20 अप्रैल 2011

वफ़ा नजर आई

वफ़ा नजर आई उनकी वेवफाई मुझे
इश्क की दुनिया में लगी सच्चाई  मुझे

बदलते क्योँ हैं इश्क में इनसान के जज्बात
बात यह अब तक नहीं समझ आई मुझे

जुल्मों सितम तो मैंने किसी पर ढाया नहीं
फिर क्योँ दी उसने तोहफे में तन्हाई मुझे

सपने दिल के टूटे उनकी ही महफ़िल में
दुनिया अपनी ही लगने लगी पराई मुझे

इश्क के मयखाने में मय जब खत्म हो गयी
आंसुओं की ताल में उसने गजलें सुनाई मुझे

83 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

वाह, बहुत उम्दा!!

Rakesh Kumar ने कहा…

"इश्क के मयखाने में मय जब खत्म हो गई"

केवल राम जी इश्क के मयखाने में मय कब खत्म होती है ?

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

बढ़िया ग़ज़ल...

संजय भास्कर ने कहा…

वाह, क्या कहने...
बहुत ही खूबसूरत गज़ल कही है आप ने केवज जी

संजय कुमार चौरसिया ने कहा…

केवल राम जी,
बहुत बढ़िया

संजय भास्कर ने कहा…

क्या बात क्या बात मयखाने में मय के रस में सराबोर नज़्म...... बेहतेरीन और बधाई

Dr. Ashok palmist blog ने कहा…

बहुत ही खूबसूरत गजल है । प्रत्येक शेर सादगी और ताजगी लिए हुए । आभार केवल राम भाई !

Rahul Singh ने कहा…

चलिए, गजल सुनना-सुनाना तो चल रहा है.

ZEAL ने कहा…

बहुत ही खूबसूरत गजल है

सतीश सक्सेना ने कहा…

राकेश जी की बात पर गौर फरमाएं ....शुभकामनायें !!

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

shandaar gajal kewal bhai...:)

ललित शर्मा ने कहा…

जब होगी केवल मय ईश्क के पैमाने में
हमे थोड़ी भी देर न होगी वहाँ आने में ।:)

रचना दीक्षित ने कहा…

इश्क के मयखाने में मय जब खत्म हो गयी
आंसुओं की ताल में उसने गजलें सुनाई मुझे

मतलब तो सच्चाई के सामने आने का है. बिना मय के आ जाए या मय खत्म होने के बाद.गज़ल के सारे शेर बहुत सुंदर हैं. बधाई.

निर्मला कपिला ने कहा…

इश्क के मयखाने में मय जब खत्म हो गयी
आंसुओं की ताल में उसने गजलें सुनाई मुझ
वाह हर शेर बहुत अच्छा लगा। बधाई।

वन्दना ने कहा…

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (21-4-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

http://charchamanch.blogspot.com/

सदा ने कहा…

वफ़ा नजर आई उनकी वेवफाई मुझे
इश्क की दुनिया में लगी सच्चाई मुझे

बदलते क्योँ हैं इश्क में इनसान के जज्बात
बात यह अब तक नहीं समझ आई मुझे

वाह .. बहुत खूब कहा है इन पक्तियों में ... ।

Kunwar Kusumesh ने कहा…

वाह, क्या अंदाज़े-बयां है केवल जी.

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

सपने दिल के टूटे उनकी ही महफ़िल में
दुनिया अपनी ही लगने लगी पराई मुझे


बहुत सुन्दर एवं मर्मस्पर्शी रचना !
शुभकामनायें !

संध्या शर्मा ने कहा…

वफ़ा नजर आई उनकी वेवफाई मुझे
इश्क की दुनिया में लगी सच्चाई मुझे

वेवफाई में भी वफ़ा का नज़र आना बहुत बड़ी बात है... हर पंक्ति लाजवाब... मर्मस्पर्शी रचना...

