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16 जुलाई 2014

तुम

22 टिप्‍पणियां:
'मैं' और 'आप'
जब ‘हम’ हो गए
सत्ता समाप्त हो गयी ‘दो’ की
एकाकार हो गए, शब्द और भाव
शब्द संकुचित-अर्थ विस्तृत
अहसासों के गर्भ में
शब्दों के अर्थ खो गए
पता नहीं हम 'दो' थे
कैसे दो से 'एक' हो गए

ना जाने कैसे
हमारे अहसास एक हो गए
दूरियां मिट गयी जो दरमियाँ थीं
जीवन के रंग बदल गए
चारों और छा गयी खुशियाँ
महसूस होने लगा
इस जहान में
तुम सा कोई भी नहीं.
सच में तुम सा कोई नहीं

तुम, बस तुम ही तुम.....!!!  

12 फ़रवरी 2011

अहसास होता है

73 टिप्‍पणियां:
कभी-कभी हमारी जिन्दगी में हमारी सोच के अनुकूल कुछ नहीं होता तो हम हताश हो जाते हैं. ऐसी स्थिति में अगर हमें कोई आशा की किरण दिखाई देती है तो वह है ‘ईश्वर’. लेकिन ईश्वर पर हमारा यकीन उस स्तर का नहीं होता, जिस स्तर का होना चाहिए. ऐसी स्थिति में मन में कुछ यूं हलचल मचती है....!!!      

क्योँ कभी-कभी यह मन उदास होता है
है तू कण-कण में, क्योँ नहीं अहसास होता है.

तेरी रहमत का सदका है जमीं आसमां में
क्यों नहीं मेरे मन को यह विश्वास होता है.

है हर तरफ जलवा तेरा, गर तेरे हैं सब
फिर कोई क्योँ पराया, कोई ख़ास होता है.

मुद्दत बाद मिली जिन्दगी, वो भी चंद साँसें
क्योँ तृष्णाओं-लालसाओं का लिवास होता है.

सब कुछ भुलाकर, तेरा अर्पण कर दिया तुझे
हर पल तुझे देखता हूँ, पल-पल अहसास होता है.

27 अगस्त 2010

चाँद से चेहरे को...............केवल राम

4 टिप्‍पणियां:
चाँद से चेहरे को आँचल में छुपाये रखना
मेरी तस्वीर को सीने से लगाये रखना

तेरी जुल्फों की हवा लगती है सबको भली
अपने दामन को जमाने से बचाए रखना

फिर याद आएगी मोहब्बत मेरी इक रोज तुझे
अपनी पलकों को मेरी राहों में बिछाये रखना

इश्क बदनाम न हो जाये ज़माने में कहीं
हर शहरी से मेरा नाम छुपाये रखना

सपना है ' केवल' प्यार यहाँ बेहद दर्द है
कहे लाख जमाना , तुम मुझे अपनाये रखना

हार के फिर जिता दी है बाजी तुमने मेरी
प्यार के इस खेल में, मुझे खिलाडी बनाये रखना