22 मार्च 2011

इन्हें अपनाने में क्या हर्ज है

व्यक्ति का व्यवहार उसके जीवन का आधार हैजैसा व्यवहार हम करते हैं बदले में हम वैसे ही पाते हैं. हमें जीवन में बहुत सी परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है. हमें बहुत से अनुभव वहां से प्राप्त होते हैं, और हमारे जीवन का सफ़र आगे बढ़ता रहता है, लेकिन जीना क्या हैइस बात से हम वाकिफ नहीं रहते. कभी हमारे जीवन में  निराशा आती है, तो कभी आशाकभी सुख तो कभी दुःखकभी हार तो कभी जीतकभी सफलता तो कभी असफलता. यह क्रम अनवरत रूप से चलता रहता है. लेकिन जीवन यहीं पर  खत्म नहीं हो जातावह बढ़ता रहता है. साँसों का सफ़र अनवरत रूप से चलता है और हम आगे बढ़ते रहते हैं, बस यही जीवन है. लेकिन इस जीवन को हर परिस्थिति में कैसे चलाया जाए, हम अपनी मानसिक स्थिति को किस तरह नियंत्रित कर सकते हैं. यह अगर कुछ बातों को अपनाया जाए तो एक बेहतर  जीवन जिया जा सकता है और फिर जब हम ऐसा कर पाने में सफल हो जाते हैं तो संसार के लिए हम आदर्श और अनुकरणीय बन जाते है. आखिर आज क्योँ हम कबीरतुलसीविवेकानंद, दयानंद सरस्वतीविद्यासागर ऐसे बहुत से नाम है जिनको  हम याद करते हैं. आखिर हम भी तो उन्हीं में से एक हैं फिर क्या हम भी इस जीवन के बाद इस संसार में याद किये जायेंगे..यह हमें  सोचना पड़ेगा..हम जिस तरह का जीवन जियेंगे उसी तरह की पहचान हमें मिलेगी और बस वही पहचान इस संसार में हमारी उपयोगिता का निर्धारण करेगी. व्यवहारिक जीवन में कुछ बातें है अगर हम उन्हें अपना लें तो एक सुन्दर और अनुकरणीय जीवन जिया जा सकता है....आखिर क्या है वह बातें....आइये बात करते हैं.....!
मुस्कराना:---किसी शायर ने भी क्या खूब लिखा है:--
‘क्या खूब जीना है फूलों का,
हँसते आते हैं और हँसते चले जाते हैं’.
एक फूल हर परिस्थिति में मुस्कराता है. इसी कारण जीवन के प्रत्येक पहलु में उसकी महता है. जीवन का कोई भी पक्ष ऐसा नहीं जहाँ पर फूल का महत्व न हो और यह सिर्फ इसी कारण है कि फूल हर परिस्थिति में मुस्कराता है. चाहे प्रकृति का कोई कोप आये या मानव उसे उसके बजूद से अलग कर दे लेकिन वह अपनी मुस्कराहट हमेशा बिखेरता रहता है. यह सीख इनसान को उस फूल से लेनी चाहिए. जब भी हमारे चेहरे पर मुस्कराहट होती है तो हम सामने वाले को आमन्त्रित कर रहे होते है. यह संकेत है इस बात का कि....आइये में तैयार हूँ, आपसे बात करने के लिएऔर जब हम मुस्कराहट से किसी का अभिवादन करते हैं तो सामने वाले व्यक्ति के मन में हमारे प्रति सकारात्मक प्रभाव परिलक्षित होता हैऔर यही प्रभाव उस व्यक्ति पर हमेशा बना रहता है तो अब सोच लेना है कि हमेशा मुस्कराते रहना है फूल की तरह.
विनम्रता:---किसी व्यक्ति का स्वागत करने के लिए सिर्फ मुस्कराना ही काफी नहीं होता. जब हम बात करें तो हममें विनम्रता भी होनी चाहिए. व्यवहारिक जीवन में विनम्रता का बहुत महत्व है, जो काम हम अकड़ से नहीं करवा सकते, वही काम हम विनम्रता से हो जाता है. तभी तो कहा गया है ‘विद्या ददाति विनयं’ हम जीवन में जितना भी ज्ञानार्जन करते हैं वह हमें विनम्रता देता है तभी तो कहा गया है ‘झुकना इंसान की शान है, अकड़े रहना मुर्दे की पहचान है, और यह बात काफी हद तक सटीक भी बैठती है. अगर हम में इनसानियत का भाव है तो हम हमेशा झुके रहते हैं और सही मायनों में विनम्रता तो वह है जब हम सब कुछ जानते हुए भी सामने वाले व्यक्ति के साथ विनम्रता से पेश आते हैं. जीवन में विनम्रता का बहुत महत्व है. अगर हम इसे अपना सके तो.
