के बीच की दूरी को कम किया है. पाठक किसी रचना के विषय में क्या सोचता है, उसकी क्या राय है, उससे रचनाकार सहज ही अवगत हो जाता है. इसे अभिव्यक्ति के क्षेत में हुए बदलाव का एक महत्वपूर्ण पहलू कहा जा सकता है. लेकिन जिस मायने में ब्लॉगिंग अभिव्यक्ति की नयी क्रान्ति है, उसका प्रतिफल आना अभी बाकी है. सिर्फ माध्यम के बदलने से कोई क्रान्ति घटित नहीं होती, क्रान्ति जब घटित होती है, तब वह समूल परिवर्तन करती है. हमें इस बात को समझना होगा कि ब्लॉगिंग के माध्यम से हम क्या कुछ नया हासिल कर पाए और आगे हम क्या कुछ नया हासिल करने की इच्छा रखते हैं. ब्लॉगिंग का उद्देश्य हर किसी के लिए अलग हो सकता है. लेकिन जब हम ब्लॉगिंग को समाज और राष्ट्र के सरोकारों से जोड़ेंगे तो यक़ीनन हमें वह लाभ प्राप्त होंगे, जिनकी हम परिकल्पना कर रहे हैं. लेकिन इसके लिए हमें सतत प्रयास करने की जरुरत है. ब्लॉगिंग को और धार देने की आवश्यकता है. इस माध्यम के माध्यम से अपने निजी भावों की अभिव्यक्ति के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों की दिशा में भी काम करने की जरुरत है. हालाँकि ऐसा नहीं है कि हिन्दी ब्लॉगों पर सामाजिक सरोकारों से जुड़ सामग्री नहीं मिलती, या लोग समाज और राष्ट्र को लेकर कुछ नहीं लिख रहे हैं, लोग लिख रहे हैं लेकिन ऐसे लोगों को ‘नोटिस’ कौन कर रहा है, यह सबसे बड़ा प्रश्न है? हमारा अधिकतर ध्यान हिन्दी ब्लॉगों और ब्लॉगरों की संख्या पर केन्द्रित है, उनकी सक्रियता पर केन्द्रित है. लेकिन सही मायने में हमें यह भी परख करनी होगी कि कौन क्या लिख रहा है? और बेहतर लिखने वालों को प्रोत्साहित भी करना होगा. हमें सही मायने में किसी भी मुद्दे को विमर्श के केन्द्र में लाना होगा. लेकिन यह होगा तब ही जब हम लेखन के प्रति जागरूक होंगे.             
अभी जो विचार किया जा रहा है कि हिन्दी ब्लॉगिंग को किस तरह से पुनः पटरी पर लाया जाए . तो इसका एक सीधा सा जबाब है कि हम अपने लेखन के प्रति गम्भीर हो जाएँ. अब हमें मात्र सक्रिय रहने के लिए ही नहीं लिखना है. अब हमें जो कुछ भी लिखना है वह लेखकीय जिम्मेवारी के साथ लिखना है. बहस-सहमति-असहमति लेखन का एक महत्वपूर्ण पहलू है, हमें हर एक टिप्पणी को, किसी के दृष्टिकोण को, तथा किसी नवीन जानकारी के प्रति बहुत सजगता से विचार करते हुए आगे बढ़ना होगा. बहुत जरुरी है कि हम एक सकारात्मक वातावरण तैयार करें और अपने ब्लॉगों को ऐसी सामग्री से सरावोर करें, जो सही मायने में पाठक के लिए लाभप्रद हो. मात्र टिप्पणी की संख्या के हिसाब से यह अन्दाजा लगाने की कोशिश न की जाये कि मेरी यह रचना काफी महत्वपूर्ण हो गयी है. हमारी किसी रचना की क्या महता है, वह उसके पाठकों से पता चलती है, और यह निर्णय हम एक दिन में नहीं कर सकते. इसके लिए थोडा वक़्त लगता है. सर्च इंजन से जो पाठक आपकी रचना तक पहुंचता है, वह उस पर कितना समय बिताता है वहीँ से हम एक अंदाजा लगा सकते हैं कि हमें अपने लेखन में किस तरह के बदलाव करने की जरुरत है. हालाँकि यह सब तकनीकी पहलू हैं, आम ब्लॉगर इनकी तरफ ध्यान नहीं दे पाता. ऐसे में उसके लिए टिप्पणी की संख्या बहुत मायने रखती है. मैंने टिप्पणी करने के खिलाफ नहीं हूँ, यक़ीनन टिप्पणी बहुत प्रोत्साहन देती है. लेकिन कोशिश यह भी होनी चाहिए कि हम वाह!! वाह !!! वाली टिप्पणियों के प्रति सतर्क हो जाएँ. लेखन और रचना के सन्दर्भ में अगर हम टिप्पणी करते हैं तो यक़ीनन वह रचनाकार को खुद का विश्लेषण करने का मौका देती है. इससे उसका भी लेखन परिष्कृत होता है, जिसका लाभ निकट भविष्य में उसी रचनाकार को होता है. जरुरी नहीं कि हमें सब विषयों की जानकारी हो, लेकिन हम जिन विषयों पर लिखें, या जिस पोस्ट पर टिप्पणी करें, जो कुछ भी लिखें उसके प्रति हम पूरी तरह से सजग हों. अगर हम इस विमर्श को और आगे ले जाने में सहायक हो पायें तो वह दिन दूर नहीं जब हिन्दी ब्लॉगिंग अब तक हुए रचनात्मक क्षेत्र में एक नयी मशाल बनकर उभरेगी.