07 जून 2011

मेरी हर सोच

मेरी  हर सोच अनलिखी कहानी हो गयी
मेरी हर ग़ज़ल अब पुरानी हो गयी .

सपना था सजाया जो कल्पनाओं में
उन सपनों की महफ़िल वीरानी हो गयी .

हर पल जिन्हें निहारने को तरसती  निगाहें
वक़्त के फेर में उनसे बे ईमानी हो गयी .
 
सजते थे सपने खूब आज वक्त  ने याद दिलाया
उन्हें पाने की तमन्ना में नादानी हो गयी .

लाख कोशिश की 'केवल' उन्हें भूलने की
उनकी तस्वीर अब  मेरी जिंदगानी हो गयी .

79 टिप्‍पणियां:

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

सजते थे सपने खूब आज वक्त ने याद दिलाया
उन्हें पाने की तमन्ना में नादानी

सुंदर भाव.... समय के बहुत कुछ बदल जाता है ..यह समय ही याद दिलाता है...

वाणी गीत ने कहा…

उनकी बेईमानी ने इतनी खूबसूरत ग़ज़ल लिखवा दी ...
ये भी क्या कम हैं जो इश्क के सितम है ...
दूर सही मगर साथ यादें हमकदम हैं !

sushma 'आहुति' ने कहा…

bhut hi khubsurat bhaavo saji rachna... very nice...

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत उम्दा केवल भाई.

संतोष त्रिवेदी ने कहा…

तस्वीर को दिल से लगाए रखिये ,
कोरे कागज पर कलम चलाते रहिये !

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत सुन्दर भावों से सजी सुन्दर कविता| धन्यवाद|

Patali-The-Village ने कहा…

बहुत सुन्दर भावों से सजी सुन्दर कविता| धन्यवाद|

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बेहतरीन भाव संप्रेषण।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

तक़दीर का सारा खेल है ये और वक़्त की हेराफेरी है ...

ZEAL ने कहा…

सजते थे सपने खूब आज वक्त ने याद दिलाया
उन्हें पाने की तमन्ना में नादानी हो गयी...

Beautiful expression !

.

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

tasveer jab jindagi hai, to wo kya hongi...........:)

batana kewal bhai..!!

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

shimla ka airticket lekar jaldi se mere blog pe aana..........:D

डॉ टी एस दराल ने कहा…

भावपूर्ण ग़ज़ल ।
ग़ज़ल लिखने का प्रयास अच्छा है ।

chaudhry akshr jyotish ने कहा…

अरे ये अश्क अभी तू इन्तजार कर इस जमीपे गिरने के लिए :
अभी तो जमाने में पत्थर बहुत है मुहब्बत में ठोकर खाने के लिए :
एक तू ही तो है जो इन आखो में रहता है :
तेरे सिबा है ही कौन इन आखो में बसाने के लिए :
अरे ये अश्क अभी तू इन्तजार कर इस जमीपे गिरने के लिए :
अभी तो जमाने में पत्थर बहुत है मुहब्बत में ठोकर खाने के लिए :

Kavita Prasad ने कहा…

Bhav poorna rachna...

Babli ने कहा…

लाख कोशिश की 'केवल' उन्हें भूलने की
उनकी तस्वीर अब मेरी जिंदगानी हो गयी..
दिल को छू गयी ये पंक्तियाँ! बहुत सुन्दर और भावपूर्ण रचना!

सदा ने कहा…

जते थे सपने खूब आज वक्त ने याद दिलाया
उन्हें पाने की तमन्ना में नादानी हो गयी .

लाख कोशिश की 'केवल' उन्हें भूलने की
उनकी तस्वीर अब मेरी जिंदगानी हो गयी .
वाह ... हर पंक्ति बेहतरीन भावों के साथ ..।

ललित शर्मा ने कहा…

वाह वा वाह वा..........आज तो माईलों मीटर भी तोड़ दिया... सुभान अल्ला

Mani Singh ने कहा…

भावानाओ को बखुबी व्यक्त किया आपने बधाई हो आपको !

वन्दना ने कहा…

क्या बात है आज तो भावनाओं के ज्वार ने हर बांध तोड दि्या।

Ravi Rajbhar ने कहा…

सजते थे सपने खूब आज वक्त ने याद दिलाया
उन्हें पाने की तमन्ना में नादानी हो गयी .

bahut hi khoob kaha kewal ji.
har line dil ko chhu gai.

गिरधारी खंकरियाल ने कहा…

संप्रेषित भाव अनमोल हैं

दिगम्बर नासवा ने कहा…

लाख कोशिश की 'केवल' उन्हें भूलने की
उनकी तस्वीर अब मेरी जिंदगानी हो गयी ...