सहनशीलता:---किसी विचारक ने कहा है ‘सहनशीलता कमजोरी नहीं, बल्कि शक्ति की सूचक है’. अगर इस बात पर गहराई से विचार किया जाए तो हमें सहनशीलता का महत्व पता चल जाएगा. हम जितना सामाजिक जिम्मेवारियों का निर्वाह करते हैं, वहां पर कई बार हमारे भावों के विपरीत भी कुछ घट जाता है. लेकिन उस परिस्थिति में हम अपनी सहनशीलता का परिचय देकर कई बातों को टाल सकते हैं. अगर हममें सहनशीलता नहीं है तो हम हमेशा क्रोधित रहेंगे और क्रोध का अंत हमेशा पश्चाताप  होता हैलेकिन तब पश्चाताप करने से कोई लाभ नहीं होने वाला, क्योंकि तब तक चिड़िया खेत चुग चुकी होती है. इसलिए जीवन में अगर सहनशीलता है तो हम एक बेहतर जीवन जी सकते हैं, और सहनशीलता को अपनाने के लिए हमें अहंकार को त्यागना पड़ता है, और जब हम अहंकार को त्याग देते हैं तो बहुत सी नकारात्मक बातों से बच जाते है. खुद तो सुखी होते ही हैं औरों  के लिए भी सुख का कारण बन जाते हैं.
दया:---दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान’ अगर हम इस बात को सोचें तो हमें दया की महता पता चल जायेगी. दया और करुणा में सूक्ष्म अन्तर है, यानि दया हमारे मन का वह भाव है जिसे हम हर किसी के लिए रखते हैंलेकिन करुणा हममे विशेष परिस्थिति में पैदा होती है. दया को किस धर्म का मूल कहा गया है, यह सोचना है, और वह धर्म है इनसानियत का. जब हम सिर्फ मानवता के बारे में सोचते हैं तो हममें दया का भाव प्रत्येक प्राणी के लिए बना रहता है और यही भाव हमें उदार बनता है. उदारता का जीवन में बहुत बड़ा महत्व है जीवन में बहुत सारी चीजें घटित होती हैं, और बहुत कुछ हमारी सोच के प्रतिकूल भी घटित होता है तो हम उदारता का परिचय देकर उन सारी चीजों के प्रति सकारात्मक बने रह सकते हैं. लेकिन उदारता के मूल में दया और करुणा का भाव बहुत बड़ी भूमिका निभाता है.
प्रेम:---महात्मा गाँधी ने कहा है ‘प्रेम विश्व की सर्वोच्च शक्ति है, और फिर भी सबसे विनम्र’. प्रेम की महता को समझाते हुए कबीर ने भी कहा हैढाई आखर प्रेम का पढ़े सोई पंडित होय’ या फिर love is GOD तो प्रेम परमात्मा है. जीवन में अगर हम प्रेम कर पाने में सफल हो जाते हैं तो हम सब कुछ प्राप्त कर सकते हैंजीवन का दूसरा नाम अगर प्रेम दिया जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी. प्रेम को हम जितना कर पाते हैं हमारा जीवन उतना सुन्दर बनता जाता हैलेकिन प्रेम संकीर्ण  नहीं होना चाहिए प्रेम उदात होना चाहिए, पूरी मानवता के लिए पूरी खुदा की इस सृष्टि के लिए फिर तो कोई पराया नहीं रहेगा जब कोई पराया ही नहीं है तो फिर नफरत किससे? अब जब नफरत ही नहीं है तो हम खुदा हैं इनसान भगवान् का रूप है. हर जर्रे में हमें यह खुदा नजर आता है तो जीवन प्रेममय हो जाता है. ऐसा प्रेममय जीवन सिर्फ इनसानों के लिए ही नहीं, बल्कि धरती पर बसने वाले हर एक बशर के लिए सुखदायी होता है. प्रेम के विषय में जितना लिखा जाए कम है और इसे जितना किया जाए तब भी कम है. इसलिए इस छोटी सी जिन्दगी को जीने के लिए हमें बहुत सी बातों का ध्यान रखना पड़ेगा और जीवन को सुन्दर बनाते हुए हम दूसरों के लिए सुख का कारण बन सकते हैं. किसी ने कहा भी है कि:--
                   ‘अपने लिए जिया तो क्या जियाहै जिन्दगी का मकसद औरों के काम आना’
इस बात पर तुरंत प्रतिक्रिया करते हुए आदरणीय ललित शर्मा जी ने मुझे या पंक्तियाँ लिख कर भेजी:---
केवल राम है जग में और नही है कोए,
केवल राम सुमिर बंदे काहे को दुख होए.
हम औरों के काम तभी आ पायेंगे जब हम अपने जीवन और कर्म को उस काबिल बना पाएंगे. लिखने को तो और  भी कई विचारणीय बिंदु हो सकते हैं. लेकिन यह मुझे बहुत महत्वपूर्ण लगते हैं.
इस पोस्ट की पॉडकास्ट आदरणीय अर्चना चावजी  की मधुर आवाज में आप  मिसफिट: सीधीबात  पर  सुन सकते हैं. आपकी प्रतिक्रियाओं का इन्तजार रहेगा. आदरणीय अर्चना चावजी और गिरीश बिल्लोरे जी का बहुत आभार, इस तरह के प्रोत्साहन के लिए........!

