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23 जून 2011
मेरे तो गिरधर गोपाल
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जीव की यात्रा अनन्त है और जीवन की एक सीमा है . जीव जब किसी शरीर में प्रवेश करता है तो जीव को जीवन मिलता है और जब जीव शरीर में आता है तो स...
40 टिप्पणियां:
07 जून 2011
मेरी हर सोच
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मेरी हर सोच अनलिखी कहानी हो गयी मेरी हर ग़ज़ल अब पुरानी हो गयी . सपना था सजाया जो कल्पनाओं में उन सपनों की महफ़िल वीरानी हो गयी . हर ...
76 टिप्पणियां:
01 जून 2011
इन्तजार
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जाने कब चाँद , मेरी छत पर आएगा मुझ में है जो तड़प , उसे कब बुझाएगा सुहानी रात तो ढल चुकी भोर का बावरा लालिमा लेकर कहीं दूर पहाड़ क...
55 टिप्पणियां:
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