28 जनवरी 2017

वर्ष 2017, सोशल मीडिया और अभिव्यक्ति की आजादी...3

गत अंक से आगे....w.w.w. के विकास के साथ ही विभिन्न प्रकार के जाल स्थल भी अस्तित्व में आने लगे. एक तरफ जहाँ विभिन्न देशों की सरकारें और संगठन अपनी गतिविधियों को विभिन्न जाल स्थलों के माध्यम से आम जन तक पहुँचाने का प्रयास करने लगे, वहीँ दूसरी और कुछ ऐसे जाल स्थल भी अस्तित्व में भी आये, जिनके माध्यम से आम व्यक्ति भी अपनी भावनाओं को एक दूसरे के साथ सांझा करने लगे. जिस समय w.w.w. अस्तित्व में आया था उस समय किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि आने वाले वर्षों में किस तरह से यह माध्यम पूरी दुनिया को अपनी गिरफ्त में ले लेगा. 20वीं शताब्दी के अन्तिम दशक में विभिन्न व्यक्तिगत और सामूहिक जाल स्थल अस्तित्व  में आये और इनके माध्यम से पूरी दुनिया के लोग सूचना-क्रान्ति का हिस्सा हो गए. 21वीं सदी का पहला दशक जहाँ अभिव्यक्ति के विभिन्न माध्यमों की के अस्तित्व और प्रचलन में आने का दशक है, वहीँ इन माध्यमों ने 21वीं सदी के दूसरे दशक में वैकल्पिक मीडिया का रूप धारण कर लिया है.
आज जिन माध्यमों को हम सोशल मीडिया के रूप में अभिहित करते हैं, वह अभी चंद वर्ष पहले ही अस्तित्व में आये हैं. यहाँ हम सोशल मीडिया के सिर्फ चुनिन्दा और प्रचलित जाल स्थलों के विषय में ही बात करेंगे, जिनमें ब्लॉग, फेसबुक, यूट्यूब और ट्विटर प्रमुख हैं. इन्टरनेट पर किसी विषय को लेकर लिखने की शुरुआत 1994 में ऑनलाइन डायरी के रूप में हुई, इसके बाद ब्लॉग अस्तित्व में आया. ब्लॉग के अस्तित्व में आने के साथ ही अभिव्यक्ति की आजादी को एक नया आयाम मिला. अब तक जिस अभिव्यक्ति को हम प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से प्रचारित कर रहे थे, उसे अंतर्जाल पर एक व्यवस्थित स्थान ब्लॉग के रूप में मिला. ब्लॉग के अस्तित्व में आने के साथ ही पूरी दुनिया में अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर एक नयी बहस छिड़ गयी. दुनिया के अनेक पत्रकार, शिक्षक, चिन्तक, बुद्धिजीवी और यहाँ तक कि सामान्य नागरिक भी ब्लॉग के माध्यम से अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति देने का प्रयास करने लगे. देखते ही देखते अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर छिड़ी इस बहस में दुनिया के तमाम देशों की सरकारों ने भी ध्यान देना शुरू कर दिया. ब्लॉग को अनेक तरह से नियंत्रित करने के प्रयास किये जाने लगे. ब्लॉग की विषय-वस्तु पर निगरानी के लिए कुछ विशेष प्रयास करने की तरफ भी ध्यान दिया जाने लगा. लेकिन जो ऐसा प्रयास कर रहे थे उन्हें आशातीत सफलता प्राप्त नहीं हो सकी. ब्लॉग निरंतर विकास करता गया और अभिव्यक्ति की आजादी के क्षेत्र में अपनी एक विशेष पहचान बनाने में कामयाब रहा.
ब्लॉग लिखने के लिए आज भी अनेक ऐसे स्थान हैं जो मुफ्त में अपनी सेवायें प्रयोक्ताओं को उपलब्ध करवाते हैं. जिनमें ब्लॉगर, वर्डप्रेस, लाइवजर्नल, टम्बलर आदि का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है. इन जाल स्थानों पर पर कोई भी व्यक्ति अपना खाता बनाकर अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त कर सकता है. इतना ही नहीं इन माध्यमों पर लिखी गयी बात का दायरा वैश्विक है, इसलिए कोई भी स्थानीय घटना अपनी प्रासंगिकता के हिसाब से वैश्विक रूप ले लेती है. इसे एक तरह से हम सूचनाओं का लोकतंत्रीकरण और घटना का वैश्वीकरण कह सकते हैं. ब्लॉग और वेबसाइट ने अभिव्यक्ति और सूचना के प्रस्तुतीकरण को एक नया रूप प्रदान किया, जिससे पाठक के मन में उसे जानने की जिज्ञासा हमेशा बनी रहने लगी और इससे कई ऐसे ब्लॉग और ब्लॉगर अस्तित्व में आये जो आज किसी एक स्थानीय सूचना या घटना को सुदूर किसी गाँव से किसी उन्नत शहर में चर्चा का विषय बनाते थे. इसके साथ ही ब्लॉग ने सामयिक घटनाओं के विश्लेषण को भी कई अर्थों में नए आयाम दिए. किसी एक राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय मसले पर राय के लिए जब हम सिर्फ अखबार और पत्र-पत्रिकाओं पर निर्भर रहते थे, अब ब्लॉग के आने से उन मसलों के वह पहलू भी सामने आने लगे जो आज तक पाठक की नजर में नहीं आ पाते थे. इसलिए ब्लॉग को सही मायने में अभिव्यक्ति की नयी क्रान्ति के नाम से अभिहित किया जा सकता है.