बहुत खूब ... जो एक बार दिल में घर बना लें उन्हे भूलना आसान नही होता ... खूबसूरत ग़ज़ल है ....

Manpreet Kaur ने कहा…

क्या बात है है केवल राम जी बहुत उम्दा बात कही आपने !अपना महत्वपूर्ण टाइम निकाल कर मेरे ब्लॉग पर जरुर आए !
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संजय भास्कर ने कहा…

मेरी हर सोच अनलिखी कहानी हो गयी
मेरी हर ग़ज़ल अब पुरानी हो गयी
बहुत ही उम्दा शब्द है.....केवल राम जी

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत खूब केवल जी....खूबसूरत ग़ज़ल

संजय भास्कर ने कहा…

kuch pareshaniyo ke chale net par nahi aa pa raha hoon

shikha varshney ने कहा…

सपना था सजाया जो कल्पनाओं में
उन सपनों की महफ़िल वीरानी हो गयी .
बहुत सुन्दर पंक्तियाँ है ..

SomeOne ने कहा…

अरे मेरे भाई! बहुत ही दर्द है, पर ये जिन्दगी है ! ऐसे मुकाम हर मोड़ पर देखने को मिलेंगे

चंद्रमौलेश्वर प्रसाद ने कहा…

उनकी तस्वीर अब मेरी जिंदगानी हो गयी

>तस्वीर देख बुढापा फिर जवानी हो गयी :)

मुसाफिर क्या बेईमान ने कहा…

हर पल जिन्हें निहारने को तरसती निगाहें
वक़्त के फेर में उनसे बे ईमानी हो गयी .
************
ये वक्त ही कम्बक्त क्या इल्म है,
सीखा देता है बेईमानी.
बहुत खूब कहा.

वीना ने कहा…

सपना था सजाया जो कल्पनाओं में
उन सपनों की महफ़िल वीरानी हो गयी .

बहुत सुंदर शेर.....
बहुत अच्छी ग़ज़ल...

निर्मला कपिला ने कहा…

पूरी रचना बहुत अच्छी लगी। बधाई।

Arunesh c dave ने कहा…

आपकी पोस्ट कल चर्चा मंच का हिस्सा होंगी नजर डालियेगा

***Punam*** ने कहा…

आपने याद दिलाया तो मुझे याद आया....

बहुत भाव पूर्ण प्रस्तुति..!!

रश्मि प्रभा... ने कहा…

मेरी हर सोच अनलिखी कहानी हो गयी
मेरी हर ग़ज़ल अब पुरानी हो गयी . ... waah

सुबीर रावत ने कहा…

भाई केवल जी, आपकी खूबसूरत ग़ज़ल पर एक पुराना शेर याद आ गया;
दिल की धड़कन देख ली दिल की तमन्ना देख ली, झांक कर चिलमन से किसने मेरी दुनिया देख ली.

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत अच्छी लगी आप की यह रचना.

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

प्रशंसनीय!!

ज्योति सिंह ने कहा…

मेरी हर सोच अनलिखी कहानी हो गयी
मेरी हर ग़ज़ल अब पुरानी हो गयी .

सपना था सजाया जो कल्पनाओं में
उन सपनों की महफ़िल वीरानी हो गयी .
waah bahut khoob likha hai

sm ने कहा…

thoughtful lines

udaya veer singh ने कहा…

संवेदनशील शिल्प मार्मिक है --
सजते थे सपने खूब आज वक्त ने याद दिलाया
उन्हें पाने की तमन्ना में नादानी ..
बधाई .....

Era Tak ने कहा…

सजते थे सपने खूब आज वक्त ने याद दिलाया
उन्हें पाने की तमन्ना में नादानी हो गयी . ..wah bahut khoob...

रचना दीक्षित ने कहा…

लाख कोशिश की 'केवल' उन्हें भूलने की
उनकी तस्वीर अब मेरी जिंदगानी हो गयी.

खूबसूरत शेर और खूबसूरत गज़ल.शुभकामनाएँ.

सतीश सक्सेना ने कहा…

यादें जीवन का स्वरुप हैं ...शुभकामनायें केवल राम !

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत खूबसूरत गज़ल

गगन शर्मा, कुछ अलग सा ने कहा…

पर तस्वीर तेरी क्या "मेरा" दिल बहला पाएगी ?

Chandra Bhushan Mishra 'Ghafil' ने कहा…

बहुत अच्छा

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Zakir Ali 'Rajnish') ने कहा…

बडी बात कह गये आप।

---------
बाबूजी, न लो इतने मज़े...
चलते-चलते बात कहे वह खरी-खरी।

Khare A ने कहा…

bahut hi sudnar gazal ban padi hai!