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

इश्क के मयखाने में मय जब खत्म हो गयी
आंसुओं की ताल में उसने गजलें सुनाई मुझे

बहुत सुन्दर गज़ल

दिगम्बर नासवा ने कहा…

जुल्मों सितम तो मैंने किसी पर ढाया नहीं
फिर क्योँ दी उसने तोहफे में तन्हाई मुझे ...

ये तो आदत है हसीनों की ... क्या बुरा मानना ... लाजवाब ग़ज़ल है केवल जी ...

shikha varshney ने कहा…

इश्क के मयखाने में मय जब खत्म हो गयी
आंसुओं की ताल में उसने गजलें सुनाई मुझे
बहुत उम्दा गज़ल.

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

उम्दा ग़ज़ल......

हर शेर बेहतरीन

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर और भावप्रणव रचना!

cmpershad ने कहा…

थोडी आंच बची रहने दो, थोड़ा धुआं निकलने दो
कल देखोगे कई मुसाफिर इसी बहाने आएंगे :)
---दुष्यंत

udaya veer singh ने कहा…

bhavnaon ka pravah jab aansuon ka pratindhitva karne lage ,gajal ki sarthakata pramanit ho jati hai , aapke saral ,hridaygrahi shilp ne mugdh kar diya /shukriya ji...

अमित श्रीवास्तव ने कहा…

bahut khoob...

Dilbag Virk ने कहा…

she'r achchhe vaise rakesh ji se sahmat hoon

जाट देवता ने कहा…

राम-राम भाई,
गजल में सच्चाई नजर आ रही है।
कहीं फ़ंस तो नहीं गये थे।

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर गजल जी

Atul Shrivastava ने कहा…

अच्‍छी गजल।

गजब के भाव।
शुभकामनाएं आपको।

ज्योति सिंह ने कहा…

सपने दिल के टूटे उनकी ही महफ़िल में
दुनिया अपनी ही लगने लगी पराई मुझे

इश्क के मयखाने में मय जब खत्म हो गयी
आंसुओं की ताल में उसने गजलें सुनाई मुझे
bahut khoob kaha aapne ,sundar

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

बहुत सुंदर गज़ल भाई केवल राम जी बधाई और शुभकामनाएं |

minoo bhagia ने कहा…

waah

Deepak Saini ने कहा…

इश्क के मयखाने में मय जब खत्म हो गयी
आंसुओं की ताल में उसने गजलें सुनाई मुझे


वाह क्या बात है
बहुत खूब

मुसाफिर क्या बेईमान ने कहा…

इस ग़ज़ल की टिप्पणी को इस ब्लॉग पर पढिये
http://safar-jindgika.blogspot.com/2011/04/blog-post_21.html

विशाल ने कहा…

वफ़ा नजर आई उनकी वेवफाई मुझे
इश्क की दुनिया में लगी सच्चाई मुझे

वाह.बहुत खूब.
आज तो दिल से आह निकली है आपके,जो ग़ज़ल में तब्दील हो गयी.

राकेश जी प्रश्न से मैं भी सहमत हूँ.
इश्क के मयखाने से मय ख़त्म कब होती है.मय ख़्वार ख़त्म हो जाते हैं.

संतोष त्रिवेदी ने कहा…

अकेले कहाँ हो भाई ?
साथ तो है,उसकी यादें और तन्हाई !

वीना ने कहा…

बहुत अच्छी ग़ज़ल,
हर शेर दिल से निकला हुआ..

JHAROKHA ने कहा…

kewal ji
bahut khoob
itni shandaar gazal padhne ke baad dil se yahi shabd nikla----Wah!
har sher lazwaab
bahut bahut badhai
poonam

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

Wah..wa...

डॉ टी एस दराल ने कहा…

बहुत सुन्दर ग़ज़ल ।

सुबीर रावत ने कहा…

"...बदलते क्योँ हैं इश्क में इनसान के जज्बात,
बात यह अब तक नहीं समझ आई मुझे...."
आपकी गज़लें बहुत कह जाती है भाई केवल जी, और हमेशा की भांति यह पोस्ट भी मनभावन है ...... आभार....... अनेकानेक शुभकामनायें.

