25 अप्रैल 2013

मात्र देह नहीं है नारी...1

पिछले कुछ अरसे से नारी शब्द एक तरह से बहस का मुद्दा बना हुआ है. सड़क से संसद तक इस मुद्दे पर चर्चाएँ होती रही हैं. अख़बारों के प्रत्येक पृष्ठ पर उसकी दास्तान अभिव्यक्त की जा रही है और समाचार चैनल बहुत कलात्मक और रहस्यमयी ढंग से उसके जीवन की कहानी को लोगों को दिखा रहे हैं. न्यू मीडिया के जितने भी साधन है वहां भी हर तरह से नारी शब्द गूंज रहा है. इतना ही नहीं कुछ धार्मिक और सामाजिक संगठन भी नारी के लिए चिन्तनशील हैं. देश ही नहीं विश्व के हर हिस्से में यह सब अभिव्यक्त किया जा रहा है और एक तरह से नया वातावरण और नयी बहस, यूं भी कहा जा सकता है एक नया आन्दोलन हमारे सामने शुरू होता नजर आ रहा है . लेकिन इस सब के पीछे की जो कहानी है वह बड़ी करुण है, बहुत दर्दनाक है, काफी खौफनाक है और हद तो ऐसी है कि इस कहानी को सुनकर देखकर ऐसा लगता है कि इस चमकती-दमकती दुनिया का क्या होगा ???

इस नारी की दास्तान भी बड़ी अजीब है. दुनिया के इतिहास में अगर कुछ कालखंड को छोड़ दें तो इसकी
स्थिति बड़ी दयनीय नजर आती है. आज तक इसे भोग और विलास की वस्तु ही समझा जाता रहा है, और ऐसा प्रयास हर कालखंड में किया जाता रहा है कि इसे स्वतन्त्र सत्ता कभी नहीं दी जाए. पुरषों की स्वयं के श्रेष्ठ होने की सोच ने इसके सामने कई चुनौतियां पैदा की हैं और आज तक नारी उन सब चुनौतियों का का सामना करती आ रही है. काल कोई भी रहा हो, शासन कैसा भी रहा हो,  राजा से रंक तक हर पुरुष ने नारी की स्वतंत्रता को लेकर प्रश्नचिन्ह खड़े किये हैं और आज तक भी वही किया जा रहा है. दुनिया में काफी भौतिक विकास हुआ, आदमी ने सूरज-चाँद तक जाने की कल्पना की और वह अपने मंतव्यों में सफल भी हुआ, लेकिन अफ़सोस इस बात का रहा कि उसे धरती पर ठीक से चलना अभी तक नहीं आया. दुनिया का उपलब्ध इतिहास यह जानकारी देता है कि आज तक मानव का इतिहास ज्यादातर शोषण और अत्याचार का रहा है. ऐसा कोई कालखंड नहीं जिसमें कोई युद्ध नहीं हुआ हो. अब अगर युद्ध हुआ है तो निश्चित रूप से जानमाल की भरपूर क्षति हुई है और उस कालखंड में तो उसका प्रभाव रहा है लेकिन आने वाली पीढ़ियों के भी वह खौफनाक बना रहा है, और इस सबका दंश कुछ ऐसे लोग भी झेलते हैं जिनको इन सबसे कुछ लेना देना नहीं. लेकिन फिर भी यह सब घटित हो रहा है और संभवतः होता रहेगा.

दुनिया की इस व्यवस्था पर अगर हम दृष्टिपात करें तो हर एक का किसी दूसरे से अन्योन्यश्रित सम्बन्ध है. यह भी महसूस किया जा सकता है कि हम एक दूसरे से गहरा ताल्ल्लुक रखते हैं. जितनी भी प्रकृति है इसका प्रत्येक कण हमारे साथ जुड़ा हुआ है  और यह स्वीकार करने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए कि मनुष्य भी प्रकृति का ही अंश है. जिस तरह से पशु-पक्षी, पेड़-पौधे प्रकृति का अंग हैं उसी तरह से मनुष्य भी प्रकृति का हिस्सा है, लेकिन फिर भी कुछ मायनों में मनुष्य अद्भुत है, श्रेष्ठ है. जिसके कारण इसे धरती पर सबसे बड़ा स्थान प्राप्त है. एक तरफ तो मनुष्य श्रेष्ठ है, यह बात समझ में आती है लेकिन इसी मनुष्य ने धरती के हर बशर का जिन दूभर किया है यह समझ से परे है. जितना प्राकृतिक दोहन मनुष्य करता है उतना शायद ही कोई करता हो, लेकिन मनुष्य की भूख है कि मिटने का नाम ही नहीं लेती और आज स्थिति ऐसी है कि सब कुछ होते हुए भी वह भूखा का भूखा ही नजर आता है. इस भूख में इसकी काम की भूख भी सर्वश्रेष्ठ है. काम की इस भूख ने उसके जीवन पर विपरीत असर किया है और आज ऐसी स्थिति पैदा की है कि मनुष्य के सामने जीवन का कोई और विकल्प नजर नहीं आता. उसकी काम की भूख ने उसे जानवर से भी बदतर स्थिति में पहुंचा दिया है और आज हालत तो इतने दर्दनाक हैं कि जिसका कोई अंदाजा नहीं ???