90 टिप्‍पणियां:

  1. केवल जी काबिल ए तारीफ लेख़ और अगर इस लेख़ को कोई दिल ओ दिमाग को शांत रह के पढले और जीवन मैं उतार ले तो इंसान बन जाएगा. वरना आज के युग मैं.
    झुकने वाले और सहनशील को कमजोरी कि निशानी जाना जाता है.सच्चे प्रेमी और दया भाव रखने वाले और दूसरों के लिए जीने वाले को को मुर्ख और ना तजुर्बेकार समझा जाता है..

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  2. bhut hi pernadayak lekh hai apka,such me kudarat ki di har chij se hame jeene ki seekh deti hai...

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  3. bahut hi behatarin artical hai. yakinan kudrat hame bahut kuch sikhati hai, bas chahiye to use padhane aur samajhne vala ek dimag jo uski kahi har baat ko samjh sake aur aatmsaat kar sake. kyunki sirf sunna hi kafi nahi hai.

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  4. आपके बताये चारो सूत्र यदि जीवन मे उतार लिए जाये तो जीवन ही महकने लगेगा।
    सार्थक प्रयास
    आभार

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  5. हर भाव को बहुत ही खूबसूरती से शब्‍दों में उतारा है आपने बहुत खूब ..विचारात्‍मक प्रस्‍तुति ।

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  6. आपने पोस्ट में जो जो कहा सब सही है ! बहुत ही अच्छा लगा आपका पोस्ट मुझे !हवे अ गुड डे ! मेरे ब्लॉग पर आये !
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  7. बात आप ने सही कही है और हम सब इन बातो को जानते है और काफी लोग है जो सामान्य जीवन में इसका उपयोग भी करते है किन्तु समस्या तो तब आती है जब जीवन सामान्य नहीं रहता या हम किसी विकट स्थिति में होते है | यदि सभी मनुष्य ऐसा कर सकते तो दुनिया में कोई समस्या ही नहीं होती हर इन्सान महान लोगो की श्रेणी में खड़ा होता पर ऐसा नहीं है क्योकि हम सभी के शोचने का और जीवन जीने का ढंग अलग अलग है | अच्छा विचारणीय लेख |

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  8. ...बहुत ही उच्चविचार सरणी है आपकी!..पढ कर बहुत सुंदर अनुभूति हो रही है!

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  9. क्या हम भी इस जीवन के बाद इस संसार में याद किये जायेंगे ..यह हमें सोचना पड़ेगा ..हम जिस तरह का जीवन जियेंगे उसी तरह की पहचान हमें मिलेगी और बस वही पहचान इस संसार में हमारी उपयोगिता का निर्धारण करेगी . व्यावहारिक जीवन में कुछ बातें है अगर हम उन्हें अपना लें तो एक सुंदर और अनुकरणीय जीवन जिया जा सकता है....