रजनीश तिवारी ने कहा…

जुल्मों सितम तो मैंने किसी पर ढाया नहीं
फिर क्योँ दी उसने तोहफे में तन्हाई मुझे

bahut achchi gazal

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

सपने दिल के टूटे उनकी ही महफ़िल में
दुनिया अपनी ही लगने लगी पराई मुझे
प्रेमपगी मन की व्यथा ....सुंदर ग़ज़ल

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

man ke ehsaso ko sashakt shabd diya hain aur gazel umda ban gayi jo asar chhodti hai apna.

jeewan ने कहा…

आपकी इस गजल के क्या कहने केवल जी ...आपने बहुत सुंदर शब्दों में मन के भावों को अभिव्यक्त किया है ..!

chirag ने कहा…

ishaq ek ahsas hain
ishq aaj bhi pavitra hain

bahut khoob likha ram ji
kya bat hain ishq ho gaya kya kisi se

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

इश्क के मयखाने में मय जब खत्म हो गयी
आंसुओं की ताल में उसने गजलें सुनाई मुझे

गहन, गहरी और बहुत ही सुन्दर।

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

....

दर्शन कौर धनोए ने कहा…

"बदलते क्योँ हैं इश्क में इनसान के जज्बात
बात यह अब तक नहीं समझ आई मुझे "


"सपने दिल के टूटे उनकी ही महफ़िल में
दुनिया अपनी ही लगने लगी पराई मुझे "

इश्क की कहानी ही सबसे जुदा है--किसी की झोली में सेकड़ो सितारे है तो कोई एक तारे को ही तरसता है --ईश्वर का फलसफा समझ नही आया --

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

अन्तर्मन की भावनाओं को अभिव्यक्त करती उम्दा गजल...

Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…

आदरणीय केवल राम जी,
वाह,
आप ने बहुत कमाल की गज़ले कही हैं मना पड़ेगा

Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…

श्री श्री 1008 श्री खेतेश्वर जयंती पर आज निकलेगी भव्य शोभायात्रा
or
जयंती पर आज निकलेगी शोभायात्रा

Udan Tashtari ने कहा…

उम्दा गजल...


इश्क के मयखाने में मय जब खत्म हो गयी
आंसुओं की ताल में उसने गजलें सुनाई मुझे

उपेन्द्र ' उपेन ' ने कहा…

केवल जी , बहुत खूब .... आपने वेवफाई में भी वफ़ा ढूंढ़ निकली . काबिलेतारीफ . .......... सुंदर प्रस्तुति.

प्रेम सरोवर ने कहा…

बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति।सादर।

MANOJ KUMAR ने कहा…

वफ़ा नजर आई उनकी वेवफाई मुझे
इश्क की दुनिया में लगी सच्चाई मुझे

.....बेहतरीन !

Patali-The-Village ने कहा…

अन्तर्मन की भावनाओं को अभिव्यक्त करती उम्दा गजल| धन्यवाद|

संगीता पुरी ने कहा…

वाह .. बहुत खूब !!

Ragini ने कहा…

sachchi aur achchi gazal........padhkar sukoon mila.....thanks

Ragini ने कहा…

sachchi aur achchi gazal........padhkar sukoon mila.....thanks

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

बहुत ही सुंदर गज़ल भाई केवल रामजी बधाई और शुभकामनाएं |

lokendra singh rajput ने कहा…

बदलते क्योँ हैं इश्क में इनसान के जज्बात
बात यह अब तक नहीं समझ आई मुझे
.... केवल जी ये बात तो अपुन राम को भी कभी समझ में नहीं आई...

ehsas ने कहा…

जुल्मों सितम तो मैंने किसी पर ढाया नहीं
फिर क्योँ दी उसने तोहफे में तन्हाई मुझे

वाह सर जी आप भी क्या खुब लिखते है।

ऋषभ Rishabha ने कहा…

तोहफे में नाहक मिली तन्हाई को नियामत समझकर जो रचना में ढाल ले वह सफल कलमकार होता है, बंधु मेरे!

