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16 जुलाई 2014
तुम
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'मैं' और 'आप' जब ‘हम’ हो गए सत्ता समाप्त हो गयी ‘दो’ की एकाकार हो गए, शब्द और भाव शब्द संकुचित-अर्थ विस्तृत अहसा...
22 टिप्पणियां:
28 जून 2014
धूल चेहरे पर थी और मैं आईना साफ करता रहा
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दुनिया भर के श्रेष्ठ साहित्य का जब हम बहुत गहराई से अध्ययन करते हैं तो पाते हैं कि दुनिया भर का अधिकतर साहित्य एक बिन्दु पर केन्द्रित है औ...
7 टिप्पणियां:
26 जून 2014
एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो
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जीवन का क्रम है ही कुछ ऐसा कि आपको कहीं भी किसी भी परिस्थिति का सामना कर पड़ सकता है. लेकिन अगर आप अपने दृढ निश्चय के साथ आगे बढ़ रहे हैं तो...
7 टिप्पणियां:
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