ब्लॉग के साथ ही फेसबुक-यूट्यूब और ट्विटर ने भी अभिव्यक्ति के स्वरुप को बदलने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है. आज विश्व में फेसबुक एक तरह से लोगों के जीवन का अहम् हिस्सा बन चुका है. 30 जून 2016 तक विश्व की कुल आबादी में से 22.8% फेसबुक का प्रयोग करते थे. यह संख्या निरन्तर बढ़ रही है. भारत जैसे देश में फेसबुक का प्रयोग करने वालों की संख्या विश्व में सबसे अधिक है. भारत में लगभग (195.16 लाख) दो करोड़ लोग फेसबुक पर प्रयोग करते हैं, और अमरीका में फेसबुक का प्रयोग करने वालों की संख्या (191.03 लाख) है. इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह से दुनिया की अधिकतर जनसंख्या फेसबुक का प्रयोग करने की तरफ बढ़ रही है. हालाँकि यह तथ्य भी गौर करने योग्य है कि अधिकतर युवा लोग ही इन माध्यमों पर सक्रिय हैं और वह भी इन माध्यमों का प्रयोग किसी गम्भीर बहस और विमर्श के बजाय अपने निजी हितों की पूर्ति के लिए करते हैं. लेकिन फिर भी वह देश और दुनिया की हलचलों से वाकिफ रहते हैं और समय-समय पर अपनी राय जाहिर भी करते रहते हैं. यह भी एक पहलू है कि दुनिया की राजनीति को अब सोशल मीडिया के माध्यम से धार दी जाने लगी है. व्यापार और कारोबार की अधिकतर सफल कहानियों में सोशल मीडिया की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. हालाँकि इस दिशा में यह माध्यम अभी अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रहा है, लेकिन निकट भविष्य में ऐसी सम्भावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि पूरे विश्ब में विज्ञापन की दुनिया का अधिकतर हिस्सा सोशल मीडिया पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाएगा.
फेसबुक और अलावा जिन दो माध्यमों ने लोगों के ध्यान को अपनी और आकर्षित किया है उनमें यूट्यूब और ट्विटर का नाम लिया जा सकता है. पिछले कुछ वर्षों में यूट्यूब ने वीडियो की दुनिया में अपना एक नया मुकाम पेश किया है. जो लोग आवाज के धनी है और थोड़ी सी तकनीकी जानकारी रखते हैं वह अपनी भावनाओं को वीडियो के माध्यम से लोगों तक बहुत सुगमता से पहुंचा सकते हैं. आज ऐसे कई यूट्यूब चैनल इस माध्यम पर उपलब्ध हैं जिनके माध्यम से लोगों को अपनी रोजमर्रा की जिन्दगी के बहुत महत्वपूर्ण जानकारी मिल जाती है. यूट्यूब ने अपने आप को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के समानांतर खुद को पेश करने की कोशिश की है, कुछ स्वतंत्र सोच वाले व्यक्ति इस माध्यम से भी अपने विचारों को आम जनता तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं और लोग उनके इन प्रयासों को सराह भी रहे हैं. ऐसे में हम यह समझ सकते हैं कि इन्टरनेट के आने से अभिव्यक्ति के क्षेत्र में तमाम बदलाब हुए हैं और हम उन बदलावों के साथ चलते हुए दुनिया को एक नयी राह दिखा रहे हैं. शेष अगले अंक में...!!! 

2 टिप्‍पणियां:

  1. जारी रखें सुन्दर प्रस्तुति।

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, "शेर ए पंजाब की १५२ वीं जयंती - ब्लॉग बुलेटिन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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जब भी आप आओ , मुझे सुझाब जरुर दो.
कुछ कह कर बात ऐसी,मुझे ख्वाब जरुर दो.
ताकि मैं आगे बढ सकूँ........केवल राम.