16 जुलाई 2017

हिन्दी ब्लॉगिंग : आह और वाह!!!...3

गत अंक से आगे.....हिन्दी ब्लॉगिंग का प्रारम्भिक दौर बहुत ही रचनात्मक था. इस दौर में जो भी ब्लॉगर ब्लॉगिंग के क्षेत्र में सक्रिय थे, वह इस माध्यम के प्रति काफी रचनात्मक और गम्भीर थे. हालाँकि उस समय अंतर्जाल पर हिन्दी को लेकर कुछ तकनीकी बाधाएं जरुर थीं, लेकिन हिन्दी को अन्तर्जाल पर स्थापित करने की दिशा में बड़ी गम्भीरता से काम किया जा रहा था. जैसे ही इन तकनीकी बाधाओं से थोड़ी सी राहत मिली, ब्लॉग जैसे प्लेटफ़ॉर्म का प्रचार हुआ तो हिन्दी ब्लॉगिंग की दुनिया में नए और उर्जावान लोगों का पदार्पण हुआ. यह लोग नयी भाषा-भाव और अभिव्यक्ति के नए तरीकों से सरावोर थे. यह वही लोग थे जो किसी अकादमिक दुनिया में अपना परचम लहराने के लिए नहीं लिख रहे थे, और न ही इन्हें कोई ऐसी मजबूरी थी कि इन्हें लिखना ही है. यह वह लोग थे जो अपने निजी जीवन के समय में से कुछ समय निकालकर हिन्दी ब्लॉगिंग के लिए समर्पित कर रहे थे.  हिन्दी ब्लॉगिंग की दुनिया में पदार्पण करने वाले यह लोग अपने अध्ययन और रोजगार के विभिन्न क्षेत्रों के अनुभव को हिन्दी भाषा के माध्यम से साँझा कर रहे थे. बहुत ही कम समय में अंतर्जाल पर ब्लॉगिंग के माध्यम से साहित्य-इतिहास-पुरातत्व-अर्थशास्त्र-राजनीतिविज्ञान-मनोविज्ञान-खगोलशास्त्र-ज्योतिष आदि अनेक विषयों की जानकारी हिन्दी भाषा में प्राप्त होने लगी. ब्लॉग अब एक मंच बन गया अभिव्यक्ति के विभिन्न रूपों का. यहाँ पर मुख्यधारा के पत्रकारों का एक समूह सक्रिय हो गया, और वह उस खबर का विश्लेषण नए अंदाज में करने लगा, जिसे वह सम्पादकीय दवाब के चलते अपने अखबार या टीवी चैनल के माध्यम से नहीं कर सकता था. इसी दौर में काफी सामूहिक ब्लॉग भी बने, जो किसी एक खास मकसद के लिए स्थापित किये गए थे. कुछ ही दिनों बाद यह नारा दिया गया कि ‘ब्लॉगिंग अभिव्यक्ति की नयी क्रान्ति है’.
यह बात तो सही भी है कि ब्लॉगिंग ने अभिव्यक्ति के क्षेत्र में काफी बदलाव किये हैं. पाठक और रचनाकार के बीच की दूरी को कम किया है. पाठक किसी रचना के विषय में क्या सोचता है, उसकी क्या राय है, उससे रचनाकार सहज ही अवगत हो जाता है. इसे अभिव्यक्ति के क्षेत में हुए बदलाव का एक महत्वपूर्ण पहलू कहा जा सकता है. लेकिन जिस मायने में ब्लॉगिंग अभिव्यक्ति की नयी क्रान्ति है, उसका प्रतिफल आना अभी बाकी है. सिर्फ माध्यम के बदलने से कोई क्रान्ति घटित नहीं होती, क्रान्ति जब घटित होती है, तब वह समूल परिवर्तन करती है. हमें इस बात को समझना होगा कि ब्लॉगिंग के माध्यम से हम क्या कुछ नया हासिल कर पाए और आगे हम क्या कुछ नया हासिल करने की इच्छा रखते हैं. ब्लॉगिंग का उद्देश्य हर किसी के लिए अलग हो सकता है. लेकिन जब हम ब्लॉगिंग को समाज और राष्ट्र के सरोकारों से जोड़ेंगे तो यक़ीनन हमें वह लाभ प्राप्त होंगे, जिनकी हम परिकल्पना कर रहे हैं. लेकिन इसके लिए हमें सतत प्रयास करने की जरुरत है. ब्लॉगिंग को और धार देने की आवश्यकता है. इस माध्यम के माध्यम से अपने निजी भावों की अभिव्यक्ति के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों की दिशा में भी काम करने की जरुरत है. हालाँकि ऐसा नहीं है कि हिन्दी ब्लॉगों पर सामाजिक सरोकारों से जुड़ सामग्री नहीं मिलती, या लोग समाज और राष्ट्र को लेकर कुछ नहीं लिख रहे हैं, लोग लिख रहे हैं लेकिन ऐसे लोगों को ‘नोटिस’ कौन कर रहा है, यह सबसे बड़ा प्रश्न है? हमारा अधिकतर ध्यान हिन्दी ब्लॉगों और ब्लॉगरों की संख्या पर केन्द्रित है, उनकी सक्रियता पर केन्द्रित है. लेकिन सही मायने में हमें यह भी परख करनी होगी कि कौन क्या लिख रहा है? और बेहतर लिखने वालों को प्रोत्साहित भी करना होगा. हमें सही मायने में किसी भी मुद्दे को विमर्श के केन्द्र में लाना होगा. लेकिन यह होगा तब ही जब हम लेखन के प्रति जागरूक होंगे.             
अभी जो विचार किया जा रहा है कि हिन्दी ब्लॉगिंग को किस तरह से पुनः पटरी पर लाया जाए . तो इसका एक सीधा सा जबाब है कि हम अपने लेखन के प्रति गम्भीर हो जाएँ. अब हमें मात्र सक्रिय रहने के लिए ही नहीं लिखना है. अब हमें जो कुछ भी लिखना है वह लेखकीय जिम्मेवारी के साथ लिखना है. बहस-सहमति-असहमति लेखन का एक महत्वपूर्ण पहलू है, हमें हर एक टिप्पणी को, किसी के दृष्टिकोण को, तथा किसी नवीन जानकारी के प्रति बहुत सजगता से विचार करते हुए आगे बढ़ना होगा. बहुत जरुरी है कि हम एक सकारात्मक वातावरण तैयार करें और अपने ब्लॉगों को ऐसी सामग्री से सरावोर करें, जो सही मायने में पाठक के लिए लाभप्रद हो. मात्र टिप्पणी की संख्या के हिसाब से यह अन्दाजा लगाने की कोशिश न की जाये कि मेरी यह रचना काफी महत्वपूर्ण हो गयी है. हमारी किसी रचना की क्या महता है, वह उसके पाठकों से पता चलती है, और यह निर्णय हम एक दिन में नहीं कर सकते. इसके लिए थोडा वक़्त लगता है. सर्च इंजन से जो पाठक आपकी रचना तक पहुंचता है, वह उस पर कितना समय बिताता है वहीँ से हम एक अंदाजा लगा सकते हैं कि हमें अपने लेखन में किस तरह के बदलाव करने की जरुरत है. हालाँकि यह सब तकनीकी पहलू हैं, आम ब्लॉगर इनकी तरफ ध्यान नहीं दे पाता. ऐसे में उसके लिए टिप्पणी की संख्या बहुत मायने रखती है. मैंने टिप्पणी करने के खिलाफ नहीं हूँ, यक़ीनन टिप्पणी बहुत प्रोत्साहन देती है. लेकिन कोशिश यह भी होनी चाहिए कि हम वाह!! वाह !!! वाली टिप्पणियों के प्रति सतर्क हो जाएँ. लेखन और रचना के सन्दर्भ में अगर हम टिप्पणी करते हैं तो यक़ीनन वह रचनाकार को खुद का विश्लेषण करने का मौका देती है. इससे उसका भी लेखन परिष्कृत होता है, जिसका लाभ निकट भविष्य में उसी रचनाकार को होता है. जरुरी नहीं कि हमें सब विषयों की जानकारी हो, लेकिन हम जिन विषयों पर लिखें, या जिस पोस्ट पर टिप्पणी करें, जो कुछ भी लिखें उसके प्रति हम पूरी तरह से सजग हों. अगर हम इस विमर्श को और आगे ले जाने में सहायक हो पायें तो वह दिन दूर नहीं जब हिन्दी ब्लॉगिंग अब तक हुए रचनात्मक क्षेत्र में एक नयी मशाल बनकर उभरेगी. 

