27 अप्रैल 2014

सृजन की प्राथमिकता, ब्लॉगिंग और हम...6

ब्लॉग को हम कोई कमतर माध्यम न समझें, अगर ब्लॉग के विषय में हमारी समझ ऐसी है तो हमें अपने मंतव्य पर पुनर्विचार की आवश्यकता है. गतांक से आगे......इस बात में कोई दो राय नहीं कि आज के सन्दर्भ में ब्लॉग अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त माध्यम है, इसके माध्यम से हम अपनी अभिव्यक्ति को वह विस्तार दे सकते हैं जो हम किसी और माध्यम से कल्पना भी नहीं कर सकते. इसके साथ-साथ ब्लॉग पर लिखी गयी सामग्री को हम विशेष सन्दर्भ के साथ उल्लेख करते हुए उसे और आकर्षक प्रस्तुति देते हुए पाठक का ध्यान उस और आकृष्ट कर सकते हैं. हमारे पास अपने लिखे हुए को प्रचारित करने के अनेक तरीके हैं. लेकिन प्रचार से ज्यादा महत्वपूर्ण है सामग्री की गुणवता को बनाये रखना. अगर हम अपने ब्लॉग पर सामग्री की गुणवता को बनाये रखते हैं तो फिर कोई ख़ास बजह नहीं कि हम अपने लेखन में किसी मुकाम को हासिल न कर पायें. हमें अपने सृजन में हर हाल में ब्लॉग पर प्रस्तुत की गयी सामग्री की गुणवता को बनाये रखना है.
इसके साथ ही बेहतर यह भी होगा कि हम नीश ब्लॉगिंग की तरफ बढ़ें. अगर हम ऐसा करने में सक्षम हो पाते हैं तो फिर पाठक हमें एक विशेषज्ञ की नजर से देखेगा. हमें पाठक को अपने किसी विषय पर विशेषज्ञ होने का अहसास करवाना है या नहीं, यह महत्वपूर्ण नहीं है. हम पाठक के लिए उस खास विषय पर एक नयी दृष्टि लेकर आयें, किसी एक बिन्दु पर नया और प्रासंगिक दृष्टिकोण लेकर आयें तो हमें फिर कुछ और कहने की आवश्यकता नहीं है. क्योँकि ऐसा तो है नहीं कि नवीनता के नाम हम कोई बिलकुल नई विधा लेकर यहाँ अवतरित हों, या फिर हम बिलकुल कोई नया विषय लेकर पाठक के सामने रख दें, यह तो काफी हद तक हर व्यक्ति की पहुँच से बाहर है, लेकिन हम जिस भी विषय को लेकर आगे बढ़ रहे हैं वहां हमारी मौलिक सोच प्रकट होनी चाहिए. अगर हम ऐसा करने में सक्षम हो पाते हैं तो पाठक खुद व खुद हमारी तरफ आकृष्ट होता चला आयेगा.
हिंदी ब्लॉगिंग के क्षेत्र में अभी हमें नीश ब्लॉगिंग की तरफ बढना बाकी है. ऐसा नहीं है कि यहाँ ऐसे ब्लॉग
नहीं हैं जिन्हें नीश ब्लॉग कहा जा सके, यहाँ ऐसे ब्लॉगस तो हैं लेकिन उनकी संख्या बहुत कम है. आदरणीय ललित कुमार जी ने ब्लॉग के विषय में कुछ मानकों को निर्धारित करते हुए बेहतर ब्लॉगस को तलाशने का बीड़ा उठाया है. इनके अनुभव और निष्कर्ष ने कुछ बेहतरीन हिन्दी ब्लॉगस को हमारे सामने रखा भी है. हालाँकि कोई ब्लॉग किस श्रेणी का है यह बहुत बड़ा मुद्दा नहीं है, लेकिन अगर हम किसी विशेष भाव क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान हासिल करना चाहते हैं तो उसके लिए हमें उसी तरह से अपने को प्रस्तुत करना होगा. हिंदी ब्लॉगिंग में हम ऐसे कई ब्लॉगस को देख सकते हैं. जैसे शब्दों का सफ़र, हुंकार, समाजवादी जन परिषद्, सिंहावलोकन, मीडिया डॉक्टर, समय के साए में, जनपक्ष, मुसाफिर हूँ यारो, साइंटिफिक वर्ल्ड, स्वाद का सफ़र, पढ़ते-पढ़ते, रेडियोवाणी, हिन्दी ब्लॉग टिप्स आदि. ऐसे ब्लॉगस की सूची मेरे पास बहुत लम्बी है, लेकिन यहाँ सिर्फ इन ब्लॉगस के नाम सिर्फ उदाहरण स्वरूप पेश कर रहा हूँ. हम सहज में ही किसी विषय आधारित सामग्री की खोज के लिए इन ब्लॉगस का सहारा ले सकते हैं. लेकिन अगर यहाँ भी किसी प्रकार के तथ्य की पुष्टि में अगर कोई कमी होती है तो इसका दूसरा असर भी हम पर हो सकता है.
