16 जुलाई 2014

तुम

21 टिप्‍पणियां:
'मैं' और 'आप'
जब ‘हम’ हो गए
सत्ता समाप्त हो गयी ‘दो’ की
एकाकार हो गए, शब्द और भाव
शब्द संकुचित-अर्थ विस्तृत
अहसासों के गर्भ में
शब्दों के अर्थ खो गए
पता नहीं हम 'दो' थे
कैसे दो से 'एक' हो गए

ना जाने कैसे
हमारे अहसास एक हो गए
दूरियां मिट गयी जो दरमियाँ थीं
जीवन के रंग बदल गए
चारों और छा गयी खुशियाँ
महसूस होने लगा
इस जहान में
तुम सा कोई भी नहीं.
सच में तुम सा कोई नहीं

तुम, बस तुम ही तुम.....!!!