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31 दिसंबर 2011
जब तुझे रुकना ही नहीं है तो
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समय : सोचता हूँ तू किसी दिन अगर ठहर जाता तो मेरी सांसों का यह सफ़र भी थोड़ी देर के लिए विश्राम पाता और मैं करता तुझसे बातें तेरे साथ बिता...
35 टिप्पणियां:
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