    आपके द्वारा बताये ये चार मार्ग ही काफी हैं, एक जीवन की सार्थकता के लिए.. यदि हम इन बातों को अपने जीवन में उतर लें तो जीवन सुंदर बनाते हुए हम दूसरों के लिए सुख का कारण बन सकते हैं....
    प्रेरणादायक पोस्ट के लिए बहुत बहुत धन्यवाद......
    वर्ना खाली हाँथ आये हैं और खाली हाँथ ही जाना है..

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  10. बहुत ही खूबसूरती से शब्‍दों में उतारा है आपने बहुत खूब ..विचारात्‍मक प्रस्‍तुति ।

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  11. सुन्दर और चिंतनशील आलेख.कितना अच्छा हो जो यह सब समझ जाएँ ऐसा ही आचरण करें ..पर हो कहाँ पाता है.

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  12. सार्थक विचार ...
    विपरीत परिस्थितियों में किये गए व्यवहार से इंसान की असलियत आंकी जा सकती है ...
    @सच्चे प्रेमी और दया भाव रखने वाले और दूसरों के लिए जीने वाले को को मुर्ख और ना तजुर्बेकार समझा जाता है..
    सहमत हूँ मगर फिर भी दृढनिश्चयी सिर्फ अपनी बुराई के डर से सदगुणों का त्याग नहीं करते!

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  13. श्री केवल जी, सादर अभिवादन
    बहुत ही बढ़िया लेख बहुत ही अच्छा लगा पढ़ कर!

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  14. सीधा ,सच्चा, सार्थक और प्रेरणादायक लेख.
    लगे रहो केवल भाई विचारणीय बिन्दुओं की सुंदर माला गूंथने में.बहुत बहुत आभार इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए.

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  15. SAYTA " क्या खूब जीना है फूलों का , हँसते आते हैं और हँसते चले जाते हैं "Y BACAN HAI AAPKE..
    प्रेम विश्व की सर्वोच्च शक्ति है और फिर भी सबसे विनम्र " JO KAAM HUM LAD JHAGAR KR NHI KR SAKTE WO HUM PERM SE KARWALETE HAI...PERM ME PATTAR KO V JIT LENE KI SHAKTI HOTI HAI....BADHAI....

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  16. एक फूल हर परिस्थिति में मुस्कराता है.इसी कारण जीवन के प्रत्येक पहलू में उसकी महता है....

    इस एक वाक्य में ही समस्त जीवन दर्शन निहित है....इस सारगर्भित लेख के लिये बहुत बहुत आभार !

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  17. केवल राम जी बहुत सुंदर गुलदस्ता है :--

    मुस्कुराते रहो फूलो की तरह !
    गुनगुनाते रहो भवरो की तरह !
    विनम्रता ही तुम्हारा जीवन है !
    शालीनता ही तुम्हारी शक्ति है !
    करूणा मै ही दया निहित है !
    और प्रेम सर्वोच्च शिखर का बिंदु है !
    मानव जीवन मै ये जो न हो तो --
    म्रत्यु ही तुम्हारी अंतिम अभिलाषा है !
    प्रेरणादायक अभिव्यक्ति --धन्यवाद !

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  18. सार्थक, विचारणीय और अनुकरणीय आलेख्।

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  19. बहुत ही प्रेरक और अनुकरणीय आलेख..

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  20. फूलों का मुस्कराना, वातावरण में कोमलता फैला जाता है।

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  21. इन गुणों को ज़रूर अपनाना चाहिए!
    सार्थक आलेख।

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  22. साधु ह्रदय सदमार्ग ही दिखाते हैं ।

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  23. केवलजी....
    बहुत अच्छा लेख है...!
    इंसान के जीवन के लिए
    सार्थक और अमल करने योग्य सूत्र...
    काश कि हर इंसान अपने जीवन में इन्हें उतार पाए....!!