10 टिप्‍पणियां:

  1. हिंदी ब्लागिंग की बहुत सुंदर और विस्तृत श्रंखला शुरू की है आपने जो बहुत ही उपयोगी और जानकारी से भरपूर है,आभार.
    रामराम
    #हिन्दी_ब्लॉगिंग

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  2. सजगता और जागरूकता ब्लॉग लेखन के अनिवार्य औज़ार हैं।

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  3. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, "थोड़ा कहा ... बहुत समझना - ब्लॉग बुलेटिन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  4. अभी तक यही देखने में आता है कि टिप्पणियां प्रशंसात्मक ही होती हैं, हमारा आलोचनात्मक होना भी जरुरी है। हालांकि इससे अधिकतर लोग विचलित हो जाते हैं !

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  5. ब्लॉगिंग लोकतांत्रिक विधि से होनी चाहिए...विपरीत मत का सम्मान किए बिना आपका अपना लेखन विकास नहीं कर सकता...

    जय हिन्द, जय #हिन्दी_ब्लॉगिंग

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    1. एकदम सही कहा आपने, यह लेखन का बुनियादी सिद्धांत है. मैंने भी कुछ इस तरह से इस पहलू को स्पष्ट करने की कोशिश की...
      बहस-सहमति-असहमति लेखन का एक महत्वपूर्ण पहलू है, हमें हर एक टिप्पणी को, किसी के दृष्टिकोण को, तथा किसी नवीन जानकारी के प्रति बहुत सजगता से विचार करते हुए आगे बढ़ना होगा. बहुत जरुरी है कि हम एक सकारात्मक वातावरण तैयार करें और अपने ब्लॉगों को ऐसी सामग्री से सरावोर करें, जो सही मायने में पाठक के लिए लाभप्रद हो.


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  6. सजग और सतीक विश्लेशण.

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जब भी आप आओ , मुझे सुझाब जरुर दो.
कुछ कह कर बात ऐसी,मुझे ख्वाब जरुर दो.
ताकि मैं आगे बढ सकूँ........केवल राम.