***Punam*** ने कहा…

"बदलते क्योँ हैं इश्क में इनसान के जज्बात
बात यह अब तक नहीं समझ आई मुझे

जुल्मों सितम तो मैंने किसी पर ढाया नहीं
फिर क्योँ दी उसने तोहफे में तन्हाई मुझे''

ज़ज्बात का काया है कभी भी बदल सकते हैं और किसी के लिए भी बदल सकते है....
और तोहफा तो तोहफा ही होता है...फिर तन्हाई मिले या जुदाई..सब काबूल हो...!

सुन्दर सी ग़ज़ल...खूबसूरत एहसास !!

संतोष त्रिवेदी ने कहा…

इश्क में वफ़ा की उम्मीद भी एक बेवफाई है !



नई पोस्ट आपको ढूंढ रही है,आ जाओ !

Dinesh pareek ने कहा…

व्यस्तता के कारण देर से आने के लिए माफ़ी चाहता हूँ.

आप मेरे ब्लॉग पे पधारे इस के लिए बहुत बहुत धन्यवाद् और आशा करता हु आप मुझे इसी तरह प्रोत्सन करते रहेगे
दिनेश पारीक

Dinesh pareek ने कहा…

व्यस्तता के कारण देर से आने के लिए माफ़ी चाहता हूँ.

आप मेरे ब्लॉग पे पधारे इस के लिए बहुत बहुत धन्यवाद् और आशा करता हु आप मुझे इसी तरह प्रोत्सन करते रहेगे
दिनेश पारीक

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

बदलते क्योँ हैं इश्क में इनसान के जज्बात
बात यह अब तक नहीं समझ आई मुझे

बहुत खूब ... ।केवल राम जी बहुत बढ़िया ग़ज़ल..

anjana ने कहा…

जुल्मों सितम तो मैंने किसी पर ढाया नहीं
फिर क्योँ दी उसने तोहफे में तन्हाई मुझे

क्या कहूँ केवल जी इन शब्दों पर .....दिल पर असर कर गए ....बहुत खूब

बेनामी ने कहा…

आपके शब्दों में कमाल का जादू है .....आप यूँ ही लिखते रहें ....!

upasana ने कहा…

kewel ji bhot khubsurt likha hai .
good

OM KASHYAP ने कहा…

namaskar ji
blog par kafi dino se nahi aa paya mafi chahata hoon

OM KASHYAP ने कहा…

sir ji kya baat hein
ab to aap mey bhi khatam karne lag gaye ho kya baat hein
jwab nahi aapka

mridula pradhan ने कहा…

bahut achcha likhe.

Ashish (Ashu) ने कहा…

क्या खूब कहा हॆ..
आभार

प्रेम सरोवर ने कहा…

केवल राम जी,
एक सुझाव है गौर फरमाइएगा,बड़े काम की चीज लिख रहा हूं-शायद मेरा यह सुझाव आपके जजबात को एक नई दशा और दिशा दे सके।

"बदलते चेहरों के मौसम में ये जरूरी है,
नजर के सामने हर वक्त आईना रखना।"

बहुत ही मनभावन गजल।धन्यवाद।

anu ने कहा…

बदलते क्योँ हैं इश्क में इनसान के जज्बात
बात यह अब तक नहीं समझ आई मुझे

जुल्मों सितम तो मैंने किसी पर ढाया नहीं
फिर क्योँ दी उसने तोहफे में तन्हाई मुझे

बेहद खूबसूरत और दर्द भरी गज़ल इश्क को समझना बहुत ही मुश्किल है ........

Amrita Tanmay ने कहा…

बहुत ही खूबसूरत गजल ..हर पंक्ति लाजवाब..आभार

संजय भास्कर ने कहा…

....बेहद खूबसूरत और दर्द भरी गज़ल

Narendra Chaudhary ने कहा…

Apka prayash achha laga.

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