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15 दिसंबर 2012
हो तुम
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जीवन पथ में , मैं अकेला / साथी हो तुम मंजिल को पाने मैं निकला / साहिल हो तुम मेरे हृदय में उठती करुणा / आंसू हो तुम हर शै पर...
20 टिप्पणियां:
03 नवंबर 2012
वर्तमान वैश्विक परिदृश्य और मानवीय मूल्यों की सार्थकता
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मानव का स्वभाव है. वह हर कर्म करने से पहले सोचता है और आकलन करता है अपनी लाभ-हानि का. जब मानव में चिंतन की प्रवृति जागृत होती है तो , वह ...
13 टिप्पणियां:
08 जून 2012
दुआ का एक लफ्ज, और वर्षों की इबादत...4
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गतांक से आगे...!!! मनुष्य जब भौतिक चीजों से उपर उठकर सिर्फ और सिर्फ ईश्वर को पाने के लिए प्रार्थना करता है तो उसकी प्रार्थना उसे आनंद द...
25 टिप्पणियां:
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