31 जुलाई 2012

तन्हाई

संख्या का महत्व ..इस श्रृंखला की अगली कड़ी फिर कभी ......क्योँकि आजकल हम हैं तन्हा और यह हाल है हमारा ....लीजये प्रस्तुत है आज बहुत दिनों बाद आपके लिए यह कविता .....!

तन्हाई के आलम में
अन्धेरा आँखों के सामने होता है
दुखी दिल तुम्हारे वियोग में
टूट - टूट कर , न जागता न सोता है !

तुम्हारी चुलबुली अदाएं
एक - एक कर जब याद आती हैं
क्या हालत होती कैसे करूँ वयां
अधर बंद, आँखें सो जाती हैं !

मिले थे तुम तो कुछ सकूँ मिला था
अरमानों की थी मैंने बस्ती बसाई 

इस कदर जुदा हुए हम
तुम्हें मेरी वफ़ा रास नहीं आई 

अब अश्क नहीं , रक्त टपकता दृगों से
रुई का तकिया सब सोख लेता
हिज्र में तुम्हारे कैसे कटती रातें
पलंग भी सोने नहीं देता ...!

29 टिप्‍पणियां:

  1. वियोग के पीड़ा से भरे शब्द... शुभकामनायें

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  2. दुखी दिल तुम्हारे वियोग में
    टूट - टूट कर , न जागता न सोता है !

    ...............:))

    मुझे तो नहीं लगता .....:))

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  3. मन पीड़ा कहतीं पंक्तियाँ..... बहुत बढ़िया

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  4. ये प्यार में हमेशा जुदाई और तड़प ही क्यों मिलती हैं ???

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  5. वियोग की पीड़ा खट्टी-मीठी दोनो ही..शुभकामनायें केवल जी..

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  6. रास आई आपकी तन्हाई...

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  7. तन्हाई के आलम में
    अन्धेरा आँखों के सामने होता है
    दुखी दिल तुम्हारे वियोग में
    टूट - टूट कर , न जागता न सोता है ! भावो को शब्दों में उतार दिया आपने.............

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  8. तुम्हारी चुलबुली अदाएं
    एक - एक कर जब याद आती हैं
    क्या हालत होती कैसे करूँ वयां
    अधर बंद, आँखें सो जाती हैं !
    .......अरे!!क्या बात है!!जबरदस्त लिखा है! :):)

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  9. इस कदर जुदा हुए हम
    तुम्हें मेरी वफ़ा रास नहीं आई
    ....क्या कहूँ इस अन्दाज़ पर्।

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  10. कुछ दिन तन्हाई का भी मज़ा लीजिये .
    सुन्दर उदगार .

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  11. ह्रदयस्पर्शी वियोग व्यथा
    लाजवाब... :-)

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  12. ये तन्हाई का आलम देखा न जाए....!!

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  13. वियोग kकुछ अधिक ही बढ़ गया है !!!! उर्दू के शब्दों की अधिकता उत्पन्न करती है

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  14. कवि को क्या चाहिए?
    एक अदद तनहाई!
    बधाई हो बधाई
    आपने कर ली
    कविताई।:)

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  15. तनहाई भी अजीब ख्यालों से रूबरू कराती है.

    बहुत सुंदर.

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  16. अब अश्क नहीं , रक्त टपकता दृगों से
    रुई का तकिया सब सोख लेता
    हिज्र में तुम्हारे कैसे कटती रातें
    पलंग भी सोने नहीं देता ...

    विरह की स्थिति को शब्दों में ढाल दिया है आपने ... बहुत ही बढ़िया ...

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  17. BAHUT BAHUT SUNDAR RACHNA...ANTIM PANKTIYAN JHANJHOR KARTI HAIN...

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  18. बहुत सुंदर रचना है तन्हाई का आलम ही कुछ और होता है बहुत खूब . . .

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  19. अब अश्क नहीं , रक्त टपकता दृगों से
    रुई का तकिया सब सोख लेता
    हिज्र में तुम्हारे कैसे कटती रातें
    पलंग भी सोने नहीं देता ...!

    wah keval ji .....gajab ka likha hai ...badhai ke satha abhar bhi

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  20. अब अश्क नहीं , रक्त टपकता दृगों से
    रुई का तकिया सब सोख लेता
    हिज्र में तुम्हारे कैसे कटती रातें
    पलंग भी सोने नहीं देता ...!
    वियोगी दिल की दास्ताँ .....बहुत खूब ...

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जब भी आप आओ , मुझे सुझाब जरुर दो.
कुछ कह कर बात ऐसी,मुझे ख्वाब जरुर दो.
ताकि मैं आगे बढ सकूँ........केवल राम.