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  24. बहुत ही सार्थक, प्रेरक और अनुकरणीय आलेख| आभार|

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  25. अपने लिए जिया तो क्या जिया , है जिन्दगी का मकसद औरों के काम आना

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  26. बचपन में पढ़ा था जब पेड़ पर फल लगते हैं तो फल के बोझ से डालियाँ आप ही झुक जाती हैं ठीक उसी तरह से इंसानों में ज्ञान आने से इन्सान के में विनयशीलता आ जाती है. लेकिन कुछ लोग बड़ों के साथ विनयशीलता से पेश आते हैं पर बच्चों और गरिवों से साथ रूखे स्वर में ही बात करते हैं उनलोगों को आप के इस लेख को पढने की आवश्यकता है सही मायने में विनयशीलता वही है जो हर किसी के साथ सामान व्यवहार करे ....................

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  27. जीने के लिए ज़िन्दगी का मकसद होना बहुत ज़रूरी है!
    आपका लेख जीवन को सार्थक बनाने की दिशा प्रदान करता है !
    संग्रहणीय आलेख !
    आभार !

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  28. बहुत सुन्दर, प्रेरक और विचारणीय आलेख लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है! बधाई!

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  29. अच्छी और प्रेरक पोस्ट है.
    हाँ,मुस्कुराते रहना और विनम्रता से पेश आना तब ही अच्छा,सार्थक और अर्थपूर्ण होता है जब मुस्कराहट और विनम्रता आपके मन से निकले.वरना एयर होस्टेस की तरह प्लास्टिक स्माइल और कपटपूर्ण विनम्रता का कोई मतलब नहीं बल्कि घातक ही साबित हो रही है.

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  30. बहुत सुंदर ...सार्थक और विचारणीय पोस्ट..... जीवन में इन विचारों की प्रासंगिकता सदैव बनी रहती है.... बेहतरीन पोस्ट

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  31. बहुत सही बातें कहीं हैं । मुस्कराना और विनम्रता तो आसानी से अपनाई जा सकने वाली आदतें हैं । बस थोड़ी सी कोशिश की ज़रुरत है ।

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  32. सार्थक चिंतन, उत्तम प्रस्तुति.
    है काम आदमी का औरों के काम आना ।

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  33. इन दिव्य गुणों को अपनाने कोई हर्ज नहीं है,केवल भाई.इनसे तो आपका व्यक्तित्व और निखर जाएगा.विनम्रता,सहनशीलता,दया और प्रेम को अपनाकर मुस्कराहट तो अपने आप चेहरे पे खिल जायेगी.
    आपके इस उपयोगी आलेख के लिए आभार.

    " अपने लिए जिया तो क्या जिया , है जिन्दगी का मकसद औरों के काम आना "

    आपने आनंद का सूत्र दे दिया है.

    मार्गदर्शन के लिए फिर से आभार.
    उम्मीद है कि इस विषय पर और आलेख पढने को मिलते रहेंगे.

    उत्तर देंहटाएं
  34. इन दिव्य गुणों को अपनाने कोई हर्ज नहीं है,केवल भाई.इनसे तो आपका व्यक्तित्व और निखर जाएगा.विनम्रता,सहनशीलता,दया और प्रेम को अपनाकर मुस्कराहट तो अपने आप चेहरे पे खिल जायेगी.
    आपके इस उपयोगी आलेख के लिए आभार.

    " अपने लिए जिया तो क्या जिया , है जिन्दगी का मकसद औरों के काम आना "

    आपने आनंद का सूत्र दे दिया है.

    मार्गदर्शन के लिए फिर से आभार.
    उम्मीद है कि इस विषय पर और आलेख पढने को मिलते रहेंगे.

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  35. अत्यंत सुंदर और अनुकरणीय आलेख, काश सभी ऐसा कर पायें. बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम

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  36. Prernadayak. Kash! ham in margon ka anusaran kar sake. Aabhar.

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  37. कहना सरल अपनाना कठिन :)

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  38. हम जिस तरह का जीवन जियेंगे उसी तरह की पहचान हमें मिलेगी और बस वही पहचान इस संसार में हमारी उपयोगिता का निर्धारण करेगी .bahut sundar

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  39. सुंदर लेख और सुंदर विश्लेषण आपके विचारों से पूरी तरह सहमत हूँ.

