15 जून 2010

कुछ कहने का मतलब

आज कल आभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के बारे में सोचना थोड़ा अजीब सा लगता हैपर जैसे-जैसे हम प्रगति के पथ पर अग्रसर हैं, वैसे ही हमें अपनी आभिव्यक्ति के बारे में  भी सोचना होगा. कुछ कहने का मतलब यह नहीं कि हम सब कुछ सही कह रहे हैं, आज के परिवेश में सबसे बड़ी बात यह है कि हम कुछ कहने से पहले कुछ सोचने की जरुरत भी नहीं समझते, जो मुंह  में आता है उसे उसी रूप में कह देते हैं. परिणामस्वरूप हमें कई बार अपनी कही गयी बातों  के लिए ही सफाई देनी पड़ती है. इसलिए हम अपने शब्दों की महता को समझेंऔर एक सभ्य समाज के व्यक्ति कहलाने का प्रयास करें.

2 टिप्‍पणियां:

जब भी आप आओ , मुझे सुझाब जरुर दो.
कुछ कह कर बात ऐसी,मुझे ख्वाब जरुर दो.
ताकि मैं आगे बढ सकूँ........केवल राम.