पृष्ठ
(यहां ले जाएं ...)
आमुख
परिचय
ग़ज़ल
कवितायें
क्षणिकाएं
आलेख
पॉडकास्ट
उपयोगी लिंक
विविध विषय
प्रिंट मीडिया
ब्लॉगर मिलन
सेमीनार
फोटो गैलरी
▼
मनुष्य
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
मनुष्य
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
06 नवंबर 2016
प्रकृति-मनुष्य और शिक्षा की भाषा...2
›
गत अंक से आगे ...भावों की अभिव्यक्ति के लिए मनुष्य ही नहीं, बल्कि जीव जन्तु भी कुछ ध्वनि संकेतों का प्रयोग करते हैं. हालाँकि हम उनके ध्वनि...
1 टिप्पणी:
01 नवंबर 2016
प्रकृति-मनुष्य और शिक्षा की भाषा...1
›
इस ब्रह्माण्ड को जब हम समझने का प्रयास करते हैं तो हम यह पाते हैं कि इसकी गति निश्चित है. जितनी भी जड़ और चेतन प्रकृति है वह अपनी समय और सी...
23 सितंबर 2016
जीवन में इतिहास जैसा कुछ नहीं...3
›
गत अंक से आगे ... इस यात्रा का अनुभव अद्भुत है, लेकिन यह महसूस तब होता है जब हम इसे महसूस करना चाहते हैं. अधिकतर तो मनुष्य के साथ यह होता ...
4 टिप्पणियां:
08 मार्च 2016
एक ऐसा विश्व जहाँ सिर्फ इनसान रहते हों
›
पहचानों के दायरे में सिमटता इनसान संभवतः अपनी वास्तविक पहचान को भूल गया है. ऐसा कौन सा समय रहा होगा जब मनुष्य ने खुद को मनुष्य के रूप में ...
3 टिप्पणियां:
04 नवंबर 2015
मनुष्य : मान्यता और मानसिकता
›
‘मनुष्य’ शब्द जब भी जहन में आता है तो मन ‘कल्पना’ में कहीं खो जाता है, और वह कल्पना मनुष्य जाति के इतिहास और वर्तमान का आकलन करते हुए भविष...
8 टिप्पणियां:
12 अक्टूबर 2015
जन्मदिन और जीवन की प्रासंगिकता
›
जीवन एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है. मनुष्य जीवन के विषय में शायद तब भी कोई विचार नहीं करता जब वह बहुत गहरे संकट में होता है. यहाँ तक कि मन...
4 टिप्पणियां:
25 अप्रैल 2013
मात्र देह नहीं है नारी...1
›
पिछले कुछ अरसे से नारी शब्द एक तरह से बहस का मुद्दा बना हुआ है. सड़क से संसद तक इस मुद्दे पर चर्चाएँ होती रही हैं. अख़बारों के प्रत्येक पृष्...
14 टिप्पणियां:
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें