07 नवंबर 2010

अस्तित्व

जब भी देखता हूँ
आकाश की तरफ
मेरी कल्पना की सीमा से परे ....!
मेरे सपनों का संसार
चाँद तारों में नजर आता है ।

चमकते चाँद में
जीवन का सार,
उभर आता है ..निखर आता है
तारों की टिमटिमाहट में
ख्वाबों की बुनाबट में
एक तारा टूटते , मेरा घर लूटते हुए ,
यादों के मंजर में
अपनों का संसार
बिखर जाता है , टूट जाता है ।


चाँद भी आकाश में
सदा नहीं चमकता ,
कभी पूर्ण प्रकाश , कभी नहीं दिखता...!

जिन्दगी के इस खेल में
अपने- परायों के मेल ,
अजनबी सा अपनापन
कुछ ठहरा सा खालीपन
यादों की उलझन .....!
सब कुछ सोचने के बाद
कुछ पाने -कुछ खोने के बाद
मुझे मेरा अस्तित्व याद आता है ।

21 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर कविता और शानदार भावनात्मक अभिव्यक्ति......

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  2. बहुत सुंदर और प्रेरक रचना। नाव जल में रहे लेकिन जल नाव में नहीं रहना चाहिये, इसी प्रकार साधक जग में रहे लेकिन जग साधक के मन में नहीं रहना चाहिये।

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  3. बहुत सुन्दर भावनात्मक अभिव्यक्ति..

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  4. अपने- परायों के मेल ,
    अजनबी सा अपनापन
    कुछ ठहरा सा खालीपन
    यादों की उलझन .....!
    सब कुछ सोचने के बाद
    कुछ पाने -कुछ खोने के बाद
    मुझे मेरा अस्तित्व याद आता है ।

    यही तो जिंदगी का खेल है.... सही कहा आपने.... सुंदर अभिव्यक्ति

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  5. बेहद शानदार प्रस्तुति।

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  6. बहुत सुन्दर कविता और शानदार भावनात्मक अभिव्यक्ति|

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  7. आपको और आपके परिवार को दिवाली की हार्दिक शुभकामनायें !
    आपकी टिपण्णी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया!
    बहुत सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ आपने लाजवाब रचना लिखा है जो काबिले तारिफ़ है! बधाई!

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  8. 3/10

    रचना प्रभावित नहीं करती क्योंकि दिल तक पहुचती ही नहीं. चाँद और तारों के साथ जीवन का तादम्य स्थापित करने की चेष्टा सफल नहीं हुयी.

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  9. भैया केवल राम जी,
    कई जगह मैंने देखा की टिप्पणियाँ लिखते समय आप शेर को शेयर लिखते हो ,अच्छा नहीं लगता.
    दोनों शब्द एकदम अलग अलग मतलब वाले हैं.

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  10. अपने- परायों के मेल ,
    अजनबी सा अपनापन
    कुछ ठहरा सा खालीपन
    यादों की उलझन .....!
    सब कुछ सोचने के बाद
    कुछ पाने -कुछ खोने के बाद
    मुझे मेरा अस्तित्व याद आता है ।
    ......इसी का नाम जीवन है ... न जाने कितने उतार चढाव से गुजरना पड़ता है ...
    बहुत सुन्दर भावनात्मक अभिव्यक्ति.....

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  11. सराहनीय लेखन....हेतु बधाइयाँ...ऽ. ऽ.
    ==========================
    नए दौर में ये इजाफ़ा हुआ है।
    जो बोरा कभी था लिफ़ाफ़ा हुआ है॥
    जिन्हें शौक है थूकने - चाटने का
    वो कहते हैं इससे मुनाफ़ा हुआ है॥
    सद्भावी-डॉ० डंडा लखनवी
    =========================

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  12. सुन्दर अभिव्यक्ति... इसी को जीवन कहते हैं ...

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  13. जिन्दगी के इस खेल में
    अपने- परायों के मेल ,
    अजनबी सा अपनापन
    कुछ ठहरा सा खालीपन
    यादों की उलझन .....!
    सब कुछ सोचने के बाद
    कुछ पाने -कुछ खोने के बाद
    मुझे मेरा अस्तित्व याद आता है ।

    जीवन की यही कशमकश हमेशा लिखने को उकसाती है। और भाव शब्द बन कर बह जाते हैं जीवन के भावों की सुन्दर अभिव्यक्ति।

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  14. अस्तित्व बोध ही बड़ी बात है।

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  15. बहुत ही सुन्दर कविता.

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  16. जिंदगी सचमुच में खोने पाने का ही नाम है. सुंदर अभिव्यक्ति. आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

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  17. 'चाँद भी आकाश में
    सदा नहीं चमकता '

    बहुत खूब!
    अच्छी कविता है .'स्व अस्तित्व गाहे बगाहे अपनी याद दिलाता रहता है.

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  18. जिन्दगी के इस खेल में
    अपने- परायों के मेल ,
    अजनबी सा अपनापन
    कुछ ठहरा सा खालीपन
    यादों की उलझन .....!
    सब कुछ सोचने के बाद
    कुछ पाने -कुछ खोने के बाद
    मुझे मेरा अस्तित्व याद आता है ।

    बहुत सुन्दर भावनात्मक अभिव्यक्ति.....यथार्थवादी चिंतन...अस्तित्व.........

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जब भी आप आओ , मुझे सुझाब जरुर दो.
कुछ कह कर बात ऐसी,मुझे ख्वाब जरुर दो.
ताकि मैं आगे बढ सकूँ........केवल राम.