07 दिसंबर 2010

एक दिन जिन्दगी

(कभी जिन्दगी और इसके मंतव्य के बारे में सोचता हूँ तो खुद को अजीब सी स्थिति में पाता हूँ ..और फिर सोचता हूँ कुछ इस तरह ......

एक दिन जिन्दगी हमसे यूँ ही रूठ जाएगी
सवालात होंगे सब खत्म, सिर्फ बातें ही रह जाएगी

तुम जिन्दगी में कभी, फूलों की तमन्ना ना करना
फूलों की तमन्ना से, काँटों की अहमियत बढ़ जाएगी

खुदा का नायाब तोहफा हो तुम दुनिया के लिए
दुःख दुनिया को देने से, कीमत तुम्हारी कम हो जाएगी

दुनिया के लिए कुछ न कर सको तो इतना कर देना
तुम्हारी निष्काम दुआ, किसी के चेहरे को मुस्काएगी


लाख कोशिश करें हम खुद को छुपाने की
बदलते चेहरे पर, असलियत सामने आ जाएगी

मैं देता हूँ नसीहत तुमको, खुद को "खुदा" बनाने की
सब में केवल "खुदा" को देखो, तुम्हें खुदाई मिल जाएगी


68 टिप्‍पणियां:

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

achchhe bhav..
achchhe vichar...

नरेश सिह राठौड़ ने कहा…

बहुत बढ़िया रचना है |सुन्दर दिल के सुन्दर विचार |

deepak saini ने कहा…

बहुत अच्छे विचारो वाली
खूबसूरत गजल

अरविन्द जांगिड ने कहा…

सुन्दर गजल लिखी है आपने, आत्मीय आभार

"आपकी गजल दिल को छूने वाली है".

आप भी आईये, हम को भी बुलाते रहिये
दोस्ती बुरी नहीं, दोस्त बनाते रहिये

आपका अपने ब्लॉग पर सदैव स्वागत रहेगा.
http://arvindjangid.blogspot.com/

विरेन्द्र सिंह चौहान ने कहा…

लाख कोशिश करें हम खुद को छुपाने की
बदलते चेहरे पर, असलियत सामने आ जाएगी


Bahut Khoob.............

निर्मला कपिला ने कहा…

दुनियां के लिए कुछ न कर सको तो इतना कर देना
तुम्हारी निष्काम दुआ, किसी के चेहरे को मुस्काएगी
बहुत सार्थक सन्देश दिया इस कविता के माध्यम से। बधाई।

Kailash C Sharma ने कहा…

मैं देता हूँ नसीहत तुमको, खुद को "खुदा" बनाने की
सब में केवल "खुदा" को देखो, तुम्हें खुदाई मिल जाएगी

बहुत प्रेरक रचना...सुन्दर अभिव्यक्ति..

ताऊ रामपुरिया ने कहा…

तुम जिन्दगी में कभी, फूलों की तमन्ना ना करना
फूलों की तमन्ना से, काटों की अहमियत बढ़ जाएगी


बिल्कुल सही कहा है क्योंकि ये दुनियां द्वैत के सिद्धांत पर ही टिकी हुई है, बहुत शुभकामनाएं.

रामराम.

एस.एम.मासूम ने कहा…

लाख कोशिश करें हम खुद को छुपाने की
बदलते चेहरे पर, असलियत सामने आ जाएगी
..

सुंदर रचना केवल जी

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

फूलों की तमन्ना से, काटों की अहमियत बढ़ जाएगी

वाह क्या बात कही है ..बहुत खूब ...और सच है खुदाई दूसरों को खुश रखने में ही मिलती है ...

सुबीर रावत ने कहा…

जिंदगी रूठने की बात अभी क्यों कर रहे हो भाई केवल जी, जिंदगी भोग तो लो, जिंदगी जी भर कर जी लो फिर देखेंगे,........... भाई केवल जी, आपकी रचनाओं में दम है. किन्तु निराशावादी बातें मत करो न, .......... आशावादी भाव रखो, अच्छा लगेगा. न हो तो कभी किसी अस्पताल में जाकर घंटे दो घंटे बिताकर देखो...... अपनी जिंदगी खुदा की नियामत लगेगी तब. ........ बहरहाल......... शुभकामनाओं सहित

Kunwar Kusumesh ने कहा…

तुम जिन्दगी में कभी, फूलों की तमन्ना ना करना
फूलों की तमन्ना से, काटों की अहमियत बढ़ जाएगी

अहा,क्या बात कही है केवल जी आपने

केवल राम ने कहा…

@>>सुबीर जी
भाई ...मैं कोई नकारात्मक बात नहीं कर रहा हूँ ...पर मुझे जिन्दगी की वास्तविकताओं के बारे में सोचना अच्छा लगता है ...इसलिए यह गजल लिख दी ...बाकि कोई भाव नहीं ...बस वास्तविकता को साथ लेकर अपनी जिन्दगी का सफ़र तय करूँ ...आपका धन्यवाद

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

बहुत प्रभावशाली ग़ज़ल.. !

