15 दिसंबर 2012

हो तुम


जीवन पथ में, मैं अकेला /  साथी हो तुम
मंजिल को पाने मैं  निकला / साहिल हो तुम
मेरे हृदय में उठती करुणा / आंसू हो तुम
हर शै पर चमकने वाला / सितारा हो तुम .

 
जीवन और जगत में / चेतना हो तुम
सोच और कल्पना से परे / ऐसा रहस्य हो तुम 
सुख और आनंद के बीच  / सच्चिदानंद हो तुम
दृश्यमान सत्ता की / वास्तविक सत्ता हो तुम .

लिखता हूँ कविता मैं / भाव हो तुम
संजोता हूँ शब्द मैं / अर्थ हो तुम
क्या कहता हूँ , कैसे कहता हूँ / शैली हो तुम
मेरे अधरों पर अंतिम / ' केवल ' शब्द हो तुम .

21 टिप्‍पणियां:

Kulwant Happy ने कहा…

Nice

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना

Anupama Tripathi ने कहा…

सुंदर भाव और सुंदर अभिव्यक्ति ....

सदा ने कहा…

लिखता हूँ कविता मैं / भाव हो तुम
संजोता हूँ शब्द मैं / अर्थ हो तुम
क्या कहता हूँ , कैसे कहता हूँ / शैली हो तुम
मेरे अधरों पर अंतिम / ' केवल ' शब्द हो तुम .
वाह ... बहुत खूब

expression ने कहा…

वाह...
बहुत ही सुन्दर.....

अनु

Amrita Tanmay ने कहा…

अहा! अद्भुत भाव..शाश्वत सत्य..

संध्या शर्मा ने कहा…

वाह बहुत खूब... कण-कण में हो तुम, हर तरफ बस तुम हो तुम...अति सुन्दर भाव ...

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुंदर रचना

Anju (Anu) Chaudhary ने कहा…

आध्यात्मिक लेखन :)

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

तुम कौन

रचना दीक्षित ने कहा…

लिखता हूँ कविता मैं / भाव हो तुम
संजोता हूँ शब्द मैं / अर्थ हो तुम.

बहुत सुंदर.

सुबीर रावत ने कहा…

सुन्दर शब्दों में एक अति सुन्दर रचना। आभार ।

sushma 'आहुति' ने कहा…

लिखता हूँ कविता मैं / भाव हो तुम
संजोता हूँ शब्द मैं / अर्थ हो तुम
क्या कहता हूँ , कैसे कहता हूँ / शैली हो तुम
मेरे अधरों पर अंतिम / ' केवल ' शब्द हो तुम ...bhaut hi khubsurat shabdo me bhaavo ko sajaya hai aapne.....

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…


जीवन पथ में, मैं अकेला / साथी हो तुम
मंजिल को पाने मैं निकला / साहिल हो तुम
मेरे हृदय में उठती करुणा / आंसू हो तुम
हर शै पर चमकने वाला / सितारा हो तुम .
जीवन और जगत में / चेतना हो तुम

सुंदर प्रविष्टि !
सुंदर शब्दों से सजे सुंदर भाव !

वाऽह ! वाऽह !

केवल राम जी
… बधाई !
…आपकी लेखनी से सुंदर सार्थक रचनाओं का सृजन ऐसे ही होता रहे …
शुभकामनाओं सहित…

संजय भास्कर ने कहा…

लिखता हूँ कविता मैं / भाव हो तुम
संजोता हूँ शब्द मैं / अर्थ हो तुम
........... बेहद खूबसूरत प्रस्तुति अनुपम भाव संयोजित किये हैं आपने

संजय भास्कर ने कहा…

what a beautiful line..
मेरे अधरों पर अंतिम / ' केवल ' शब्द हो तुम
thnx for sharing.......Kewal bhai

@ Sanjay bhaskar

संजय भास्कर ने कहा…

what a beautiful line..
मेरे अधरों पर अंतिम / ' केवल ' शब्द हो तुम
thnx for sharing.......Kewal bhai

@ Sanjay bhaskar

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

बहुत ही सुन्दर कविता भाई केवल राम जी |

वाणी गीत ने कहा…

भाव ना हो तो कविता कहाँ !
सुन्दर !

ब्लॉ.ललित शर्मा ने कहा…

यत्र तत्र सर्वत्र बस तुम ही तुम :)

Madan Mohan Saxena ने कहा…

बहुत सराहनीय प्रस्तुति. आभार. बधाई आपको