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

बहुत मर्मस्पर्शी वैचारिक रचना...

LAXMI NARAYAN LAHARE ने कहा…

sudar abhibykti
hardik badhai ....

Akshita (Pakhi) ने कहा…

बहुत सुन्दर गजल ...अच्छा लगा यहाँ आकर ..बधाई
___________________

'पाखी की दुनिया ' में आपका स्वागत है !!

M VERMA ने कहा…

बहुत सुन्दर भाव की गज़ल

S.M.HABIB ने कहा…

उम्दा ग़ज़ल कही है केवल भाई...
सादर शुभकामनाये....

upendra shukla ने कहा…

wah ram
kabhi mere blog par bhi aaye aane ke liye yaha click kare-"samrat bundelkhand"

mahendra srivastava ने कहा…

अच्छी रचना

Mirchiya Manch ने कहा…

उम्दा,बेहतरीन ग़ज़ल

Rachana ने कहा…

हर पल जिन्हें निहारने को तरसती निगाहें
वक़्त के फेर में उनसे बे ईमानी हो गयी .
bahut khoob
rachana

मेरे भाव ने कहा…

बढ़िया कविता...

Harsh ने कहा…

bahut khoob

संध्या शर्मा ने कहा…

मेरी हर सोच अनलिखी कहानी हो गयी
मेरी हर ग़ज़ल अब पुरानी हो गयी........

"उनकी तस्वीर अब मेरी जिंदगानी हो गयी ..."
वाह...उनकी तस्वीर ही जिंदगानी हो गई...जवाब नहीं...
सुन्दर भावनाओ से भरी मन को गहराई तक छू रही है हर एक पंक्ति... बहुत सुन्‍दर रचना...

veerubhai ने कहा…

लाख कोशिश की केवल उन्हें भूलने की ,
उनकी तस्वीर मेरी जिंदगानी हो गई ।
ग़ज़ल पुरानी होना चाहे हो जाए ।
प्यार मोहब्बत केवल कभी पुरानी नहीं होती

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

मेरी हर सोच अनलिखी कहानी हो गयी
मेरी हर ग़ज़ल अब पुरानी हो गयी .

बहुत सुन्दर ....

Ankur jain ने कहा…

kevalji sundar prastuti...kavyadhara men aap apna dil nikal kar rakh dete hain...vadhayi!!!!

आकाश सिंह ने कहा…

लाख कोशिश की 'केवल' उन्हें भूलने की
उनकी तस्वीर अब मेरी जिंदगानी हो गयी .
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बहुत सुन्दर.........

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

भावानुभूतियों की सुन्दर अभिव्यक्ति
...............................हर शेर अर्थपूर्ण

बेनामी ने कहा…

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यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

बहुत अच्छा लिखा है सर!
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कल 21/06/2011को आपकी एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की गयी है-
आपके विचारों का स्वागत है .
धन्यवाद
नयी-पुरानी हलचल

Rakesh Kumar ने कहा…

आपकी गजल पुरानी होकर भी नित नित नई होती जा रहीं हैं.क्यूंकि उनकी तस्वीर को आपने अब अपनी जिंदगानी ही बना लिया है.'केवल'जी आप उनको भूलने की कोशिश ही क्यूँ कर रहें हैं अब.

Babli ने कहा…

मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
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नश्तरे एहसास ......... ने कहा…

भावनाओ के समंदर की लहरों ने सबको गीला कर दिया..........बहुत उत्कृष्ट रचना

नश्तरे एहसास ......... ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
upendra shukla ने कहा…

bahut accha
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gopal mishra ने कहा…

wah wah....

अनुपमा त्रिपाठी... ने कहा…

वाह ....नब्ज़-ए-ज़िन्दगी पकड़ कर ये शायरी लिखी है ...!!
बहुत सुंदर ...!!
शुभकामनायें.

ana ने कहा…

wah wah ..kya kahane

prerna argal ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
prerna argal ने कहा…

सजते थे सपने खूब आज वक्त ने याद दिलाया
उन्हें पाने की तमन्ना में नादानी हो गयी .
bahoot khoob kevalji sunder gajal.badhaai aapko.
happy friendship day.
/ ब्लोगर्स मीट वीकली (३) में सभी ब्लोगर्स को एक ही मंच पर जोड़ने का प्रयास किया गया है / आप आइये और अपने विचारों से हमें अवगत कराइये/ हमारी कामना है कि आप हिंदी की सेवा यूं ही करते रहें। सोमवार ०८/०८/११ कोब्लॉगर्स मीट वीकली (3) Happy Friendship Day में आप आमंत्रित हैं /