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  40. " झुकना इंसान की शान है , ओर हम इस कारण अग्रेजो के गुलाम बन गये थे, इस लिये यह सब बाते किताबो मे ओर उपदेश मे तो अच्छी लगती हे, जिन्दगी की हकिकत मे नही, आज हम जितना झुकेगे लोग इज्जत नही बाल्कि हमे ओर झुकायेगे, मै यह नही कहता कि हमे अकडन चाहिये, लेकिन सम्मान से रहना चाहिये. धन्यवाद

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  41. विचारणीय और गंभीर लेख।
    सच में इसे यदि हम अपने जीवन में उतार लें तो न सिर्फ हमारा जीवन सार्थक हो जाएगा बल्कि पूरे विश्‍व का मानव जाति का कल्‍याण होगा।
    आपके इस लेख को पढतं हुए मन में किसी महापुरूष की कही ये बात आ गई,
    'हम जब पैदा होते हैं तो हम रोते हैं और हमारे अलावा सारे खुश होते हैं। हमें अपने जीवन काल में ऐसे कर्म करने चाहिए कि जब हम मरें तो हम हंसे और पूरी दुनिया रोए।'
    केवल जी आपको शुभकामनाएं।

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  42. ज़िन्दगी में हज़ार तकलीफ़ें हों फिर भी इन गुणों को अपनाएँ तो कुछ बात बने....

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  43. आनंद आ गया ...यह प्यारी कलम सिर्फ केवल राम की हो सकती है ! शुभकामनायें !

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  44. केवल राम जी बहुत ही पठनीय और मननीय आलेख है हम सब इसे अपनालें तो शायद ही जीवन का कोई कष्ट कष्ट लगे ।

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  45. भारतीय ब्लॉग लेखक मंच शहीद दिवस पर आज़ादी के दीवाने शहीद-ए-आज़म भारत माता के वीर सपूत भगत सिंह सहित उन सभी वीर सपूतो को नमन करता है जिन्होंने भारत माता को आजाद करने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी.
    आईये हम सब मिलकर यह संकल्प ले की भारत की आन-बान और शान के लिए हम सदैव तत्पर रहेंगे. यह मंच आपका स्वागत करता है, आप अवश्य पधारें, यदि हमारा प्रयास आपको पसंद आये तो "फालोवर" बनकर हमारा उत्साहवर्धन अवश्य करें. साथ ही अपने अमूल्य सुझावों से हमें अवगत भी कराएँ, ताकि इस मंच को हम नयी दिशा दे सकें. धन्यवाद . आपकी प्रतीक्षा में ....
    भारतीय ब्लॉग लेखक मंच

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  46. kewal ji
    bahut hi ati uttam baat ,yadi in baato ko gahrai se dilo- dimaag me ham baitha le to waqai jivan jeeja baht hi aasan ho jayega.aapne bahut hi sashakt avam prabhav purn lekh likhi hai jo sambhav ho jaaye to kitna achh ho.
    itna sundaravam prerana -dai lekh likhne ke liye bahut bahut
    dhanyvaad.
    xhma kijiyega idhar asvasthtavholi ki vystata ke karan tippni vilamb se de ra hi hun.
    poonam

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  47. बहुत सार्थक लेख ...सारे गुण कोई दृढ निश्चयी ही अपना सकता है ...

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  48. लेकिन इस जीवन को हर परिस्थिति में कैसे चलाया जाए हम अपनी मानसिक स्थिति को किस तरह नियंत्रित कर सकते हैं . यह अगर कुछ बातों को अपनाया जाए तो एक बेहतर जीवन जिया जा सकता है और फिर जब हम ऐसा कर पाने में सफल हो जाते हैं तो संसार के लिए हम आदर्श और अनुकरणीय बन जाते है . bahut hi kaam ki baate hai agar sanyam se chala jaaye is raaste par ,to kai mushkilo ka samadhan ho jaaye .

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  49. आपका यह लेख बहुत अच्छा लगा ... बधाई .

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  50. बहुत सार्थक लेख ...कोशिश करनी होगी इन्हें अपनाकर जीवन को सही दिशा देने की... केवल जी बहुत अच्छे विचार हैं आपके और ये आपके जैसे ही एक सुन्दर, कोमल और पवित्र ह्रदय में ही उठकर पनप सकते है.. शुभकामना..

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  51. प्रेरणादायी विचार... बहुत-बहुत धन्यवाद.

