22 अक्तूबर 2013

न काशी न काबा, बस बाबा ही बाबा ... 2

हमारी संस्कृति का कोई भी पहलू ऐसा नहीं जिसमें अध्यात्म शामिल न हो, धर्म की बात न हो, सब पहलूओं में सब कुछ शामिल होने के कारण भी हर पहलू की अपनी विशेषता होना भारतीय संस्कृति को अद्भुत बनाता है और यही इसकी जीवटता का सबसे सशक्त प्रमाण है. गतांक से आगे..!!

भारतीय संस्कृति का इतिहास उतना ही पुराना है जितना कि मानव का इतिहास. इस देश की सभ्यता भी
उतनी ही पुरानी है. दुनिया में अनेक परिवर्तन आये, अनेक दर्शन आये, अनेक धर्मों का प्रादुर्भाव हुआ, अनेक देश बने, अनेक संस्कृतियाँ बनी और उनका प्रभाव इस देश की संस्कृति पर भी पडा. जो भी जहाँ से आया अपनी भाषा, अपनी भूषा, अपनी बोली, अपना खान-पान, रहन-सहन सब कुछ साथ लेकर आया और इतिहास इस बात का गवाह है कि इस देश पर दुनिया की नजरें हमेशा टिकी रहीं, और यह देश सबके सपनों का देश बना रहा. हर कोई यहाँ बसने की चाहत अपने मन में पाले हुए इस देश की तरफ बढ़ा और काफी हद तक उन्हें सफलता भी मिली, लेकिन हर किसी ने यहाँ के लोगों की ईमानदारी, सेवा भाव और समदृष्टि का लाभ उठाकर अपने स्वार्थों को सिद्ध किया है, फिर भी इस संस्कृति की सबको समान देखने के भाव ने किसी के प्रति कोई गिला शिकवा नहीं किया, और आज तक भी यह भाव सदा जीवित है और इसके गहरे अर्थ हैं. जब हम गहराई में जाकर विश्लेषण करते हैं तो पाते हैं कि यह सब कुछ तभी संभव है जब हमारे मार्गदर्शक हमें निरंतर इस मार्ग पर बढ़ने की प्रेरणा देते रहते हैं. 

भारत एक अद्भुत देश है, यहाँ विज्ञान और तकनीक का विकास सबसे पहले हुआ है. दुनिया के इतिहास को देखने पर यह बात स्पष्ट रूप से समझ आती है कि जितनी भी प्रगति आज हम दुनिया में देख रहे हैं उसका आधार भारतीय जीवन दर्शन, तकनीक और विज्ञान का हिस्सा है. दुनिया के अनेक शासक, अनेक व्यापारी, अनेक कम्पनियां यहाँ आयी और यहाँ से अकूत धन और सम्पति लूट कर चली गयीं, लेकिन फिर भी भारत अपनी मूल भावना को नहीं भूला और आज तक भी वह भाव बना हुआ है. दुनिया के विकास का प्रत्येक पहलू इस देश से जुडा हुआ है, दूसरे शब्दों में इसे ऐसे कहा जा सकता है कि दुनिया में हर प्रकार के विकास का प्रेरक भारत रहा है और इस सबके पीछे हमारे ऋषि-मुनियों की मेहनत निहित है, उनका निस्वार्थ सेवा भाव और निरंतर मानव कल्याण के लिए कार्य करना किसी से छुपा नहीं है. दुनिया जब अपने जीवन को जीने की जद्दोजहद में लगी हुई थी हमारे यहाँ के वैज्ञानिक तब सूर्य और नक्षत्रों पर शोध कर रहे थे, तब तक हम इस ब्रहामंड के रहस्यों को खोज चुके थे और अपने निष्कर्षों को दुनिया के सामने रख चुके थे.  

हमारा अतीत बहुत गौरवमय है, हमारे इतिहास में कभी कोई ऐसा प्रमाण नहीं मिलता कि हमने अपने स्वार्थ के लिए कभी किसी के हितों को नुक्सान पहुँचाया हो, लेकिन इतना जरुर किया है कि जब भी दुनिया में अन्याय, अत्याचार, स्वार्थ का बोलवाला हुआ है तब हमने उसे मिटाने के लिए हर संभव प्रयास किये हैं और उन प्रयासों से हमने हर किसी के लिए शांति और सकून का वातावरण तैयार करने का प्रयास किया है. हमारे यहाँ पर ऋषि-मुनियों और साधू-संतों का बहुत सम्मान हुआ है, लेकिन कहीं पर अगर किसी साधू संत का अपमान हुआ है तो भी उन्होंने मानव हित के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग करने से भी गुरेज नहीं किया है. इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा पडा है, खासकर मध्यकाल के बाद का इतिहास जब इस देश की शासन व्यवस्था का जिम्मा विदेशी शासकों ने अपने हाथ में ले लिया था और अपने मकसद को पूरा करने के लिए वह तरह-तरह हथकंडे अपनाते थे और यह परम्परा आज तक भी जारी है.   शेष अगले अंकों में ......!!!

3 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

देश परिवर्तन के सतत मार्ग से होकर जा रहा है।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

परिवर्तन में कोई बुराई नहीं है अगर वो अच्छा हो रहा हो ... पर ये बात भविष्य ही बताएगा ...

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

विचारणीय बात ..... आज के हालात यही बयां करते हैं