आज अगर हम देखें तो दुनिया सतही तौर पर विकास के रास्ते पर अग्रसर है. दुनिया में बड़े - बड़े उद्योग स्थापित हो रहे हैं, चौड़ी सड़कें बनायीं जा रही हैं, सूचना तकनीक के साधनों का अभूतपूर्व विकास किया जा रहा है. लेकिन इतना सब कुछ होने के बाबजूद भी मानव की सोच और समझ निरंतर गिरती जा रही है और उसकी के परिणाम स्वरूप दुनिया में भ्रष्टाचार तेजी से फ़ैल रहा है और हर व्यक्ति इसकी गिरफ्त में आता जा रहा है. अगर यही स्थिति रही तो भविष्य की दुनिया कैसी होगी यह तो कल्पना से परे है. हम चाह तो रहे हैं कि दुनिया का स्वरूप सुंदर हो जाये, मनुष्य-मनुष्य के ज्यादा करीब आ जाये, लेकिन असर इसके विपरीत हो रहे हैं और परिणाम बेहद खौफनाक है. जिस तरह की घटनाएं आज के परिवेश में घटित हो रहीं हैं वह तो हमारे मनुष्य होने पर ही प्रश्नचिन्ह खड़े करती हैं. ऐसी स्थिति में हमारा क्या कर्तव्य है यह तो हमें ही सोचना होगा ??? आज जिस परिवेश में हम जी रहे हैं वह हमें हमारे पूर्वजों की देन है और आने वाली पीढियां जिस परिवेश में अपना जीवन यापन करेंगी वह उन्हें हमारी देन होगी. आज हम अपने अतीत पर बहुत गौरवान्वित होते हैं, यह तो ठीक है लेकिन क्या आने वाली पीढियां ऐसा कर पाएंगी यह सबसे बड़ा मुद्दा है ?? शेष अगले अंकों में

15 टिप्‍पणियां:

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

विकास की यह कीमत तो बहुत भारी है ..... समसामयिक चिंतन जो समग्र समाज के लिए विचारणीय है |

संध्या शर्मा ने कहा…

भौतिक विकास के साथ मानव का नैतिक और मानसिक पतन जिस तेजी से हो रहा है, देश, समाज और भविष्य के लिए बड़ी चिंता का विषय है...विचारणीय आलेख

Anupama Tripathi ने कहा…

आज जिस परिवेश में हम जी रहे हैं वह हमें हमारे पूर्वजों की देन है और आने वाली पीढियां जिस परिवेश में अपना जीवन यापन करेंगी वह उन्हें हमारी देन होगी . आज हम अपने अतीत पर बहुत गौरवान्वित होते हैं , यह तो ठीक है लेकिन क्या आने वाली पीढियां ऐसा कर पाएंगी यह सबसे बड़ा मुद्दा है ?

बहुत सार्थक बात कही है आपने ...!!विकास के साथ ही अपना ''आज ''हमें सुशोभित करना है ,ताकि कल वो गर्व का कारण बने ...!!

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

सही, सार्थक लेख

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

''नारी को मात्र देह''समझने वालो को आने वाले वक्त में इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है

कुछ गन्दी मानसिकता वाले पुरुषों की वजह से आज सम्पूर्ण समाज लज्जित है|अपने आप को सभ्य समाज का हिस्सा समझने वाले खुद के आस-पास एक दूषित वातावरण का निर्माण कर रहें है जिसके लिए उन्हें आने वाले वक्त में इसका मोल चुकाना पड़ेगा |

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

bhautik vikas me bahut kuchh peechhe chhut raha hai...

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

जिन संस्कृतियों में नारी का मान नहीं रहा है, उन संस्कृतियों को मान न मिले।

vandana gupta ने कहा…

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार (27 -4-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
सूचनार्थ!

सुज्ञ ने कहा…

सुंदर चिंतन!!

संजय भास्‍कर ने कहा…

'नारी को मात्र देह'
जो लोग नारी को केवल ....नारी को मात्र देह समझते है वो कुछ गन्दी मानसिकता वाले पुरुष है जिनकी वजह से सम्पूर्ण समाज को लज्जित होना पड़ता है नारी का मान हमारे लिए गर्व की बात होनी चाहिए !

Nidhi Tandon ने कहा…

सार्थक लेख...

वाणी गीत ने कहा…

आधुनिक होते हुए भी हमारी पीढियां कही बहुत दकियानूसी ही रही , नारी देह के मामले में !
सार्थक मंथन !

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

isa aalekh se bhavishya men bahut achchhi sambhavanayen dekh rahi hoon. sateek prastuti ke liye aabhar !

एस.एम.मासूम ने कहा…

मात्र देह नहीं है नारी" यह बात सबसे पहले नारी को खुद समझनी होगी |

Lekhika 'Pari M Shlok' ने कहा…

सत्य और सार्थक लेख !