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  52. केवल राम जी यदि व्यक्ति इन बातों पर अमल करे तो ज्यादातर समस्याएं स्वतः ही समाप्त हो जाएँगी. बहुत ही अच्छा लिखा है आपने. आभार.

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  53. आपने जिन्दगी को फूलों के सामानांतर प्रस्तुत किया है. फूलों के क्या कहने भाई
    निकाह से लेकर मय्यत तक जहाँ पेश होंगे, मुस्कुराते हुए, जिन्दगी के हर वाकिये को
    संजीदगी से प्रस्तुत करते हुए.
    यहाँ इस मानव को देखिये, --- मीठी----मीठी---मीठी---मुस्कुराते हुए करें बातें दिलदार से फ़ोन पर,
    और रखते ही, विजयी भाव से, कह्कहाते, चचहाते हुए शब्दों की फूलछरी पता क्या सन्देश कहेगी
    मत सोचिये, दिलदार की तारीफ सुनाई देगी---- कितना बेफकूफ बनाया-----हेरान तनिक भी मत होयिए
    यही जिन्दगी है इस इन्सान की, ये क्या फूल से सीखेगा, सीखना है तो आयिए और किसी भी फूल पर नज़रों को
    टिका दीजिये, मत सोचिये कुछ भी---सिर्फ देखिये, निहारिये, मुस्कुराहट लायिए आपने चेहरे पर,----------------------
    फिर समझ में आएगा, केवल के शब्दों का तात्पर्य ------------------- बहुत अच्छा लगा, दिल को छू गया.

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  54. सुन्दर जीवन मीमांसा . प्रेम, दया जैसे अनमोल अनुभूतियाँ जीवन को सार्थक बनाती है .

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  55. केवल जी
    ये चार मार्ग ही काफी हैं, एक जीवन की सार्थकता के लिए
    काश कि हर इंसान अपने जीवन में इन्हें उतार पाए
    ..............प्रेरणादायक लेख

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  56. केवल जी
    थोड़ी सी कोशिश की ज़रुरत है ।
    कमाल की लेखनी है आपकी लेखनी को नमन बधाई
    आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ, क्षमा चाहूँगा,

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  57. kaffi sundar post hain
    vaise to aapane sab kah dia hain post main
    main bas itna kahna chahunga ke ...
    hum jaisa sochte hain jaisa vyavhar dusaro k sath karte hain
    vahi haamre sath bhi hota hain
    and its the law of universe

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  58. बिल्कुल सही लिखा है आपने...अगर हम इनका पालन कर लें तो (एक बार में न सही तो धीरे-धीरे करके) तो दुख पर विजय प्राप्त करना बहुत आसान हो जाएगा, हमारे लिए भी और सभी दूसरों के लिए भी...

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  59. आपके बताये चारो सूत्र यदि जीवन मे उतार लिए जाये तो जीवन ही महकने लगेगा।
    सार्थक प्रयास..आभार

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  60. aap ne phoolo ke bare may bahut achchha kaha phoolo our jeeva mai kaise smanta hai ye pata chla,badhyi bahut achchha lekha hai .mera blog

    http://myblobdilkibaat.blogspot.com

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  61. हर भाव को बहुत ही खूबसूरती से शब्‍दों में उतारा है आपने ...धन्यवाद

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  62. बहुत सुंदर पोस्ट भाई केवल राम जी बधाई |

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  63. शत प्रतिशत सत्य लेकिन हम है जान कर भी अनजान बने है सारगर्भित रचना , आभार

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  64. सार्थक और विचारणीय पोस्ट....भाई केवल राम जी

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  65. अच्छा लगा यह लेख। बड़े उपदेश भी कह सकते हैं। बच्चों की पाठ्य पुस्तक में छपे तो बात बने.

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  66. बहुत ही सार्थक एवं विचारणीय पोस्ट...
    आपकी हर पोस्ट आपके गहन अध्ययन को, विचार को और मेहनत को दर्शाता है...
    बात बहुत छोटी-छोटी सी हैं, परन्तु यदि इन्हें कोई अपना ले तो उसका व्यक्तित्व निखर जाए...
    बहुत-बहुत धन्यवाद...