संजय भास्कर ने कहा…

क्या बात कही है केवल जी आप ने बहुत कमाल की गज़ले कही हैं

संजय भास्कर ने कहा…

आप की ग़ज़ल दिल में हलचल पैदा करती है.मैं यह बिलकुल नहीं कहूँगा की आप दनादन लिखिए.बस "आँखों में उजाले" यों ही रोशन रहें.

सम्वेदना के स्वर ने कहा…

केवल राम जी,
आपके भाव बहुत सुंदर हैं...किंतुआवश्यकता है अब वर्तनी की ओर भी ध्यान देने की...टंकण की अशुद्धियाँ कई बार ख़टकती हैं..जिनसे कविता के प्रवाह में व्यवधान उत्पन्न होता है...जैसे,काटों की जगह काँटों, और दुनियां की जगह दुनिया..नायब की जगह नायाब.. पोस्ट करने के पहले एक बार दोहरा अवश्य लें..
वैसे आपकी कविता प्रेरणादायक है!!

उपेन्द्र ने कहा…

मैं देता हूँ नसीहत तुमको, खुद को "खुदा" बनाने की
सब में केवल "खुदा" को देखो, तुम्हें खुदाई मिल जाएगी
kya bat kahin kewal sahab........bahoot khoob

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर भाव लिज़े हे आप की यह रचना, बहुत सुंदर, आज बहुत दिनो बाद आया हुं, धन्यवाद

शिवम् मिश्रा ने कहा…


बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

मनोज कुमार ने कहा…

सुंदर और नेक ख़्यालात। बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
हिन्दी साहित्य की विधाएं - संस्मरण और यात्रा-वृत्तांत

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

तुम जिन्दगी में कभी, फूलों की तमन्ना ना करना
फूलों की तमन्ना से, काँटों की अहमियत बढ़ जाएगी

बहुत आशावादी और सुंदर भाव लिए पंक्तियाँ..... प्रभावी अभिव्यक्ति.....

अन्तर सोहिल ने कहा…

बेहतरीन अभिव्यक्ति
हमें यह रचना पढवाने के लिये हार्दिक आभार
निम्न पंक्तियां बहुत ज्यादा पसन्द आयी हैं
लाख कोशिश करें हम खुद को छुपाने की
बदलते चेहरे पर, असलियत सामने आ जाएगी

मैं देता हूँ नसीहत तुमको, खुद को "खुदा" बनाने की
सब में केवल "खुदा" को देखो, तुम्हें खुदाई मिल जाएगी


प्रणाम स्वीकार करें

राजीव थेपड़ा ने कहा…

लो भाई केवल....हम भी आ गए यहाँ....और सच बताएं....अच्छा ही लगा यहाँ आकर....बढ़िया है....बधाई....!!!

monali ने कहा…

Khuda banne ki seekh na dijiye varna fir koi kisi se shikayat nahi kar payega...

kisi kavi ki kuchh lines yaad aati hain..

एक आदत सी बन गई है तु और आदत कभी जाती नहीं
मैकश-औ-मय है मगर इतनी कडवी कि पी जती नहीं
क्या कहूं कि मुझको ईसा बना दिआ तुमने,
अब शिकायत भी तो कि जाती नहीं

shikha varshney ने कहा…

मैं देता हूँ नसीहत तुमको, खुद को "खुदा" बनाने की
सब में केवल "खुदा" को देखो, तुम्हें खुदाई मिल जाए
जबर्दस्त्त ...बहुत बढ़िया.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

लाख कोशिश करें हम खुद को छुपाने की
बदलते चेहरे पर, असलियत सामने आ जाएगी ..

बहुत खूब .. ये शेर बहुत लाजवाब है ... इंसान का चेहरा आइना होता है ... सच दिखला देता है ...

अनुपमा पाठक ने कहा…

तुम्हारी निष्काम दुआ, किसी के चेहरे को मुस्काएगी
waah!