ब्लॉग के माध्यम से हम अपने नवीन दृष्टिकोण को सामने लाने का बेहतर प्रयास कर सकते हैं. कुछ लोगों का यह मत भी है कि ब्लॉग पर गंभीर लेखन का कोई खास मतलब नहीं होता. यहाँ तो सिर्फ टिप्पणी और पोस्ट का ही खेल है, और इसके लिए आपको अपनी पोस्ट को टिप्पणी के अनुकूल बनाना है, और टिप्पणियों के इस चक्कर में कुछ महानुभाव अपने लेखन का स्तर तक गिरा देते हैं. लेकिन जहाँ तक मैंने महसूस किया है कि ब्लॉगिंग के इन षटकर्मों में टिप्पणी एक पड़ाव है. अगर हमें सार्थक ब्लॉगिंग करनी है तो फिर हमें टिप्पणी के मोह से बचने की कोशिश करनी चाहिए. हाँ टिप्पणियाँ हमें नवीन जानकारी जानकारी भी दे सकती हैं, और प्रोत्साहन तो हमें मिलता ही हैं. लेकिन अगर हर आलेख पर हम बहुत सुन्दर, वाह और आह के साथ बहुत खूब जैसे शब्दों को ही टिप्पणी के रूप में पाएं तो हमारा टिप्पणी के प्रति मोह कुछ दिन में ही कम हो जाएगा. हम टिप्पणी की चाहत रखें, लेकिन लेखन को सतही बनाने की कीमत पर नहीं.
जहाँ तक ब्लॉग पर गंभीर और शोधपूर्ण लेखन का सवाल है तो हमें इस बात को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए कि श्रेष्ठ लेखन ही हमें एक नयी पहचान दिला सकता है. इस सन्दर्भ में हमें शब्दों का सफ़र ब्लॉग को एक मानक ब्लॉग के रूप में लेना चाहिए. हिन्दी में रचे गए इस ब्लॉग ने शब्दों का जो ताना बाना हमारे सामने प्रस्तुत किया है वह हमें शब्द के विषय में गहन जानकारियाँ देने में बहुत मदद करता है. शब्दों का इतिहास, भूगोल, विभिन्न भाषाओँ में उनका शब्द रूप और उनका अर्थ सब कुछ हमें एक क्रम में यहाँ मिलता है. अपने अनुभव के आधार पर कहूँ तो इस ब्लॉग ने शब्दों के प्रति मुझमें एक दीवानगी पैदा की है, और शब्दों को समझने में मेरी दृष्टि को व्यापक रूप से प्रभावित किया है.
यह जरुरी नहीं कि हम सिर्फ गद्य में ही रचनाएँ करके आगे बढ़ सकते हैं. पद्य और गद्य जिसमें भी हम अपने को सहज रूप में प्रस्तुत कर सकें उसके माध्यम से हम अपने भावों को अभिव्यक्त कर सकते हैं. लेकिन चाहे हम सृजनात्मक साहित्य रच रहे हैं या वैचारिक अभिव्यक्ति कर रहे हैं, दोनों में हमें अभिव्यक्ति और तथ्यों के प्रति सजग रहना होगा. अगर हम नयी दृष्टि और समयानुकूल परिप्रेक्ष्य में अपने सृजन को प्रस्तुत कर पाते हैं तो यह हमारे सृजन की बहुत बड़ी उपलब्धि होगी. ब्लॉग पर सृजन के विषय में समग्र रूप से यह कहा जा सकता है कि यहाँ सृजन की अनंत संभावनाएं हैं और यह तकनीक और अभिव्यक्ति का ऐसा ताना-बाना है जिसके माध्यम से हम समाज की तस्वीर को बदलने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. इसके साथ ही हिन्दी जैसी भाषा को हम तकनीक की भाषा के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

5 टिप्‍पणियां:

Ajay Kumar ने कहा…

बिलकुल सही भाई जी !!!

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

विचारों की अभिव्यक्ति के साथ ही हिन्दीं के लिए भी ब्लॉगिंग प्रभावी सिद्ध हो सकती है ..... सुन्दर चिंतन

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

ब्लोगिंग के लिए आपका आंकलन बहुत अच्छा और सार्थक है .....


हम भी बस लिखते हैं भले ही कविता ....अपने मन के भाव ...अब इसे ब्लोगिंग कहेंगे या कुछ और ...इसके लिए कभी सोचा नहीं ....और टिप्पणी मिली या नहीं मिली ये कभी देखा नहीं

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…



☆★☆★☆



टिप्पणियां महत्व तो रखती हैं
महत्वपूर्ण लेख !

"सृजन की प्राथमिकता, ब्लॉगिंग और हम..."
शृंखला बहुत अच्छी चल रही है ,
आदरणीय केवल राम जी

पिछली एक-दो कड़ियां अभी देखूंगा

मंगलकामनाओं सहित...
-राजेन्द्र स्वर्णकार


रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

मगर आप तो ब्लॉगरों को नेस्तनाबूद करने पर तुले हो।