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16 मार्च 2017
रूढ़ियाँ-समाज और युवाओं की जिम्मेवारी...4
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गत अंक से आगे...!!! 4. धर्म के वास्तविक महत्व को समझने की कोशिश करें: आदमी किसी भी समाज में पैदा हो , लेकिन दो चीजें उसके जन्म के साथ ...
18 सितंबर 2016
जीवन में इतिहास जैसा कुछ नहीं...2
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गत अंक से आगे .... मनुष्य चेतना का प्रतिबिम्ब है और यही इसकी वास्तविक पहचान है. वैसे अगर चेतना के इस दायरे को मनुष्य से बाहर की दुनिया पर ...
4 टिप्पणियां:
14 सितंबर 2016
जीवन में इतिहास जैसा कुछ नहीं...1
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इतिहास शब्द जहन में आते ही हम अतीत के विषय में सोचना शुरू करते हैं. संभवतः हम अतीत के विषय में जानने और समझने के लिए कल्पना का सहारा कम ही...
3 टिप्पणियां:
08 मार्च 2016
एक ऐसा विश्व जहाँ सिर्फ इनसान रहते हों
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पहचानों के दायरे में सिमटता इनसान संभवतः अपनी वास्तविक पहचान को भूल गया है. ऐसा कौन सा समय रहा होगा जब मनुष्य ने खुद को मनुष्य के रूप में ...
3 टिप्पणियां:
28 जून 2014
धूल चेहरे पर थी और मैं आईना साफ करता रहा
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दुनिया भर के श्रेष्ठ साहित्य का जब हम बहुत गहराई से अध्ययन करते हैं तो पाते हैं कि दुनिया भर का अधिकतर साहित्य एक बिन्दु पर केन्द्रित है औ...
7 टिप्पणियां:
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