दीपक बाबा ने कहा…

फूलों की तमन्ना से, काँटों की अहमियत बढ़ जाएगी

बहुत खूब केवल राम जी,
जिंदगी पर एक नया फलसफा पेश करने के लिए साधुवाद

राजेश उत्‍साही ने कहा…

केवल जी केवल वही लिखें जो आपको और से अलग करता हो। शुभकामनाएं।

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

khubsurat............follow karna pada...

'अदा' ने कहा…

तुम जिन्दगी में कभी, फूलों की तमन्ना ना करना
फूलों की तमन्ना से, काटों की अहमियत बढ़ जाएगी

खूबसूरत अशआर...
फूलों से बेहतर काँटें ही हैं...
ख़ुशबू नहीं देते, न सही..
बढ़ कर दामन तो थाम लेते हैं...
अच्छा लिखते हो..
आशीर्वाद..!

POOJA... ने कहा…

हर पंक्ति याद रखने लायक है... बहुत खूब... मन को छू जाने वाली रचना...

ज़मीर ने कहा…

बहुत ही लाजवाब गज़ल. शुभकामनाएं

एस.एम.मासूम ने कहा…

बहुत सुंदर कल सुबह का इंतज़ार करें...हमारे भाई केवल राम जे चमकेंगे सितारों की तरह "अमन का पैग़ाम पे"

रचना दीक्षित ने कहा…

लाख कोशिश करें हम खुद को छुपाने की
बदलते चेहरे पर, असलियत सामने आ जाएगी

बहुत लाज़वाब... हर एक शेर दिल पर दस्तक दे गया

फ़िरदौस ख़ान ने कहा…

मैं देता हूँ नसीहत तुमको, खुद को "खुदा" बनाने की
सब में केवल "खुदा" को देखो, तुम्हें खुदाई मिल जाएगी

बहुत ख़ूब...

GirishMukul ने कहा…

गुरु छा गये आज तो

इंदु पुरी गोस्वामी ने कहा…

'फूलों की तमन्ना से, काटों की अहमियत बढ़ जाएगी'एक सत्य,जीवन का एक फलसफा.बाबा!गज़लों,नज्मो के बारे में ज्यादा ज्ञान नही.अशार किसे कहते है.नज्म,नग्मा गज़ल,शे'र आदि में क्या अंतर है,मुझे नही मालूम इसलिए तुम्हारी इस रचना के रचना-शिल्प के बारे में कुछ नही कह सकती. तुम्हारे मनोभावों अच्छे है इसलिए वो बात रचना में आई है और कोई भी रचना हो रचनाकार का व्यक्तित्व उसका मानसिक स्तर ,उसके सोच विचार उसकी रचना में झलक ही उठते हैं.और हर बार तुम्हारी रचनाओं में मैंने तुम्हे पढा.निसंदेह अच्छे इंसान हो.
यूँ ऊपर लिखी पंक्ति को पढ़ कर एक बात कहूँ?देखो बुरा ना मानना.टिप्पणियों और टिप्पणीकारों पर कितनी सटीक बैठ रही है ना ?खास उ पर जो 'वाह! बहुत बढ़ीया' 'बहुत खूब' और 'दिल को छू गई'-सी टिप्पणी हर पोस्ट पर चिपका देने का काम करते हैं.है न ? हा हा हा

'उदय' ने कहा…

लाख कोशिश करें हम खुद को छुपाने की
बदलते चेहरे पर, असलियत सामने आ जाएगी
... bahut khoob ... behatreen gajal !!!

babanpandey ने कहा…

केवल जी //
आपका आभारी हूँ /
मेरे ब्लॉग पर आये ..सच कहते है
ब्लॉग अब एक नशा बन चूका है /
लिखते रहे /
सुझाब देते रहे //

RAJNISH PARIHAR ने कहा…

बहुत प्रभावशाली ग़ज़ल..

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

केवल राम जी,
चलते चलते आपने बहुत बड़ी बात कह दी ,
`सब में केवल "खुदा" को देखो, तुम्हें खुदाई मिल जाएगी !`
अच्छी अभिव्यति है !
-ज्ञानचंद मर्मज्ञ

JAGDISH BALI ने कहा…

आप हिमाचल से हैं, खुशी हुई ! सुन्दर लाइनें आप ने लिख डाली है ! बधाई हो !! मैं आप को फ़ोलो कर रह हूं ! कृप्या म्रेरे ब्लोग पर आ कर फ़ोलो करें व मर्ग प्रशस्त करे !

mark rai ने कहा…

लाख कोशिश करें हम खुद को छुपाने की
बदलते चेहरे पर, असलियत सामने आ जाएगी
..very nice lines..thanks for posting..

उस्ताद जी ने कहा…

4.5/10

रचना के माध्यम से सुन्दर सन्देश
भाव अच्छे लगे
"सब में केवल "खुदा" को देखो,
तुम्हें खुदाई मिल जाएगी"

Rahul Singh ने कहा…

अस्मिता और अपनी पहचान की सार्थक अभिव्‍यक्ति.

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

केवल भाई, बहुत गहरी सीख दी है आपने, शुक्रिया।

---------
त्रिया चरित्र : मीनू खरे
संगीत ने तोड़ दी भाषा की ज़ंजीरें।

Kajal Kumar ने कहा…

वाह भई केवल जी बल्ले बल्ले

Dr. shyam gupta ने कहा…

--इन्दु पुरी जी ने क्या सटीक कहा है, वही घिसी-पिटी टिप्पणियां---खैर...


"""मैं देता हूँ नसीहत तुमको, खुद को "खुदा" बनाने की
सब में केवल "खुदा" को देखो, तुम्हें खुदाई मिल जाएगी---"’ बहुत सही कहा--

--" रांझा-रांझा करदे-करदे आपुहि रांझा होई..."

himdhara ने कहा…

nice vist himachali.himdhara.in
himdhara.feedcluster.com

himdhara.blogspot.com

Patali-The-Village ने कहा…

सुन्दर दिल के सुन्दर विचार |बहुत प्रेरक अभिव्यक्ति|

seema gupta ने कहा…

दुनिया के लिए कुछ न कर सको तो इतना कर देना
तुम्हारी निष्काम दुआ, किसी के चेहरे को मुस्काएगी
"बेहद सुन्दर सार्थक संदेश शुभकामनाये"
regards

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

मैं देता हूँ नसीहत तुमको, खुद को "खुदा" बनाने की
सब में केवल "खुदा" को देखो, तुम्हें खुदाई मिल जाएगी
...प्यारी नसीहत।

सतीश सक्सेना ने कहा…

वा वाह...वा वाह ...
शुभकामनायें केवल राम !

सोमेश सक्सेना ने कहा…

बहुत खूब। अच्छी रचना है। बधाईयाँ....

मेरी नए पोस्ट पर एक नज़र जरूर डलिएगा।
डॉक्टर की दुकान में ग्राहकों की भीड़

दीप ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति
बहुत - बहुत शुभकामना

क्रिएटिव मंच-Creative Manch ने कहा…

बहुत बढ़िया गजल है |
पसंद आई
आभार



क्रिएटिव मंच पर नए आयोजन
'सी.एम.ऑडियो क्विज़' में आपका स्वागत है.
यह आयोजन कल रविवार, 12 दिसंबर, प्रातः 10 बजे से शुरू हो रहा है .
आप का सहयोग हमारा उत्साह वर्धन करेगा.
सधन्यवाद

बेनामी ने कहा…

खुदा का नायाब तोहफा हो तुम दुनिया के लिए
दुःख दुनिया को देने से,कीमत तुम्हारी कम हो जाएगी

बहुत सुंदर भावनाएं ...जीवन को ही अभिव्यक्त कर दिया आपने .....बहुत खूब

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

सब में केवल "खुदा" को देखो, तुम्हें खुदाई मिल जाएगी
बहुत उत्तम रचना । बधाई...

Anjana (Gudia) ने कहा…

ati sunder!!! badhai!

बेनामी ने कहा…

Ati umda gajal ....Sunder bhavon ka sampreshan

Anupriya ने कहा…

मैं देता हूँ नसीहत तुमको, खुद को "खुदा" बनाने की
सब में केवल "खुदा" को देखो, तुम्हें खुदाई मिल जाएगी
well said...

संतोष कुमार ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
संतोष कुमार ने कहा…

बहुत सुंदर ग़ज़ल और बहुत सुंदर भाव !
एक सुंदर ग़ज़ल पढवाने के लिए शुक्रिया !!

Dr.Sushila Gupta ने कहा…

Aadarneeya Ramji
bahut hi sunadar rachana hai.........

apki har baat me sachee aur prerana hoti hai.gar hum inme se kuch bhi anusaran kar paae to samaj ki isthiti hi badal jaae. thanks.

Dr.Sushila Gupta ने कहा…

आदरणीय रामजी
बहुत ही सुन्दर रचना है . ........

आपकी हर बात में सची और प्रेरणा होती है . गर हम इनमे से कुछ भी अनुसरण कर पाए तो समाज की इस्थिति ही बदल जाए . धन्यवाद् .

shilpa mehta ने कहा…

bahut hi sundar - yah to ek nayaaa aayam dekh rahi hoon :)