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  67. केवल जी,
    बहुत अच्छी लगी मुझे आपकी पोस्ट
    काश हर कोई अपनाये इसे,

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  68. prerak avum anukarneey lekh pad dil aapkee soch samjh kee daad dene par vadhy hai .
    aabhar

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  69. सहनशीलता विनम्रता दया प्रेम सब मानवीय गुण मानव छोडता जारहा है मुस्कराने को फुरसत ही नहीं है बेचारे को

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  70. प्रेरणादायक पोस्ट के लिए बहुत बहुत धन्यवाद......

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  71. bahut sateek aur sunder vicharon se paripoorna hai aapka lekh.sakaratmak soch pradan kar raha hai .badhai.

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  72. Ati uchcha,anukarneey,prerak post...aapka aantrik rujhan v khoj se main andaja laga sakti hu ki apka spritual height kya hai..... hardik aashish

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  73. केवल जी आपने बिलकुल दुरुस्त कहा ये सारी बाते अपनी जगह बिलकुल सही है आशा और निराशा तो जीवन में आती जाती रहती है कई बार ये निराशा इंसान को तोड़ भी देती है ,पर जो इससे निकल आये वो जीना सीख जाता है. बहुत प्रेरणादायक

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  74. प्रेरणादायी आलेख।
    इन्ही गुणों से कोई आदमी, आदमी बन सकता है। वरना आदमी और जानवर में फर्क ही क्या रह जाएगा।

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  75. वाह ! एक सुन्दर ,सुखी और सार्थक जीवन जीने का पूरा पॅकेज है आपका लेख |

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  76. agar ye sabhi gun maanaw me aa jaayen to andhera kaayam nahi rahega.........

    achha aalekh.......

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  77. इसे अपनाने में कोई हर्ज़ नहीं है। बस हम डरते हैं कि यह बहुत कठिन है। अच्छे विचार। जरूरत है ऐसा जीने के लिए प्रारम्भ करने की। आभार।

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  78. सच कहा आपने अगर हम सच में दिल से चाहते है की लोग हमें मरने के बाद भी याद रखें तो हमें इन में से कम से कम एक बात का तो पालन करना ही होगा | क्युकी खुद के लिए तो हम जीते ही हैं थोडा सा दूसरों के लिए भी जी ले तो जिंदगी में आने का मकसद ही सार्थक हो जायेगा |
    एक सार्थक लेख |

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  79. केवल राम जी, अति सुन्दर लेख। खुश्बू तथा सुन्दरता ही फूलों का ताज है। इस लिए फूल मानव के भाता और अपनी ओर लोभता है और सन्सार की सब से सुन्दर हसती यानी महिलाओं को फूलों से मिसाल और उदाहरण दी जाती है।

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  80. पॉडकास्ट की अनुमति देंगे ?...एक बेहतरीन पोस्ट का.....

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  81. सार्थक प्रयास
    आभार

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  82. waah!!!!!kewal raam ji...itne gehre bicharo ke lie aapko subh kamnaye...hum sab hi in sab baato ko samjhte hai..lekin zindgi ke is aapa dhaapi me us par amal nhi kar paate...or jis din se humne amal karna shuru kia..anzaam or inaam dono hi humare samne hoga...bhut bhut badhai....

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  83. बेनामी20/1/12 12:48 am

    जीवन के अद्भुत और अनोखे सूत्र पिरोये हैं आपने इस पोस्ट में ....काश ऐसा कर पाना सबके लिए संभव हो पाता...

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  84. -----सामान्य रूटीन हांजी...हांजी..से हटाकर...टिप्पणी..

    --जबसे सृष्टि बनी है तभी से यही कहा जाता रहा है ..पर आज तक मानव क्या इसे अपनाता रहा है ???..

    --- " क्या खूब जीना है फूलों का ,
    हँसते आते हैं और हँसते चले जाते हैं "...
    -----क्योंकि फूल इंसान नहीं हैं...उनमें भावना नहीं है...और सच यह है कि डाल से टूटने के पश्चात हंसना भूल ..मुरझा जाते हैं...

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  85. बहुत बढ़िया सार्थक प्रयास है ,कम शब्दों में ज्यादा बातें
    आभार

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जब भी आप आओ , मुझे सुझाब जरुर दो.
कुछ कह कर बात ऐसी,मुझे ख्वाब जरुर दो.
ताकि मैं आगे बढ सकूँ........केवल राम.