11 सितंबर 2012

मुनासिब सवाल का जबाब


सवाल जब किसी से भी पूछा जाये जरुरी नहीं हमें उसका उत्तर भी मिल जाये ,और जिस सवाल का  उत्तर आपको मिल जाये फिर तो आपकी सारी जिज्ञासा ही शांत हो जाये . जिज्ञासा का शांत होना कहीं न कहीं हमारे जीवन में ठहराब देता है . तब तक खोज चल रही है तब तक हम प्रगति कर रहे हैं कुछ न कुछ अर्जित कर रहे हैं . जिसने यह सोच लिया कि उसे सब पता है समझो वह रुक गया वहां से आगे विकास की सम्भावना समाप्त समझो जिसे सीखने और जानने की ललक है उसके लिए हर पल एक नया अनुभव है . हर चीज उसके लिए कुछ न कुछ पाने का साधन है . गारा जीवन में यह दृष्टि और सोच बनी रहती है तो हमारे जीवन का प्रत्येक पल कीमती हो जाता है और हम इतने चेतन हो जाते हैं कि हर पल का लाभ लेना चाहते हैं . बस यही जीवन की सार्थकता है और यही जीवन का मंतव्य है . बहुत पहले किसी शायर की कुछ पंक्तियाँ पढ़ीं थीं :- 

                                       हर चमकने वाली चीज सोना नहीं होती
                                       ना चमकने वाला आफताब होता है .
                                       बुराई कभी ख़राब नहीं होती '
                                       ना समझने वाला ख़राब होता है .
                                       मुनासिब सवाल का जबाब मिलना
 ,
                                       मुबारक है जरुरी नहीं..
                                       सवाल का जबाब ना मिलना भी
                                       एक जबाब होता है .

हर दिन हर पल ऐसे की सवाल हमारे सामने खड़े हो जाते हैं जिनके जबाब हमें ढूंढे नहीं मिलते . कुछ प्रश्न हम खुद पैदा करते हैं . कुछ प्रश्न सदा हमारे साथ जुड़े रहते हैं . कुछ के उत्तर हमें मिलते हैं और कुछ अनुतरित ही रहते हैं . अब हम सीधे ही मुद्दे पर आते हैं . आप सभी से पूछा था मैंने यह सवाल :- 

हिंदी ब्लॉगजगत के उस चर्चित ब्लॉगर का नाम बताएं जो आपकी अच्छी से अच्छी पोस्ट पर भी अपनी प्रतिक्रिया सिर्फ चार अक्षरों तक ही सीमित रखते हैं 

आपकी किसी अच्छी से अच्छी पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया को चार अक्षरों तक सीमित रखने वाले ब्लॉगर का नाम है : रणधीर सिंह सुमन . 

रणधीर सिंह सुमन जी जब भी किसी पोस्ट पर टिप्पणी करते हैं तो अंग्रेजी भाषा के सिर्फ चार अक्षर ही लिखते हैं .......N I C E . खटीमा में जब ब्लॉगर मिलन हुआ था तो मैंने उनसे इस तरह की टिप्पणी के विषय में पूछा थातो उन्होंने कहा था कि ....ब्लॉगजगत कुछ ऐसा है कि कई बार टिप्पणी ही विवाद का विषय बन जाती हैं ,  इसलिए सब तरह से सकारात्मक सोच को बनाये रखने के लिए ....( यह शब्द यानि चार अक्षर (N I C E ) ही काफी है .

आपकी प्रतिक्रिया स्वरूप टिप्पणियाँ मुझे प्राप्त हुई . लेकिन आप सबका जबाब सही उत्तर के आस पास ही घूमता रहा . किसी ने टिप्पणी ही लिख दी तो किसी ने नाम का अंतिम शब्द ही लिख दिया . भावनात्मक रूप से मैं समझ रहा हूँ कि आप जबाब के करीब हैं लेकिन तार्किक रूप से आप जबाब सही नहीं लिख पाए . आप में से किसी का नाम शामिल नहीं कर पा रहा हूँ इसका मुझे खेद है . हालाँकि यहाँ कोई पुरूस्कार नहीं दिया जाना है . लेकिन एक स्वस्थ और वैचारिक धरातल पर हम एक नया वातावरण कायम कर सकते हैं . बस यही प्रयास है .